क्या कम्युनिज़्म से मुंह मोड़ रहा है कास्त्रो का क्यूबा?

  • 23 अगस्त 2018
फिदेल कास्त्रो

दुनिया की सबसे बड़ी पूंजीवादी अर्थव्यवस्था संयुक्त राज्य अमरीका की दक्षिण पूर्व सीमा से महज़ 366 किलोमीटर दूर स्थित है, साम्यवाद का छोटा लेकिन मज़बूत किला, क्यूबा.

एक करोड़ चौदह लाख की आबादी वाला ये द्वीपीय देश मशहूर है अपने मुक्केबाज़ों, महकती सिगारों, सफेद रम, सुंदर समुद्री किनारों और अपने संगीत के लिए.

क्यूबा की साम्यवादी क्रांति भी ख़ासी चर्चित है, जब उनसठ साल पहले दो भाइयों- फिदेल कास्त्रो और राउल कास्त्रो ने अर्जेंटीना के गुरिल्ला क्रांतिकारी चे ग्वेरा के साथ मिलकर फुलगेंसियो बतिस्ता की अमरीका समर्थित सत्ता को उखाड़ फेंका और कम्युनिस्ट व्यवस्था स्थापित की.

आधी सदी तक अमरीकी प्रतिबंधों के बावजूद क्यूबा अपनी कम्युनिस्ट व्यवस्था पर क़ायम रहा. ये आकलन भी एक अरसे तक ग़लत साबित हुआ कि अपने घनिष्ठ सहयोगी सोवियत संघ के विघटन के बाद क्यूबा धराशायी हो जाएगा. लेकिन क्या अब हालात बदलने लगे हैं?

निजी मालिकाना हक़ को राज्य की मान्यता

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Image caption फ़िदेल कास्त्रो

अपने देहांत से कुछ महीनों पहले अप्रैल 2016 में फिदेल कास्त्रो यही कह गए थे कि क्यूबा कम्युनिज़्म के लिए जाना जाएगा. उन्होंने कहा था, "बहुत जल्द मैं नब्बे साल का हो जाऊंगा. बहुत जल्द मैं बाक़ी सबकी तरह हो जाऊंगा. सबको अवसर मिलेगा लेकिन क्यूबा के कम्युनिज़्म का विचार हमेशा रहेगा."

लेकिन महज़ दो साल बाद फिदेल के इस दावे पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं. क्योंकि अब देश की संसद ने संविधान में बदलाव के ऐसे मसौदे को मंज़ूरी दी है, जिसके अमल में आने के बाद वहां संपत्ति पर निजी मालिकाना हक़ को राज्य की मान्यता मिल जाएगी. यानी सरकार मानेगी कि ये घर या व्यापार आपका है, आप इससे मुनाफ़ा कमा सकते हैं या जिसे चाहे बेच सकते हैं.

इसके मायने समझाते हुए जेएनयू में यूएस एंड लैटिन स्टडीज़ के प्रोफेसर अब्दुल नाफ़े बताते हैं, "इसमें एक प्रावधान ये है कि किसी दूसरे व्यक्ति के श्रम से होने वाली आय मेरा अधिकार बन गई है, मैं उस पर टैक्स दे सकता हूं. अगर मैं अपना रेस्तरां शुरू करूं और दस लोगों को उसमें काम पर रखूं और मुझे उससे मुनाफ़ा होगा. इससे छोटे उद्योगों को ज़रूर बढ़ावा मिलेगा."

'निजी क्षेत्र की अहमियत'

क्यूबा की राजधानी हवाना

नए प्रस्ताव में क्यूबा को कम्युनिस्ट समाज बनाने के लक्ष्य को समाजवादी संरचना से बदल दिया गया है. साथ ही इसमें बाज़ार की भूमिका का भी ज़िक्र किया गया है. बाज़ार और निजी मालिकाना हक़ जैसी शब्दावली को कास्त्रो बंधु असमानता की मुख्य वजह बताते रहे हैं.

लेकिन ये बदलाव अचानक नहीं हुआ है. 2011 में जब राउल कास्त्रो क्यूबा के राष्ट्रपति थे, तभी लोगों को व्यापार के कुछ सीमित अधिकार दिए गए थे.

क्यूबा की राजधानी हवाना में मौजूद बीबीसी संवाददाता विल ग्रांट बताते हैं कि एक तरह से उन्हीं बदलावों को काग़ज़ पर उतारा जा रहा है, जिनकी शुरुआत राउल कास्त्रो ने अपने भाई फ़िदेल कास्त्रो से सत्ता संभालने के बाद की थी. लेकिन उन बदलावों को क़ानूनी संरक्षण हासिल नहीं था. तो लोगों को व्यापार करने का अधिकार था, लेकिन निजी संपत्ति के तौर पर उन्हें पहचान नहीं मिली थी.

