उत्तर कोरिया पर डोनल्ड ट्रंप के बयान को चीन ने बताया 'ग़ैर-ज़िम्मेदाराना'

  • 26 अगस्त 2018
REUTERS इमेज कॉपीरइट Reuters

चीन ने कहा है कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का ये कहना बेहद ग़ैर-ज़िम्मेदाराना है कि हम परमाणु कार्यक्रम को लेकर उत्तर कोरिया पर पर्याप्त दबाव नहीं डाल रहे.

डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ट्वीट किया था कि चीन अमरीका के साथ व्यापारिक तनाव बढ़ने के कारण उत्तर कोरिया के मामले में उनकी मदद नहीं कर रहा.

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसका जवाब देते हुए कहा, "ट्रंप का ये बयान बुनियादी तथ्यों के विपरीत है और चीन इस मसले पर वाक़ई चिंतित है."

गुरुवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की उत्तर कोरिया की प्रस्तावित यात्रा को रद्द कर दिया था.

ट्रंप का कहना है कि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम को ख़त्म करने में बेहद कम प्रगति की गई है.

हालांकि जून में उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन के साथ हुई शिखर वार्ता के बाद डोनल्ड ट्रंप ने कहा था कि अमरीका के लिए उत्तर कोरिया अब परमाणु ख़तरा नहीं रहा.

लेकिन तब से लेकर अब तक कई ऐसी रिपोर्टों सामने आई हैं जिनमें ये दावा किया गया है कि उत्तर कोरिया ने अभी भी अपने सभी परमाणु संयंत्रों को पूरी तरह से नष्ट नहीं किया है.

सबसे हालिया चेतावनी एक अज्ञात अमरीकी अधिकारी की तरह से आई जिसने अमरीकी अख़बार 'वॉशिंगटन पोस्ट' से बातचीत में ये दावा किया कि उत्तर कोरिया नई इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण का काम कर रहा है.

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी (आईएईए) ने भी ये कहा है कि उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम जारी है.

इस बीच दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के नेताओं के बीच तो कई मुलाक़ाते हुई ही हैं, लेकिन एक बड़े आयोजन के ज़रिए दोनों देशों के लोगों को भी मिलने का मौक़ा मिला है.

इमेज कॉपीरइट Yonhap

65 साल पहले दोनों देशों के बीच हुए युद्ध के बाद बिछड़े परिवारों को एक संयुक्त आयोजन में मिलने का मौक़ा मिला. इस आयोजन को 'इंटर कोरियन फ़ैमिली रीयूनियन' का नाम दिया गया है.

दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी के अनुसार, उस युद्ध के बाद पहली बार 81 परिवारों के क़रीब सवा 300 लोग को एक-दूसरे से मिलने का मौक़ा मिला.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
अमरीका-चीन की जंग का आग़ाज़?

अमरीका और चीन का व्यापारिक मुद्दा है क्या?

चीन उत्तर कोरिया का एकमात्र महत्वपूर्ण सहयोगी है.

साथ ही चीन इस क्षेत्र में अमरीका का सबसे शक्तिशाली रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी भी है.

फ़िलहाल अमरीका और चीन में आपसी व्यापार को लेकर विवाद चल रहा है.

अमरीका के राष्ट्रपति की शिक़ायत है कि कई अनुचित व्यापारिक प्रथाओं के कारण अमरीका को ख़ासा नुक़सान हुआ है.

इसलिए अमरीका ने चीनी सामान पर 25 फ़ीसदी सीमा-शुल्क का ऐलान किया था. इसके जवाब में चीन ने भी अमरीकी सामान पर उतना ही टैक्स बढ़ा दिया था.

दोनों देशों की तुलना करें, तो अमरीका चीन से क़रीब चार गुना ज़्यादा सामान का आयात करता है.

इमेज कॉपीरइट Reuters

क्या है ट्रंप का रुख?

माइक पोम्पियो को उत्तर कोरिया के लिए नियुक्त विशेष दूत स्टीफ़न बीगन के साथ अगले हफ़्ते उत्तर कोरिया जाना था.

ये विदेश मंत्री का चौथा दौरा होता, हालांकि इस दौरे में किम जोंग-उन से उनकी मुलाक़ात नहीं होनी थी.

मगर ट्रंप ने कहा कि अब पोम्पियो उत्तर कोरिया नहीं जाएंगे. इस मामले पर किए गए तीन ट्वीट्स में से दूसरे में ट्रंप ने चीन पर भी निशाना साधा था.

जबकि दो दिन पहले ही ट्रंप ने कहा था कि 'उत्तर कोरिया के मामले में चीन उनके लिए बहुत मददगार रहा है.'

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption अमरीका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो

उत्तर कोरिया कब जाएंगे पोम्पियो?

अमरीकी राष्ट्रपति ने ट्वीट किया है, "पोम्पियो निकट भविष्य में उत्तर कोरिया जाने की योजना बना सकते हैं. शायद उस समय, जब चीन के साथ हमारे कारोबारी रिश्ते सुलझ जाएंगे. इस दौरान मैं चेरयरमैन किम को शुभकामनाएं भेजना चाहता हूँ. मुझे उनसे जल्द मिलने में ख़ुशी होगी."

जिस समय इसी साल जून में ट्रंप सिंगापुर में किम जोंग-उन से मुलाक़ात करके आए थे, उन्होंने ट्वीट करके लिखा था, "उत्तर कोरिया से अब कोई परमाणु ख़तरा नहीं है. अब सभी सुरक्षित महसूस कर सकते हैं."

मगर सिंगापुर में हुई प्रगति के विपरीत ताज़ा हालात बदले हुए नज़र आ रहे हैं. सिंगापुर के सम्मेलन से लेकर अब तक ट्रंप और उत्तर कोरिया के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव आए हैं.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा
क्या अमरीका और चीन के बीच ट्रेड वॉर का आपकी जेब पर भी होगा असर.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे