खरबपति अमेज़ॉन की नज़र अब हिंदी बाज़ार पर

  • 5 सितंबर 2018
अमेज़न इमेज कॉपीरइट Getty Images

ऑनलाइन शॉपिंग की बड़ी कंपनी अमेज़ॉन ने अब अपनी वेबसाइट का हिंदी वर्ज़न बाज़ार में उतारा है.

अमेज़ॉन की हिंदी वेबसाइट का यह वर्जन मोबाइल और स्मार्टफ़ोन ऐप के लिए बनाया गया है.

इसके ज़रिए अमेज़ॉन भारतीय ग्राहकों के और ज़्यादा करीब पहुंचना चाहती है.

केपीएमजी-गूगल की एक स्टडी ने बताया है कि साल 2021 तक हिंदी भाषी इंटरनेट यूज़र की संख्या अंग्रेजी भाषी लोगों से ज़्यादा हो जाएगी.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

फ़्लिपकार्ट को चुनौती

अमेज़ॉन के इस कदम को फ़्लिपकार्ट के लिए एक चुनौती के तौर पर माना जा रहा है. फ़्लिपकार्ट भारत की सबसे बड़ी ऑनलाइन रिटेलर कंपनी है जिसका स्वामित्व वॉलमार्ट के पास है.

भारत में ई-कॉमर्स का बाज़ार लगभग 3300 करोड़ डॉलर का है.

अमेज़ॉन इंडिया में कैटेगरी मैनेजमेंट के उपाध्यक्ष मनीष तिवारी ने समाचार वेबसाइट रायटर्स से कहा है, ''अमेज़ॉन की हिंदी वेबसाइट बनाना एक बेहद अहम कदम है जिससे हम 10 करोड़ और ग्राहकों तक अपनी पहुंच बना पाएंगे.''

भारत में बहुत से ग्राहक छोटे शहरों और गांवों से ताल्लुक रखते हैं जिनके लिए अंग्रेज़ी एक मुश्किल माध्यम है.

माना जा रहा है कि अमेज़ॉन ने यह कदम तब उठाया जब उसे भारत में वॉलमार्ट की तरफ़ से लगातार चुनौती मिल रही थी.

हाल ही में वॉलमार्ट ने ई-कॉमर्स की दुनिया का सबसे बड़ा अधिग्रहण करते हुए 1600 करोड़ डॉलर में फ़्लिपकार्ट को खरीदा था.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption फ़्लिपकार्ट

स्नैपडील ने भी बनाई थी स्थानीय भाषाओं में वेबसाइट

मंगलवार को ही अमेज़ॉन अमरीका की दूसरी कंपनी बनी है जिसकी मार्केट वैल्यू 1 खरब डॉलर से ज़्यादा है.

अमेज़ॉन से पहले अगस्त महीने में एप्पल ने यह मुकाम हासिल किया था.

जहां तक स्थानीय भाषाओं में वेबसाइट होने की बात है तो स्नैपडील ने भी साल 2015 में इस ओर कदम बढ़ाए थे.

हालांकि कुछ मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक स्नैपडील ने अपने इस कदम को वापस खींच लिया क्योंकि उन्होंने दूसरी भाषाओं में उन्हें बहुत अच्छे नतीजे देखने को नहीं मिले थे.

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार अगर अमेज़ॉन की हिंदी वेबसाइट सफल होती है तो वह इसे अन्य भारतीय भाषाओं में भी लाएंगे जिसमें बंगाली और तमिल भाषाएं अहम हैं.

ये भी पढ़ेंः

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे