मादुरो : वेनेज़ुएला का जुझारू नायक या नाकाम तानाशाह!

  • 10 अगस्त 2018
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तारीख : 4 अगस्त 2018

दिन : शनिवार

जगह : कराकस, वेनेज़ुएला

राजधानी कराकस में नेशनल गार्ड का 81वां सालाना समारोह चल रहा था.

राष्ट्रपति निकोलस मादुरो भाषण दे रहे थे और राष्ट्रीय टेलिविजन पर इसका सीधा प्रसारण हो रहा था.

शाम ठीक 5.41 बजे राष्ट्रपति अचानक भाषण रोककर ऊपर देखने लगे. अंगरक्षकों से घिरे छह फुट तीन इंच लंबे मादुरो के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगीं. पास खड़ीं उनकी पत्नी पत्नी सीलिया फ्लोरेस के चेहरे पर डर के भाव उभर आए.

इसके बाद कैमरा मंच के सामने कतार में खड़े सैनिकों की ओर घूमा. वो भागते नज़र आए और अचानक स्क्रीन काली हो गई. प्रसारण बंद हो गया.

कुछ वक़्त बाद वेनेज़ुएला के अधिकारियों ने एलान किया कि विस्फोटकों से लैस दो ड्रोन के जरिए राष्ट्रपति की जान लेने की कोशिश की गई.

जल्दी ही मादुरो भी सामने आए और विपक्ष के साथ पड़ोसी देश कोलंबिया को भी कठघरे में खड़ा कर दिया.

उन्होंने कहा, "मेरी जान लेने की कोशिश की गई. मुझे शक नहीं है कि इस हमले के पीछे वेनेज़ुएला के अतिवादी हैं. उन्हें कोलंबिया से मदद मिली है. (कोलंबिया के राष्ट्रपति) ख़्वान मैनुएल सांतोस इस कोशिश के पीछे हैं."

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Image caption राष्ट्रपति मादुरो जहां भाषण दे रहे थे, उस जगह के करीब की इमारत की खिड़कियां टूट गईं.

मादुरो ने उंगली अमरीका पर भी उठाई. कोलंबिया ने आरोपों को खारिज करने में देर नहीं की. वहीं अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने शक की सुई को घुमाकर मादुरो की तरफ ही कर दिया.

"अमरीका की इसमें कोई भूमिका नहीं है. कल शाम जो कुछ हुआ, ऐसा लगता है कि इसकी रूप रेखा मादुरो सरकार ने ही तैयार की है."

धमाके पर सवाल

मौके पर मौजूद रहे अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों के बयानों ने भी वेनेज़ुएला सरकार के दावों पर सवालिया निशान लगाए. तीन कर्मचारियों ने दावा किया कि 'धमाका एक अपार्टमेंट के गैस टैंक में हुआ'.

हालांकि, मई में छह साल के लिए दोबारा राष्ट्रपति चुने गए मादुरो के सहयोगियों के लिए ये वफ़ादारी दिखाने का मौका बन गया.

तख़्ता पलट का लंबा इतिहास रखने वाले वेनेज़ुएला में रक्षामंत्री व्लादिमिर लोपेज़ और दूसरे मंत्री बढ़ चढ़कर बयान देने लगे. होटलों पर छापे मारे गए. गाड़ियां जब्त हुईं और गिरफ़्तारियां भी हुईं.

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Image caption राष्ट्रपति मादुरो पर हुए कथित हमले के वक़्त उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस भी मौजूद थीं.

लेकिन एक तस्वीर इन सब से अलग थी. आशंकित राष्ट्रपति, उनकी डरी हुई पत्नी और सत्ता का सबसे बड़ा संबल माने जाने वाले नेशनल गार्ड के भागते जवानों के मीम बने और लोग सोशल मीडिया पर उन्हें शेयर करते हुए मज़ा लेने लगे.

विश्लेषकों ने कहा कि गंभीर आर्थिक संकट से जूझते देश की तस्वीरें सिर्फ सरकार के अस्थिर होने का संकेत नहीं देती बल्कि इससे विपक्ष और अतिवादियों की निराशा और दुस्साहस भी ज़ाहिर होता है.

वेनेज़ुएला का संकट

वेनेज़ुएला में भारत के राजदूत रह चुके निरंजन देसाई कहते हैं, "वेनेज़ुएला की आर्थिक स्थिति बहुत गंभीर है. ऐसा लगता है कि वहां कुछ होने वाला है. लेकिन कब होगा, ये बता नहीं सकते हैं."

