क्या बांग्लादेश से भी भारत धीरे-धीरे हो रहा है बेदख़ल

  • 7 अगस्त 2018
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बांग्लादेश में इसी साल दक्षिणी और उत्तरी बांग्लादेश को जोड़ने वाला पुल बनकर तैयार हो जाएगा. छह किलोमीटर लंबा यह पुल दोनों इलाक़ों को सड़क और रेल के ज़रिए जोड़ेगा. बांग्लादेश बनने के बाद से यह इंजीनियरिंग की सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजना थी जो बनकर तैयार होने वाली है.

यह सेतु पदमा नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक है. फाइनैंशियल टाइम्स के अनुसार इस पुल के निर्माण में चीन ने 3.7 अरब डॉलर की रक़म लगाई है.

चीन ने इसमें न केवल पैसा दिया है बल्कि इंजीनियरिंग में भी मदद की है. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने भी बांग्लादेश में इस पुल को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है और कहा है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती दोस्ती का यह नया प्रतिमान है.

फ़ाइनैंशियल टाइम्स के अनुसार चीन बांग्लादेश में 30 अरब डॉलर की परियोजना पर काम कर रहा है और गंगा नदी पर छह किलोमीटर लंबा यह पुल इसी परियोजना का हिस्सा है.

कई राजनयिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी का भी मज़बूत प्रमाण है और यह भारत के लिए चिंताजनक है.

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चीन की मज़बूत एंट्री

इससे पहले विश्व बैंक ने बांग्लादेश को मिलने वाली 1.2 अरब डॉलर की मदद को रद्द कर दिया था. विश्व बैंक का कहना था कि उसके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि इस परियोजना में बांग्लादेश के सरकारी अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त थे.

इसके बाद ही चीन ने इस परियोजना को अपने हाथ में लिया था. बांग्लादेश में चीन के भारी निवेश को बिल्कुल नए सबूत की तरह देखा जा रहा है कि दक्षिण एशियाई देशों में चीन का प्रभाव तेज़ी से बढ़ रहा है.

चीन इसी तरह की परियोजना पर काम पाकिस्तान, श्रीलंका, मालदीव और नेपाल में भी कर रहा है. दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को भारत की कमज़ोरी और पड़ोसियों से बढ़ती दूरी के तौर पर भी देखा जा रहा है.

बांग्लादेश को भारत का स्वाभाविक पार्टनर माना जाता था, लेकिन अब यह धारणा टूटती दिख रही है. ज़ाहिर है बांग्लादेश के निर्माण में भारत की बड़ी भूमिका रही है, लेकिन चीन पाकिस्तान के क़रीब तो है ही बांग्लादेश के भी क़रीब आ गया है.

हाल के वर्षों में चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट वन रोड के तहत उसके विस्तार से भारत चिंतित दिखा है.

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सब बिछड़ रहे बारी-बारी

जिन देशों के साथ भारत के अच्छे संबंध थे, वहां भी चीन की मौजूदगी बढ़ी है. मालदीव में भारत की हाल तक अच्छी मौजूदगी थी, लेकिन सैन्य सरकार आने के बाद से वहां भी चीन कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है.

फ़ाइनैंशियल टाइम्स से मुंबई स्थित थिंक टैंक गेटवे-हाउस के रिसर्च फेलो अमित भंडारी ने कहा, ''पदमा नदी पर पुल का निर्माण वाक़ई एक महत्वपूर्ण परियोजना है. यह भारतीयों के लिए चिंतित करने वाला है. भारत के पड़ोसी देशों में चीन का विस्तार किसी झटके से कम नहीं है.''

चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर परियोजना के तहत चीन पाकिस्तान में रोड, रेलवे और बिजली प्लांट पर 60 अरब डॉलर ख़र्च कर रहा है. इस परियोजना के कारण पाकिस्तान के दक्षिण समुद्री तट पर ग्वादर पोर्ट के ज़रिेए चीन की पहुंच समुद्र में आसानी से बन रही है.

मालदीव ने भी चीन के साथ फ्री ट्रेड समझौता किया है. इसके तहत मालदीव ने भारतीय कंपनी जीएमआर इंफ़्रास्ट्रक्चर से एयरपोर्ट बनाने का ठेका लेकर चीन को दे दिया था.

श्रीलंका भी चीन के सरकारी बैंकों का क़र्ज़ नहीं चुका पाया तो उसे हम्बननोटा पोर्ट 100 सालों के लिए चीन के हवाले करना पड़ा. श्रीलंका में चीन को हम्बनटोटा मिलना भारत की रणनीतिक हार के तौर पर देखा जा रहा है.

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चीनी निवेश के सामने लाचार भारत

बांग्लादेश-भारत के बीच सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध रहे हैं, लेकिन चीन की बढ़ती मौजूदगी के सामने ये संबंध फीके पड़ते दिख रहे हैं. गेटवे हाउस के मुताबिक़ चीन बांग्लादेश में 31 अरब डॉलर के प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है.

पाकिस्तान के बाद दक्षिण एशिया में चीन का यह सबसे बड़ा निवेश है. चीन बांग्लादेश में रोड, रेलवे, कोल पावर प्लांट और पेय जल पर काम करने वाला है.

फाइनैंशियल टाइम्स से पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट ऑफ बांग्लादेश के कार्यकारी निदेशक अहसान मंसूर ने कहा है कि चीन के अगर निजी निवेश को मिला दिया जाए तो बांग्लादेश में चीनी निवेश की कुल राशि 42 अरब डॉलर हो जाती है.

भारत को उस वक़्त और तगड़ा झटका लगा था जब बांग्लादेश ने ढाका स्टॉक एक्सचेंज के 25 फ़ीसदी हिस्से को शंघाई और शेनज़ेन स्टॉक एक्सचेंज को 11 करोड़ 90 लाख डॉलर में बेच दिया जबकि भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को नहीं दिया था.

एनएसई के अधिकारी ढाका भी गए थे ताकि चीन को रोक सकें, लेकिन इसमें नाकामी ही हाथ लगी थी. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने ये भी तर्क दिया था कि चीन इस इलाक़े में राजनीति ताक़त का इस्तेमाल कर रहा है.

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हर तरफ़ चीन

इस डील में चीन से भारत के पिछड़ जाने के बाद ढाका स्टॉक एक्सचेंज के प्रबंध निदेशक मजेदुर रहमान ने कहा था, ''हमने इस पर लंबी बातचीत की थी, लेकिन आख़िर में चीन ने प्रतिस्पर्धात्मक नीलामी में बाजी मार ली. हमें वो अच्छे पार्टनर लगे. हमलोग का बाज़ार बहुत छोटा है और चीन से नई तकनीक के साथ लंबी अवधि वाली साझेदारी भी मिली.''

बाग्लादेश में चीन स्पेशल इकनॉमिक ज़ोन भी बनाने पर विचार कर रहा है. फ़ाइनैंशल टाइम्स के अनुसार चीन की एक कंपनी ने चटगांव में 5 अरब डॉलर के एक इकनॉमिक ज़ोन बनाने की पेशकश की है.

हालांकि भारत अब भी बांग्लादेश के क़रीब रहने की कोशिश कर रहा है ताकि राजनयिक संबंधों में चीन की बढ़ती मौजूदगी को संतुलित किया जा सके.

फ़रवरी 2016 में बांग्लादेश ने भारत के दबाव के बाद चीन की एक परियोजना को रद्द कर दिया था. बांग्लादेश से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि उसे चीनी पैसों से दिक़्क़त नहीं है, लेकिन वो यह नहीं चाहता है कि भारतीय समुद्र में उसका दख़ल बढ़े, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो.

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