विल ग्रांट के मुताबिक, "क्यूबा में ख़ुद का रोज़गार चलाने वालों की संख्या क़रीब आठ लाख है. ये बहुत ज़्यादा नहीं है, लेकिन अहम है. क्यूबा की सरकार भी जानती है कि आने वाले वर्षों में निजी क्षेत्र की अहमियत बनी रहेगी और लोग उसकी ओर आकर्षित होते रहेंगे. बल्कि वो कुछ सरकारी नौकरियों को भी निजी क्षेत्र के पाले में धकेल सकती है क्योंकि वो अब उसे वहन नहीं कर सकती."

कास्त्रो बंधुओं के बाद का दौर

राउल कास्त्रो और मिगेल दियाज़ कनेल इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption राउल कास्त्रो (बाएं) के साथ क्यूबा के नए राष्ट्रपति मिगेल दियाज़ कनेल

1959 से 2011 तक क्यूबा की सत्ता पर फ़िदेल कास्त्रो क़ाबिज़ रहे और 2008 में कुर्सी अपने भाई राऊल को दे दी. 87 वर्षीय राउल ने चार महीने पहले ही राष्ट्रपति की कुर्सी छोड़ी है. उनकी जगह ली है 57 वर्षीय मिगेल डियाज़-कनेल ने. मिगेल क्यूबा के पहले ऐसे राष्ट्राध्यक्ष हैं जिनका जन्म क्यूबा की क्रांति के बाद हुआ है.

क्यूबा पर लगभग आठ दशकों से अमरीकी प्रतिबंध हैं. लेकिन सोवियत संघ से मिलने वाली आर्थिक मदद की बदौलत उसका काम चलता रहा. संकट तब बढ़ा, जब 1991 में सोवियत संघ का विघटन हो गया.

'मध्य वर्ग को सहूलियत'

केयो ग्रानमा जाने वाली नाव

सोवियत संघ के विघटन के बाद क्यूबा ने स्व-रोजगार को कुछ सीमाओं के साथ बढ़ावा देना शुरू किया. लेकिन इसके बावजूद आर्थिक स्थितियां क्यूबा में काले बाज़ार को पनपने से नहीं रोक सकीं.

लातिन अमरीका पर नज़र रखने वाले ब्राज़ील में रह रहे पत्रकार शोभन सक्सेना बताते हैं कि क्यूबा की आर्थिक स्थिति लगातार कमज़ोर होते चले जाने और ज़रूरी आर्थिक सुधार न होने की वजह से वहां काला बाज़ार पैदा हो गया.

शोभन सक्सेना के मुताबिक, "क्यूबा में बड़ा काला बाज़ार है, जिसमें लोग शराबों से लेकर संपत्ति तक बेचते हैं. क्यूबा एक समाजवादी व्यवस्था है, लेकिन काले बाज़ार के ज़रिये वहां एक तरह का पूंजीवाद भी साथ-साथ चलता रहा है. अब नए प्रस्ताव के अमल में आने के बाद उस काले बाज़ार वाली ख़रीद बिक्री को मान्यता मिल जाएगी. इससे मध्यवर्ग को बड़ी सहूलियत मिल जाएगी. लोग अपनी संपत्ति बेच पाएंगे, उसे किराए पर दे पाएंगे. उससे उन्हें जो पूंजी मिलेगी, उसे वे कहीं और निवेश कर पाएंगे."

'सोवियत संघ पर ज़्यादा थी निर्भरता'

फिदेल कास्त्रो
Image caption जनवरी 1959 में ली गई इस तस्वीर में क्यूबा की राजधानी हवाना में बातिस्ता पर विजय पाने के बाद फ़िदेल कास्त्रो भीड़ का अभिवदन कर रहे हैं.

क्यूबा अपनी आर्थिक नीति को बदलने की दिशा में बढ़ रहा है तो क्या उसने कभी क्यूबा क्रांति के प्रेरक विचार रहे कम्युनिज़्म से विमुख होने की शुरुआत कर दी है? अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफेसर पुष्पेश पंत मानते हैं कि इसकी अनौपचारिक शुरुआत तो बहुत पहले हो गई थी.

पुष्पेश पंत कहते हैं, "कम्युनिज़म से विमुख तो क्यूबा तभी हो गया था, जब राउल कास्त्रो राष्ट्रपति बने थे. विमुख वह तभी हो गया था जब सोवियत संघ ध्वस्त हुआ था. क्यूबा एक छोटा नन्हा सा देश है. वहां जो साम्यवादी क्रांति हुई थी वो विश्वव्यापी प्रभाव की नहीं थी. वह चे ग्वेरा और कास्त्रो के प्रभाव से रूमानी भले ही रही, लेकिन उसका अपना कोई अलग अस्तित्व नहीं थी. वह चीनी क्रांति की तरह माओवादी नहीं थी, वह रूसी क्रांति की तरह बोल्शेविक नहीं थी. उसका साम्यवाद का रूप फोकोवादी था, गुरिल्ला छापामारी था और क्यूबा के अतिरिक्त वह बोलिविया तक में सफल नहीं हो पाया, जहां चे ग्वेरा की मौत हो गई."