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ज़बरदस्त आर्थिक मंदी से जूझते वेनेज़ुएला से हज़ारों लोग दूसरे देशों में जा चुके हैं.

वेनेज़ुएला की आर्थिक बदहाली का शोर पूरी दुनिया में है. देश के केंद्रीय बैंक ने साल 2015 से महंगाई दर के आंकड़े जारी नहीं किए हैं लेकिन जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री स्टीव हान्के के मुताबिक अप्रैल में महंगाई दर 18 हज़ार फ़ीसदी थी. साल 2008 के बाद से जीडीपी 41 फीसद से ज़्यादा गिर चुकी है. साल के आखिर तक स्थिति और ख़राब हो सकती है.

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Image caption वेनेज़ुएला गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. यहां महंगाई की दर दुनिया में सबसे ज़्यादा है.

सबसे ज़्यादा दिक्कत में वो तबका है, जो ग़रीबी रेखा के नीचे है. आर्थिक संकट से परेशान हज़ारों लोग ब्राज़ील और कोलंबिया जैसे देशों का रुख कर चुके हैं.

ये स्थिति उस देश की है जिसे प्रकृति का भरपूर आशीर्वाद मिला है. पश्चिम में बर्फीले पहाड़, दक्षिण दिशा से लगे अमेज़न के जंगल और उत्तर में समुद्री तट है. तेल और गैस के साथ सोने का भंडार भी हैं.

हाल में वेनेज़ुएला का दौरा करने वाले दिल्ली की जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर अब्दुल नाफ़े की राय में प्राकृतिक संपन्नता भी कुछ हद तक वेनेज़ुएला की मुश्किल की वजह है.

अर्थव्यवस्था का हाल

वो कहते हैं, "वेनेजुएला की रणनीतिक स्थिति बहुत अहम है. ये दक्षिण अमरीका का ऐसा देश है जो पूरे कैरेबियन को झांककर देखता है. वहां से सारे समुद्री रास्ते को कंट्रोल किया जा सकता है. जनसंख्या बहुत कम है. लोग कहते हैं यहां सऊदी अरब से ज़्यादा तेल है. अब तो सोना भी मिल गया है. प्राकृतिक गैस है. उसकी वजह से यूरोपीय यूनियन हो या फिर अमरीकी तेल की कंपनियां हों, उन्हें ये रास नहीं आता कि तेल सरकार के नियंत्रण में हो और उसका राष्ट्रीयकरण हो. इसीलिए सब खफा हैं."

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Image caption साल 2014 से तेल की कीमतें कम होने से वेनेज़ुएला आर्थिक संकट में घिर गया.

आर्थिक विश्लेषकों की राय है कि दुनिया में तेल की कीमतें गिरने से वेनेज़ुएला की आर्थिक स्थिति चरमरा गई. उसे नब्बे फ़ीसदी विदेशी मुद्रा तेल के निर्यात से ही मिलती है. मादुरो के पूर्ववर्ती राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ की गरीबी हटाने और समानता लाने से जुड़ी सामाजिक योजनाओं ने भी देश की स्थिति ख़राब की.

निरंजन देसाई बताते हैं कि चावेज़ के पहले देश के दो राजनीतिक दलों में ऐसा गठजोड़ था कि सत्ता में कोई रहे वो एक-दूसरे का ख्याल रखेंगे. चावेज़ ने इस गठजोड़ को तोड़ा. ये अब अर्थव्यवस्था को भारी पड़ रहा है.

वो कहते हैं, "चावेज की दिक्कत ये थी कि वो बहुत ज़्यादा साम्यवादी थे. यहां का अभिजात्य वर्ग यहां पैसे बनाता है लेकिन मियामी में रहता है. वो कहते हैं कि मियामी लातिन अमरीका की राजधानी है."

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Image caption पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज़ की साल 2013 में मौत हुई. उनके निधन के बाद मादुरो राष्ट्रपति बने. मादुरो इसके पहले उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री थे.

वेनेज़ुएला की राजनीति पर नज़र रखने वाले अब्दुल नाफ़े को भी लगता है कि यूरोपीय नस्ल वाले लोगों को चावेज़ और मादुरो जैसे लोगों का उभार रास नहीं आया है. हालांकि, उन्हें विपक्ष के इस तर्क में भी दम दिखता है कि बदहाली के लिए सरकारी नीतियां भी जिम्मेदार हैं.

