सीरिया में सैन्य कार्रवाई पर ट्रंप ने अभी नहीं किया फ़ैसला

डोनल्ड ट्रंप

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अमरीकी सेना के प्रमुख ने इस बात कि पुष्टि की है कि उन्होंने सीरिया के इदलिब को लेकर व्हाइट हाउस के साथ सभी संभावित स्थितियों पर बातचीत की है.

हालांकि अमरीकी सेना प्रमुख जनरल जोसेफ डनफोर्ड ने कहा कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रासायनिक हमले की स्थिति में सैन्य कार्रवाई करने को लेकर अभी फ़ैसला नहीं किया है.

दरअसल यह बातचीत इस संभावना पर की गई कि सीरियाई सरकार विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इदलिब प्रांत में रासायनिक हमले की तैयारी कर रही है.

सीरिया और रूस की सरकारों ने संकेत दिया है कि वो इदलिब पर योजनाबद्ध हमले के साथ आगे बढ़ेंगे.

उधर ईरानी और रूसी नेताओं से मिलने के बाद किए कई ट्वीट्स में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा कि दुनिया नरसंहारों पर आंखें नहीं मूंद सकती.

संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि इदलिब पर चढ़ाई से मानवीय संकट खड़ा हो सकता है. वहीं तुर्की को डर है कि लड़ाई से प्रभावित इदलिब के लोग तुर्की में घुस जाएंगे.

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हमले की तैयारी के सबूत

अमरीका को शक है कि सीरियाई सरकार विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इदलिब प्रांत में रसायनिक हमले की तैयारी कर रही है.

सीरिया में अमरीका के नए राजदूत जिम जेफ्री ने हमले की तैयारी के "कई सबूत" होने का दावा किया है.

इदलिब सीरिया में जिहादी गुटों का आखिरी गढ़ है, जिसे सीरिया की बशर अल-असद सरकार जल्द से जल्द अपने नियंत्रण में ले लेना चाहती है.

हालांकि सीरिया की सरकार रसायनिक हथियारों के इस्तेमाल से लगातार इनकार करती रही है.

मंगलवार को रूसी विमानों ने इदलिब के मुहमबल और जदराया में हवाई हमले किए थे जिसमें बच्चों समेत कई लोगों के मारे जाने की खबरें आई थीं.

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इदलिब में रसायनिक हमले की संभावना को देखते हुए जुगाड़ लगाकर मास्क बनाए जा रहे हैं.

राजनयिक पहल की अपील

अमरीका के रक्षा मंत्री ने सोमवार को चेतावनी दी कि अगर सीरिया की सरकार अपने सहयोगियों के साथ मिलकर रासायनिक हमला करती है तो अमरीका इसका जवाब देगा.

अप्रैल 2017 में भी इदलिब प्रांत में रासायनिक हमला किया गया था, जिसमें 80 से ज़्यादा लोग मारे गए थे. संयुक्त राष्ट्र और ओपीसीडब्ल्यू ने हमले के पीछे सरकारी सुरक्षाबलों का हाथ होने का भरोसा जताया था. हालांकि सीरिया की सरकार ने हमलों से इनकार किया था.

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संयुक्त राष्ट्र संघ

संयुक्त राष्ट्र के शांति दूत स्टाफ़न डा मिस्टूरा ने कहा है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन को इस बारे में बात करनी चाहिए.

संयुक्त राष्ट्र में विशेष सलाहकार और सीरिया में विशेष दूत यान एगलैंड ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, "इदलिब में सचमुच अब एक मानवतावादी और राजनीतिक रणनीति की ज़रूरत है और अगर ये सफल होती है तो लाखों लोगों की जानें बच जाएंगी. अगर ये नाक़ामयाब होती है तो अगले कुछ दिनों और कुछ घंटों में हम ऐसा युद्ध देखेंगे जो पिछले किसी भी युद्ध से कहीं ज़्यादा क्रूर होगा, हमारी पीढ़ी का क्रूरतम युद्ध होगा.''

उन्होंने कहा, "इसलिए हम आख़िर में आप सब से समझदारी की अपील करते हैं. इस समझदारी का मतलब ये होगा कि हम वो सब नहीं दोहराएंगे जो पूर्वी अल्लेपो, पूर्वी गूटा और रक्क़ा में हुआ. किसी शहर को बचाने का मतलब ये नहीं कि शहर में रहने वाले लोगों को ही कुचल दिया जाए."

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तुर्की में पहले से ही 30 लाख सीरियाई रिफ़्यूजी हैं.

इदलिब युद्ध का आखिरी पड़ाव

सीरियाई सरकार ने सहयोगी रूस के हवाई हमलों और ईरान समर्थित हज़ारों लड़ाकों की मदद से देश के बाकी हिस्से में विद्रोहियों को उखाड़ फेंका है. इसलिए इदलिब सीरिया युद्ध का आखिरी पड़ाव है.

माना जाता है कि इदलिब में 30 हज़ार से ज़्यादा विद्रोही और जिहादी लड़ाके मौजूद हैं.

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि इदलिब में 29 लाख लोग रहते हैं जिनमें से क़रीब 10 लाख बच्चे हैं. इस शहर के अधिकतर बाशिंदे विद्रोहियों के कब्ज़े वाले अन्य इलाकों से भागकर आए हैं.

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के मुताबिक इदलिब पर हमले से आठ लाख लोग विस्थापित हो सकते हैं. ऐसे में एक बड़ा मानवीय संकट खड़ा होने का खतरा है.

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