अर्जेंटीना में अवैध रहेगा गर्भपात, पास नहीं हुआ कानून

  • 10 अगस्त 2018
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अर्जेंटीना की संसद ने गर्भपात को वैध बनाने वाले विधेयक को ख़ारिज कर दिया है. इस विधेयक में गर्भधारण के 14 हफ़्तों के अंदर गर्भपात की इजाज़त की बात कही गई थी.

संसद में लंबी बहस के बाद 38 सांसदों ने इसके ख़िलाफ़ और 31 ने इसके पक्ष में वोट किया.

इसके ख़ारिज़ होने के साथ इसके विरोधियों में खुशी की लहर छा गई और समर्थक निराश हो गए. कई समर्थकों ने गुस्से में पुलिस पर हमले किए और आग लगाने की कोशिश की.

इस बार विधेयक के ख़ारिज होने का मतलब है कि इसे दोबारा संसद में पेश करने के लिए अगले साल का इंतजार करना होगा.

'कमज़ोर का बचाव'

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अर्जेंटीना में गर्भपात को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है.

इसके समर्थकों का कहना है कि अब भी अर्जेंटीना में महिलाएं गर्भपात कराती हैं लेकिन ग़ैरकानूनी होने के चलते उन्हें ख़तरा उठाकर ऐसा करना पड़ता है. इसमें कई बार महिलाओं की जान भी चली जाती है.

इसके विरोधियों का तर्क है कि अजन्मे बच्चे की जान लेने का हक़ किसी को नहीं होना चाहिए और ये महिलाओं की समस्या का समाधान नहीं है.

मतदान के दौरान दोनों ही पक्षों के समर्थकों ने संसद के बाहर प्रदर्शन किया और रैलियां निकालीं.

विधेयक का विरोध कर रहे एक प्रदर्शनकारी ने कहा, ''ये खुशी की बात है कि हमारा समाज इस महत्वपूर्ण सिद्धांत पर भरोसा करता है कि अपने बचाव करने में सबसे ज़्यादा कमज़ोर का बचाव किया जाए.''

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सालों से चल रही लड़ाई

अर्जेंटीना में सिर्फ बलात्कार या मां की जान को ख़तरा होने की स्थिति में ही गर्भपात की अनुमति है.

गर्भपात को वैधता देने के समर्थक लंबे समय से इस संबंध में बिल को पास कराने की कोशिश कर रहे हैं.

उनके प्रयासों में तब नई जान आई जब राष्ट्रपति मारिसियो मक्री ने इस पर मतदान कराने का फैसला किया. हालांकि, राष्ट्रपति ख़ुद गर्भपात के ​विरोध में राय रखते हैं.

यह ​विधेयक निचले सदन में पास भी हो गया था. हालांकि, ऊपरी सदन में विधेयक लड़खड़ाता दिख रहा था क्योंकि वहां अधिकतर सांसद कंजर्वेटिव थे. सदन की महिला सांसदों का मत भी बंटा हुआ था.

मतदान के दौरान संसद भरी हुई थी और इस मसले पर 16 घंटे से ज़्यादा समय तक बहस चली.

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अवैध गर्भपात के नुकसान

विधेयक का समर्थन करने वालों का कहना है कि यह एक तत्काल ध्यान देने वाला स्वास्थ्य संबंधी मसला है.

अर्जेंटीना में अवैध गर्भपात के बाद हज़ारों महिलाओं को हर साल अस्पताल लाना पड़ता है. साल 2016 में इसके चलते 43 महिलाओं की मौत हो गई थी.

आर्थिक रूप से सक्षम महिलाएं दवाइयों के ज़रिए गर्भपात करती हैं जबकि गरीब महिलाएं इससे ज़्यादा ख़तरनाक तरीके अपनाती हैं.

उरुग्वे और क्यूबा ही लातिन अमरीका के दो ऐसे देश हैं जहां गर्भपात गैरकानूनी नहीं है. अन्य जगहों पर विशेष स्थितियों को छोड़कर गर्भपात कराना ग़ैरकानूनी है.

लातिन अमरीका के सबसे ज़्यादा जनसंख्या वाले देश ब्राज़ील में सुप्रीम कोर्ट में इसी मसले को लेकर सुनवाई चल रही है. कोर्ट इस पर विचार कर रहा है कि 12 हफ़्तों के गर्भ को गिराना कानूनी होना चाहिए या नहीं.

हालांकि, वैश्विक स्तर पर इसे कानूनी ही माना गया है लेकिन विवाद बना हुआ है.

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क्या कहते हैं दोनों पक्ष

विपक्षी पेरोनिस्ट पार्टी की नोरमा डुरांगो कहती हैं, "यह कानून बाध्य नहीं करता है, न ही यह किसी को गर्भपात करने की सलाह देता है. इस कानून की एकमात्र चीज़ चुनने का अधिकार है."

गर्भपात विरोधी गैर-सरकारी संस्था फ्रेंटे खोवन की कैमिला डूरो कहती हैं, ''हम सब को ये संदेश देना चाहते हैं कि गर्भपात सामाजिक असफलता के बराबर है. एक महिला को इसका सहारा लेने के लिए पहले कई दूसरी चीज़ों को असफल करने की जरूरत है.''

वहीं, इसकी समर्थक वकील और अभियानकर्ता सबरीना करताबिया कहती हैं, ''ये ग़ैरकानूनी हो या नहीं लेकिन महिलाएं गर्भपात कराती हैं.''

विधेयक के विरोध में राय रखने वालीं मारिया कैस्टीयो का मानना है, ''गर्भपात हमेशा एक बच्चे की जान लेता है और ये महिलाओं की समस्याओं का समाधान नहीं करता. हमें यकीन है कि ये कोई समाधान नहीं हो सकता.''

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