'नई मिसाइलें बनाने पर काम कर रहा है उत्तर कोरिया'

  • 31 जुलाई 2018
इमेज कॉपीरइट KCNA

अमरीका के साथ बेहतर होते रिश्तों के बीच उत्तर कोरिया नई बैलिस्टिक मिसाइलों पर काम करता दिख रहा है.

ये दावा अमरीकी मीडिया की रिपोर्टों में किया गया है.

वॉशिंगटन पोस्ट ने अनाम अमरीकी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि जासूसी उपग्रहों ने उत्तर कोरिया के बैलिस्टिक मिसाइल निर्माण स्थल पर गतिविधियां देखी हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक अधिकारी के हवाले से कहा है कि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ये काम कहां तक पहुंचा है.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन के बीच इस साल जून में ऐतिहासिक वार्ता हुई थी.

वार्ता के बाद दोनों नेताओं ने कहा था कि वो उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की दिशा में काम करेंगे.

इस वार्ता के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि उत्तर कोरिया अब परमाणु ख़तरा नहीं है.

हालांकि अमरीका में घरेलू स्तर पर ट्रंप की आलोचना भी हुई थी. आलोचकों का कहना था कि ट्रंप ने किम जोंग उन से परमाणु हथियार ख़त्म करने के लिए कोई ठोस वादा लिए बिना ही उन्हें ढील दे दी.

उत्तर कोरिया में रॉकेट लॉन्च साइट नष्ट करने का काम शुरू

अमरीका का रवैया ख़ेदजनक: उत्तर कोरिया

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन 12 जून को सिंगापुर में मिले थे

क्या कहती हैं ताज़ा रिपोर्टें

सोमवार को द वॉशिंगटन पोस्ट अख़बार ने अधिकारियों के हवाले से कहा है कि उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयोंग के नज़दीक सानुमडोंग में एक या दो तरल ईंधन वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें (आईसीबीएम) बना रहा है.

इस निर्माण स्थल पर उत्तर कोरिया ने अमरीका तक पहुंच रखने वाली अपनी पहली आईसीबीएम ह्वासोंग-15 निर्मित की थी.

हालांकि एक अमरीकी अधिकारी ने रॉयटर्स से कहा है कि तरल ईंधन वाली आईसीबीएम से अमरीका को उतना ख़तरा नहीं है जितना ठोस ईंधन वाली आईसीबीएम से होता है क्योंकि तरल ईंधन भरने में समय लगता है.

क्या कहना है विशेषज्ञों का

उत्तर कोरिया के अपने हथियार कार्यक्रमों को जारी रखने के बारे में ये पहली रिपोर्टें नहीं है. ऐसी रिपोर्टों से सिंगापुर में ट्रंप और किम जोंग उन के बीच हुई वार्ता के वास्तविक असर पर सवाल खड़े होते हैं.

मिडिलबेरी इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंटरनेशनल स्टडीज़ (एमआईआईएस) से जुड़े विशेषज्ञ जेफ़री लुइस ने वॉशिंगटन पोस्ट को बताया, "उपग्रह से ली गईं सानुमडोंग स्थल की तस्वीरें बताती हैं कि वहां काम चल रहा है."

उन्होंने कहा, "ये स्थल किसी भी तरह से निष्क्रिय नहीं है. हमने वहां से शिपिंग कंटेनर और वाहन आते-जाते देखे हैं. ये वही जगह है जहां वो आईसीबीएम और अंतरिक्ष प्रक्षेपण यान बनाते हैं."

एमआईआईएस से जुड़ी एक और विशेषज्ञ मेलिसा हेनहेम ने ट्विटर पर कहा, "पनमुनजोम और सिंगापुर में हुई वार्ताओं के दौरान इस स्थल पर जीवन पहले की ही तरह चलता रहा है."

इससे संकेत मिलते हैं कि वार्ता के बाद उत्तर कोरिया ने काम पूरी तरह बंद नहीं किया है.

हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि एमआईआईएस के विशेषज्ञ इन जानकारियों की पूरी तरह से पुष्टि नहीं कर सकते हैं.

दक्षिण कोरिया ने दुनिया को क्या-क्या दिया?

क्या उत्तर कोरिया चोरी-छिपे परमाणु कार्यक्रम चला रहा है?

उत्तर कोरिया: इस होटल की पांचवी मंज़िल पर मत जाना

सिंगापुर में क्या समझौता हुआ था?

इमेज कॉपीरइट AFP

उत्तर कोरिया ने बीते दो सालों में अपना परमाणु कार्यक्रम तेज़ी से आगे बढ़ाया था. बीते साल सितंबर में उत्तर कोरिया ने परमाणु परीक्षण किया था. ये उत्तर कोरिया का छठा परमाणु परीक्षण था.

लेकिन सिंगापुर में हुई ऐतिहासिक वार्ता में ट्रंप और किम कोरियाई प्रायद्वीप को पूरी तरह से परमाणु मुक्त करने पर सहमत हुए थे.

उत्तर कोरिया अपने परमाणु कार्यक्रम को कब ख़त्म करेगा और इसकी पुष्टि कैसे की जाएगी इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी.

विशेषज्ञों ने उत्तर कोरिया के अपने परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म करने वादे पर भी सवाल उठाए थे.

पिछले सप्ताह पता चला था कि उत्तर कोरिया ने अपने एक अहम रॉकेट निर्माण स्थल को नष्ट करना शुरू कर दिया है.

हालांकि अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों की लीक हुई ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर कोरिया गुप्त तरीके से अपने परमाणु कार्यक्रम पर काम कर रहा हो सकता है.

रिपोर्टों में कहा गया है कि उत्तर कोरिया अपनी एकमात्र परमाणु संवर्धन केंद्र की क्षमता बढ़ा रहा है और अन्य स्थलों को भी विकसित कर रहा है.

अब उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों का क्या होगा?

किम-ट्रंप मुलाकात के बाद क्या कुछ बदला है उत्तर कोरिया में

अमरीका पर भरोसा न करे उत्तर कोरिया: ईरान

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे