उत्तर कोरिया: किम जोंग उन की भव्य परेड के पीछे का सच क्या है

  • 9 सितंबर 2018
किम जोंग-उन, उत्तर कोरिया, उत्तर कोरिया स्थापना दिवस, North Korea, Kim Jong-un इमेज कॉपीरइट AFP

उत्तर कोरिया ने अपने 70वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान आयोजित सैन्य परेड के दौरान इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (आईसीबीएम) का प्रदर्शन नहीं किया है.

हालांकि अभी यह अस्पष्ट है कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने इस कार्यक्रम के दौरान कोई भाषण दिया था या नहीं.

उत्तर कोरिया के सैन्य हथियारों और परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को जानने के लिए परेड पर पूरी दुनिया की निगाहें लगी हुई थी.

कुछ विश्लेषकों ने उम्मीद जताई थी कि किम जोंग उन अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प के साथ शिखर वार्ता के बाद अपने हथियारों का प्रदर्शन करना कम कर देंगे.

यदि इस परेड में उस आईसीबीएम का प्रदर्शन किया जाता जिसमें अमरीकी धरती तक मार करने की क्षमता है तो उसे उकसाने वाला कदम माना जाता.

न्यूज एजेंसी एएफपी ने इस परेड की कोई तस्वीर जारी नहीं की है. हालांकि उनका एक फ़ोटो जर्नलिस्ट इस परेड को कवर कर रहा था.

एनके न्यूज़ जिसके पास सरकारी टीवी से मिली तस्वीरें थीं, उन्होंने परेड में आईसीबीएम के नहीं शामिल किए जाने की पुष्टि की है.

परेड के दौरान एएन-2 प्लेन हवा में 70वीं वर्षगांठ को मनाता हुआ दर्शाया गया.

रद्द हुई थी पोम्पियो की कोरियाई यात्रा

जून में अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की मौजूदगी में उत्तर कोरियाई शासक किम जोंग उन ने कोरियाई प्रायद्वीप को परमाणु मुक्त बनाने को लेकर एक अज्ञात समझौते पर दस्तखत किए थे, लेकिन इसे पूरा करने के लिए कोई समयसीमा, इसकी रूपरेखा और प्रक्रिया तय नहीं की गई थी.

तब से दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत चलती रही, लेकिन हाल ही में अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो की निर्धारित यात्रा आखिरी समय में रद्द कर दी गई और दोनों देशों ने एक दूसरे पर समझौता वार्ता में रुकावट डालने का आरोप लगाया.

हालांकि दोनों ने यह भी कहा कि वो विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं.

सियोल स्थित बीबीसी संवाददाता लौरा बिकर ने कहा कि यदि उत्तर कोरिया इस परेड में आईसीबीएम को प्रदर्शित करता तो इससे भविष्य में समझौता वार्ता की संभावना ख़त्म हो जाती.

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Image caption 2012 के खेलों के आयोजन में लोगों ने मिलकर इंसानी चेहरा बनाया

आगे खेल आयोजन पर निगाहें

उत्तर कोरिया में उनका सबसे बड़ा खेल आयोजन भी होना है जो पिछली बार 2013 में हुआ था.

बड़े स्तर पर होने वाला यह खेल आयोजन इस देश की अच्छी छवि के प्रचार के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है.

इस साल के आयोजन का नाम द ग्लोरियस कंट्री रखा गया है जिसमें उत्तर कोरिया के इतिहास से जुड़ी प्रतीकात्मक कहानियां बताई जाएंगी.

पिछले दो हफ़्तों से उपग्रहों से मिल रही तस्वीरों के मुताबिक इस वर्ष यह खेल बहुत बड़े स्तर पर आयोजित किया जा रहा है जो सितंबर के पूरे महीने में चलता रहेगा.

इससे पहले आयोजित खेल बहुत बड़े स्टेडियमों में लयबद्ध जिम्नास्टिक और तालमेल के साथ डांस के प्रदर्शन के साथ किए थे.

इन रंगारंग कार्यक्रमों के बहुत भव्य होने की उम्मीद है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने पहले कहा था कि इन खेलों में और इसकी तैयारी में बच्चों को भाग लेने के लिए बाध्य किया जाता है.

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मायावी समझौता

बताया जा रहा था कि इस परेड के लिए पिछले छह महीने से तैयारियां चल रही थीं. उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया ने इस परेड को "जीत का जश्न और देश की अर्थव्यवस्था के तेज़ी से होते विकास को दर्शाने वाला" क़रार दिया है.

कई विश्लेषकों का मानना है कि किम जोंग-उन ऐसी उपलब्धि चाहते हैं जो उनके पिता और दादा भी हासिल नहीं कर पाए- वो कोरिया के युद्ध की समाप्ति की घोषणा करना चाहते हैं.

ये युद्ध एक सैन्य समझौते के बाद 1953 में ख़त्म हो गया था. लेकिन कभी कोई शांति समझौता नहीं हुआ.

अमरीका के साथ बातचीत अटकने के बाद किम जोंग-उन ने इस हफ़्ते दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधिमंडल का अपने देश में स्वागत किया और कोरियाई प्रायद्वीप को "परमाणु-मुक्त कराने की अपनी प्रतिबद्धता" को दोहराया.

