उर्दू प्रेस रिव्यू: 'इमरान ख़ान को स्पीड ब्रेकर की ज़रूरत है'

  • 16 सितंबर 2018
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते नवाज़ शरीफ़ की पत्नी कुलसूम नवाज़ की मौत और प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद से एक अहमदिया मुसलमान का हटाया जाना सुर्ख़ियों में रहे.

बात करते हैं प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद से एक अहमदिया मुसलमान को हटाए जाने की.

जमीयत-उलेमा इस्लाम के केंद्रीय प्रवक्ता हाफ़िज़ हुसैन अहमद ने प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद से जाने माने अर्थशास्त्री डॉक्टर आतिफ़ मियां को निकाले जाने का स्वागत किया है.

उन्होंने अपनी संस्था की तरफ़ से बयान देते हुए कहा, ''इमरान ख़ान टॉस जीत चुके हैं. अम्पायर भी उनके साथ हैं. मगर ग़लत मशविरा देने वाला उनका काम तमाम करना चाहते हैं. केंद्रीय सूचना एंव प्रसारण मंत्री की रफ़्तार तेज़ है और उनकी तेज़ रफ़्तारी इमरान सरकार के लिए मुश्किलें पैदा करेगी. इसलिए उनको स्पीड ब्रेकर की ज़रूरत है.''

नया पाकिस्तान बनाने का वादा करके चुनाव जीतने वाले इमरान ख़ान ने नव-गठित आर्थिक सलाहकार परिषद में डॉक्टर आतिफ़ मियां को शामिल किया था. आतिफ़ मियां प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में पब्लिक पॉलिसी के प्रोफ़ेसर हैं. उनका संबंध अहमदिया संप्रदाय से है.

उनकी नियुक्ति की ख़बर आते ही पाकिस्तान के धार्मिक गुटों और कुछ राजनेताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया था. इमरान ख़ान दबाव में आ गए और आतिफ़ मियां को इस्तीफ़ा देने के लिए कह दिया. आतिफ़ मियां के इस्तीफ़े के बाद दो और लोगों ने इसके विरोध में इस्तीफ़ा दे दिया है.

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Image caption आतिफ़ मियां

अख़बार दुनिया में संपादकीय पेज पर ख़ालिद मसूद ख़ान ने एक कॉलम लिखा है जिसमें उन्होंने इमरान ख़ान पर हमला करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री को ऐसे फ़ैसले करने ही नहीं चाहिए जिससे बाद में शर्मिंदा होना पड़े.

ख़ालिद मसूद ख़ान ने लिखा है कि अहमदिया लोग अगर ख़ुद को ग़ैर-मुसलमान अल्पसंख्यक मान लें तो उन्हें पाकिस्तानी संविधान के अनुसार पूरे अधिकार मिलेंगे. लेकिन अहमदिया लोगों के साथ समस्या ये है कि वो ख़ुद को मुसलमान मानते हैं, लेकिन पाकिस्तान के क़ानून के अनुसार उन्हें मुसलमान नहीं माना जाता है.

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कुलसूम के जनाज़े में जुटी भीड़

अब बात पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की पत्नी कुलसूम नवाज़ की मौत की.

पिछले कई महीनों से बीमार और लंदन में इलाज करवा रही कुलसूम नवाज़ का 11 सितंबर को लंदन के एक अस्पताल में इंतक़ाल हो गया.

शुक्रवार को उनका पार्थिव शरीर लंदन से लाहौर लाया गया जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया. भ्रष्टाचार के एक मामले में सज़ा काट रहे नवाज़ शरीफ़, उनकी बेटी मरियम नवाज़, मरियम के पति कैप्टन (रिटायर्ड) सफ़दर को अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए परोल पर रिहा किया गया था.

अख़बार जंग के अनुसार अंतिम संस्कार में सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं समेत हज़ारों लोग कुलसूम नवाज़ के अंतिम संस्कार में शामिल हुए.

अख़बार नवा-ए-वक़्त ने सुर्ख़ी लगाई है, ''बेगम कुलसूम…. आहों सिसकियों के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक'' अख़बार के अनुसार वहां मौजूद हज़ारों लोगों की आंखें नम थीं.

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Image caption मोईन अली

मोईन अली का ओसामा विवाद

अख़बार जंग के मुताबिक़ पाकिस्तानी मूल के ब्रितानी क्रिकेटर मोईन अली ने कहा है कि एक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने उन्हें ओसामा ( ओसामा बिन लादेन) कहा था.

अख़बार के अनुसार मोईन अली ने कहा है कि 2015 में खेले जा रहे ऐशेज़ (ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेली जाने वाली टेस्ट सीरिज़ को ऐशेज़ कहते हैं) सीरिज़ के दौरान एक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने उन्हें ओसामा कहकर पुकारा था.

हालांकि मोईन अली ने ये नहीं बताया है कि उस खिलाड़ी का नाम क्या है.

मोईन अली ने अपनी आत्मकथा में इस बात का ज़िक्र किया है. उनके अनुसार 2015 ऐशेज़ में कार्डिफ़ टेस्ट के दौरान जब वो बैटिंग करने के लिए मैदान में उतरे तो एक ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी ने उन्हें ओसामा कह कर बुलाया था.

इस टेस्ट में मोईन अली ने शानदार प्रदर्शन किया था.उन्होंने पांच विकेट भी लिए थे और 77 रन भी बनाए थे. ऑस्ट्रेलिया ये मैच 169 रनों से हार गई थी. ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड ने मामले की जानकारी के आदेश दे दिए हैं. हालांकि आईसीसी का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

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