उनके मुताबिक, "जब तक उन्हें सोवियत साम्यवादियों से बड़े पैमाने पर आर्थिक मदद मिलती थी उनका साम्यवाद पनप रहा था. जब वह नहीं रहा तो वह खोखला होने लगा. क्यूबा का साम्यवाद स्वावलम्बी साम्यवाद नहीं था."

चीन का मॉडल अपनाएगा क्यूबा?

क्यूबा का समुद्र तट
Image caption क्यूबा के समुद्री किनारे पर्यटकों को ख़ूब आकर्षित करते हैं

अमरीका की यूनिवर्सिटी ऑफ डेलावेयर में प्रोफेसर मुक़्तदर ख़ान इस मसले को अमरीका के नज़रिए से इसे समझाते हैं. वो बताते हैं कि अमरीका में शुगर लॉबी और क्यूबा मूल के अमरीकियों की लॉबी ख़ास तौर से चाहती है कि क्यूबा के बाज़ार खुलें. छोटे से देश में पर्यटन उद्योग की अपार संभावनाएं देखी जाती हैं. लेकिन यह तभी होगा, जब अमरीका क्यूबा से आर्थिक पाबंदियां हटाएगा.

मुक़्तदर ख़ान बताते हैं, "छोटे व्यापार तो क्यूबा में पहले से ही चल रहे थे, मिसाल के तौर पर कार उद्योग. क्यूबा ने चमत्कारी तरीक़े से विंटेज कारों को मेंटेन किया है. छोटी-मोटी संपत्ति का मालिकाना हक़ पहले भी था. लेकिन अब ये प्रस्ताव उत्पादन के साधनों से जुड़ा है. यानी फैक्ट्री, मिल का मालिकाना हक. तो इसमें जो उत्पादन के साधनों पर मालिकाना हक़ अगर निजी हाथों के पास भी चला जाता है तो देश कम्युनिस्ट नहीं रहता और समाजवाद (सोशलिज़्म) की ओर चला जाता है."

'बहुदलीय लोकतंत्र के आसार अभी नहीं'

क्यूबा
Image caption क्यूबा विंटेज कारों के लिए जाना जाता है

मुक़्तदर के मुतबिक, "क्यूबा चीन का मॉडल अपनाना चाह रहा है, जहां अरबपति भी होते हैं. मेरे ख़्याल से क्यूबा एक हाइब्रिड मुल्क़ बनने जा रहा है, जहां राजनीति साम्यवादी रहेगी, यानी जहां एक ही पार्टी का शासन रहेगा लेकिन अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर मुक्त बाज़ार व्यवस्था होगी."

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
एक मुलाक़ात फ़िदेल कास्त्रो से

हालांकि जेएनयू में यूएस एंड लैटिन स्टडीज़ के प्रोफेसर अब्दुल नाफ़े मानते हैं कि क्यूबा में 2011 के बाद से लोगों को कुछ अधिकार तो मिले हैं, लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि क्यूबा ने एक लोकतांत्रिक मुक्त बाज़ार अर्थव्यवस्था की ओर क़दम बढ़ा दिए हैं.

अब्दुल नाफे बताते हैं कि संविधान में पहले भी तीन बार संशोधन हो चुके हैं. उनके मुताबिक, "इसका कारण यह है कि क्यूबा का 1976 के संविधान से क्यूबा के समाज और अर्थव्यवस्था का सोवियतीकरण हुआ था. तो 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद से बार-बार यह कहा जा रहा था कि इस संविधान में तब्दीली की ज़रूरत है."

"2011 के बाद से ही अभिव्यक्ति, निजी संपत्ति आदि के संबंध में कुछ अधिकार दिए गए, लेकिन इस सीमा के भीतर कि आप समाजवाद को चुनौती नहीं देंगे और क्यूबा की कम्युनिस्ट पार्टी के गाइडिंग रोल में कोई बदलाव नहीं आएगा. देश अभी समाजवाद के रास्ते पर कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में ही आगे बढ़ेगा. न बहुदलीय लोकतंत्र आएगा, न निजी निवेश को ज़्यादा बढ़ावा मिलेगा."

कॉफी की खेती
Image caption क्यूबा में कॉफी की खेती भी होती है

क्यूबा इक्कीसवीं सदी की लोकप्रिय आर्थिक नीतियों के साथ क़दमताल नहीं कर रहा, लेकिन उसके रुख़ में नरमी ज़रूर आई है. सामाजिक व्यवस्था के लिहाज़ से क्यूबा की कई उपलब्धियां भी हैं. वहां साक्षरता दर लगभग सौ फ़ीसदी है. शोभन सक्सेना बताते हैं कि स्वास्थ्य का जैसा मॉडल क्यूबा है, वैसा लातिन अमरीका में किसी देश का नहीं है.

क्यूबा रास्ता बदल रहा है या सिर्फ़ चाल बदल रहा है, ये जवाब भविष्य के गर्भ में है.

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