"मादुरो चुनाव जीत गए. नई कांस्टीट्यूट असंबेली, नया संविधान भी बन गया. अब तो आपको कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. शुरू में ये ख़्याल था कि अमरीका के प्रतिबंध बहुत तकलीफ दे रहे हैं. तेल की कीमत बहुत गिर गई हैं. लेकिन इतनी बुरी हालत अगर हुई है तो उसके लिए सरकार को भी थोड़ी जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी."

बस ड्राइवर रहे हैं मादुरो

लेकिन राष्ट्रपति मादुरो अमरीका और उसके सहयोगी देशों की ओर से लगाए प्रतिबंधों को मुश्किल की वजह बताते हैं.

बस ड्राइवर रहे मादुरो आज भी ड्राइविंग सीट संभालना पसंद करते हैं. मई 2018 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के बायकॉट और अमरीका और लातिन अमरीकी देशों की चेतावनी के बाद भी उन्होंने अपना रुख नहीं बदला.

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Image caption वेनेज़ुएला में राष्ट्रपति मादुर के समर्थकों की भी बड़ी संख्या है.

मादुरो की जीत के बाद अमरीका ने नए प्रतिबंध लगाए. ब्राज़ील अर्जेंटीना और कनाडा जैसे 14 देशों ने अपने राजदूतों को वापस बुला लिया.

अब्दुल नाफ़े कहते हैं, " ब्राज़ील, अर्जेंटीना और मेक्सिको मादुरो को अलग-थलग करना चाहते हैं. उनको ये लगता है कि मादुरो दोबारा से लातिन अमरीका के नेतृत्व के दावेदार बनेंगे. चावेज ने दावेदारी की थी और कामयाब भी हुए थे. ऑर्गनाइजेशन ऑफ अमरीकन स्टेट में जो वोटिंग होती है, उसमें 12 से 14 वोट वेनेजुएला को मिलते रहे हैं. इसलिए वो चाहते हैं कि मादुरो कमजोर रहें तो अच्छा है."

मादुरो की अगुवाई में वेनेज़ुएला के पड़ोसी देश कोलंबिया से भी रिश्ते लगातार ख़राब होते गए हैं.

निरंजन देसाई इसकी वजह बताते हैं. "वेनेज़ुएला के संबंध कोलंबिया से अच्छे नहीं हैं. वास्तव में पहले ऐसा माना जाता था कि कोलंबिया में जो विद्रोही समूह था फार्क, उनको वेनेज़ुएला से समर्थन मिलता था. तब से इनके संबंध ख़राब हैं. मैं जब वहां था तब काफी गाड़ियां वेनेज़ुएला से चोरी होकर कोलंबिया में बेची जाती थीं."

अब मादुरो कोलंबिया पर वेनेज़ुएला के विरोधियों को समर्थन देने का आरोप लगाते हैं.

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Image caption निकोलस मादुरो बस ड्राइवर रहे हैं और अब भी ड्राइविंग सीट थामे रखना चाहते हैं.

तमाम मुश्किलों में घिरे होने के बाद भी मादुरो अपने राजनीतिक आदर्श चावेज़ के रास्ते पर ही आगे बढ़ना चाहते हैं. आलोचक उन्हें करिश्माई चावेज़ के आसपास भी नहीं देखते और उन्हें चावेज़ की भद्दी नकल बताते हैं. विपक्ष उन्हें दमनकारी तानाशाह के तौर पर देखता है जो सेना के दम पर सत्ता पर काबिज है. लेकिन समर्थकों की नज़र में वो असमानता को दूर करने वाले नायक हैं. मुश्किल वक्त में मादुरो मदद के लिए सेना के अलावा चीन जैसे मित्र देशों पर आस लगाए हैं.

अब्दुल नाफ़े के मुताबिक, "पूरे लातिन अमरीका में चीन ने जितना पैसा लगया है, उसका आधा वेनेज़ुएला में लगा हुआ है. चीन ने वेनेजुएला को कर्ज़ दे रखा है. वो कर्ज़ नहीं चुका पा रहे हैं लेकिन चीन उनसे नरम हाथों के साथ बर्ताव करता है. पैसे देने की मियाद बढ़ा दी जाती है. ब्याज दर कम कर दी जाती है. मादुरो की सरकार को चीन का समर्थन बहुत अहम है."

मादुरो को ये उम्मीद भी है कि तेल की कीमतें बढ़ने से वेनेज़ुएला की तकदीर बदलेगी. लेकिन शुक्रवार के कथित हमले के बाद एक आशंकित राष्ट्रपति की तस्वीर देखने वाले विरोधी और आलोचकों का सवाल है कि क्या बदलाव, मादुरो की उम्मीद के मुताबिक होगा?

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