इमरान को अमरीका से मिला बड़ा झटका, करोड़ों की मदद रद्द

  • 2 सितंबर 2018
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अमरीकी सेना ने कहा है कि उसने पाकिस्तान को दी जाने वाली 30 करोड़ डॉलर यानी तकरीबन 2100 करोड़ रुपये की मदद रद्द कर दी है. अमरीका सेना ने कहा है कि उसने ये फ़ैसला इसलिए किया है क्योंकि पाकिस्तान चरमपंथी समूहों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में विफल रहा है. रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट कर्नल कोनी फॉकनर ने कहा है कि अमरीकी रक्षा विभाग अब इस रकम का इस्तेमाल आवश्यक प्राथमिकताओं पर करेगा.

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि पाकिस्तान उन चरमपंथियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है जो पड़ोसी देश अफ़ग़ानिस्तान में पिछले 17 सालों से जंग छेड़े हुए हैं. हालाँकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

अमरीकी अधिकारियों का कहना है कि अगर पाकिस्तान अपना रवैया बदलता है तो उसे अमरीकी समर्थन फिर से हासिल हो सकता है.

इससे पहले भी अमरीका ने इस साल की शुरुआत में पाकिस्तान को 50 करोड़ डॉलर की आर्थिक मदद रद्द कर दी थी.

हालाँकि रक्षा मंत्रालय के इस फ़ैसले को अभी अमरीकी संसद की मंजूरी मिलना बाकी है

ट्रंप का झटका

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तब अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नए साल के पहले दिन किए एक ट्वीट में पाकिस्तान पर झूठ बोलने और चरमपंथियों को पनाह देने के आरोप लगाए थे. ट्रंप ने कहा था कि पाकिस्तान अमरीका से 'अरबों डॉलर की मदद लेने के बावजूद चरमपंथियों को पाल रहा है'.

ट्रंप ने कहा था, " अमरीका ने पिछले 15 सालों में पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद दी और उसने बदले में झूठ और छल के सिवाय कुछ नहीं दिया. वह सोचता है कि अमरीकी नेता मूर्ख हैं. हम अफ़ग़ानिस्तान में जिन आतंकवादियों को तलाश रहे हैं, उन्होंने उन्हें पनाह दी. अब और नहीं."

अमरीकी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कोनी फॉकनर ने कहा, "दक्षिण एशिया के लिए अमरीका की सैन्य रणनीति में सहयोग नहीं करने के कारण पाकिस्तान को बची हुई 30 करोड़ डॉलर की सहायता रद्द कर दी गई है."

अमरीका के इस कदम से पाकिस्तान के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की मुश्किलें बढ़ेंगी. इमरान ख़ान ने पिछले महीने ही पाकिस्तान की कमान संभाली है और आर्थिक मोर्चे पर उन्हें जूझना पड़ रहा है.

पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घट रहा है. मई 2017 में जहाँ पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 16.4 अरब डॉलर था, वहीं अब ये 10 अरब डॉलर के नीचे पहुँच गया है. विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के कारण चालू खाता घाटा का संकट और गहरा गया है.

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