दक्षिण कोरिया के अधिकारियों के मुताबिक किम इस बात से परेशान हैं कि उनकी सकारात्मक कोशिशों पर दुनिया भरोसा नहीं कर रही है.

वो अमरीका के साथ रिश्ते बेहतर करने की इच्छा जता चुके हैं. वो जानते हैं कि ऐसा करने के लिए परमाणु निरस्त्रीकरण पहली शर्त है.

किम ट्रंप के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. ट्रंप भी ट्वीट कर जवाब दे चुके हैं कि "वो साथ मिलकर ये करने को तैयार हैं."

हालांकि इन कोशिशों की राह में अब भी एक बड़ा रोड़ा है. किम जोंग-उन उत्तर कोरिया के अबतक के सबसे खुले विचारों के नेता तो दिखना चाहते हैं, लेकिन वो दुनिया को अब भी उत्तर कोरिया का एक सीमित रूप ही दिखाना चाहते हैं. और विदेशी मीडिया को परेड के लिए आमंत्रित करना एक ऐसा ही क़दम है.

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Image caption परमाणु निरस्त्रीकरण को लेकर उत्तर कोरिया कितना गंभीर?

कैमरों से छिपता ये उत्तर कोरिया

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक उत्तर कोरिया की क़रीब 40 फ़ीसदी यानी एक करोड़ से ज़्यादा आबादी को मानवीय सहायता की ज़रूरत है.

देश के क़रीब 20 फ़ीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं.

कोरियाई प्रायद्वीप के लिए ये साल सबसे गर्म रहा. उत्तर कोरिया की सरकारी मीडिया के मुताबिक इस साल "अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा" आई है.

रेड क्रॉस सोसायटी ने भी चेतावनी दी है कि चावल, मक्का और दूसरी फ़सलें सूख चुकी हैं, जिससे "भीषण खाद्य सुरक्षा संकट" का ख़तरा पैदा हो गया है.

अगस्त में आंधी के साथ आई बाढ़ की चपेट में आने से कम से कम 76 लोगों की मौत हुई थी और क़रीब इतनी ही संख्या में लोग लापता हुए जबकि हज़ारों लोग बेघर हो गए थे.

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Image caption 2013 में हुआ सबसे बड़ा खेल आयोजन

भूखे परेड में शामिल होते थे लोग

सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी के सचिव नो ही-चांग राजनीतिक कारणों के चलते चार साल पहले उत्तर कोरिया से भाग गए थे.

उनका काम परेड के लिए देश के सबसे वफ़ादार परिवारों को चुनना होता था.

नो ही-चांग याद करते हैं कि भीषण गर्मी में मार्च कराई जाती थी और लोग लगभग भूखे पेट मार्च करते थे.

वो कहते हैं, "ओह वो भूख. भूखा रहना सबसे बड़ी बात थी. ख़ासकर किम जोंग-इल के ज़माने में तो खाना बहुत ही कम था. सभी एक लाख लोग सुबह से रात तक काम करते थे. उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी दो वक़्त की रोटी मिल पाना थी."

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फिर भी जब नो ही-चांग से पूछा गया कि एक मैनेजर के तौर पर क्या वो परेड में शामिल उन लोगों से माफ़ी मांगने चाहेंगे. तो उन्होंने बड़े ही सख़्त लहजे में ना कह दिया.

"उत्तर कोरिया में हमें सिखाया जाता था कि अगर दीवार हिलती है तो पहाड़ को भी हिलना ही होगा. इसका मतलब कि अगर किम इल-सुंग या किम जोंग-इल 'आह' कहते हैं तो हर नागरिक को 'आह' कहना है. वहां लोगों को सिर्फ़ "जी सर" कहना आता है. वहां सिस्टम इसी तरह काम करता है."

"हम सब पार्टी के बड़े-छोटे अधिकारियों के बच्चे थे. अगर हम में से कोई शिकायत कर देता तो उसे ग़ायब कर दिया जाता था. इसलिए वहां कोई शिकायत नहीं करता."

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"विदेशियों को ये परेड खूब पसंद आई होगी, लेकिन मैं उन्हें बताया चाहता हूं कि परेड में शामिल होने वाले वो लोग बिना कुछ खाए छह महीने तक मेहनत करते रहे हैं. उन्होंने छह महीने तक इतना पसीना क्यों बहाया - सिर्फ़ 10 मिनट की मार्च के लिए? ये दिल को तोड़ने वाला है. मैं चाहता हूं लोग ख़ासकर पत्रकार उत्तर कोरिया के उस रूप को देखें जो कहीं दबा-छिपा है."

लेकिन इतनी मुसीबतें झेलने के बाद भी लोगों के मन में देशभक्ति की भावना है.

नो कहते हैं कि अगर उन्हें मौका मिलेगा तो वो उत्तर कोरिया लौटना चाहेंगे.

"100% मैं वापस जाऊंगा. अपने शहर के बारे में सोचकर मुझे रोना आता है. बिल्कुल, मैं खुशी से वापस जाना चाहूंगा. मैं हमेशा से प्योंगयांग वापस जाना चाहता हूं. कौन अपने वतन वापस नहीं लौटना चाहेगा?"

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