पाकिस्तान की वो महिला जिसे 'प्यास की वजह से' मिल सकती है मौत की सज़ा

  • 8 अक्तूबर 2018
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Image caption ईशनिंदा के आरोप में मौत की सज़ा पाने वाली आसिया बीबी की तस्वीर

पाकिस्तान की सड़कों पर चलते हुए अगर आप किसी से पूछेंगे कि असिया बीबी कौन हैं तो जवाब मिलेगा...असिया बीबी वो हैं जिन्होंने पैग़ंबर मोहम्मद का अपमान किया था और इसी के लिए उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई है.

लेकिन ये शायद मुकम्मल जवाब नहीं होगा क्योंकि आसिया बीबी यानी आसिया नूरीन पाकिस्तान की पहली ईसाई महिला हैं जिन्हें कथित रूप से पैग़ंबर मोहम्मद का अपमान करने के मामले में मौत की सज़ा मिली है. साल 2010 में दोषी ठहराए जाने के बाद से आसिया बीबी जेल की सलाखों के पीछे हैं.

इसके बाद से आसिया बीबी के वकील कई बार उनकी सज़ा को माफ़ कराने की कोशिशें कर चुके हैं. साल 2016 में भी सुप्रीम कोर्ट में सज़ा पर पुनर्विचार याचिका को लेकर सुनवाई की गई थी.

इसके बाद अब 8 अक्टूबर, 2018 को आसिया बीबी के वकीलों ने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में उनकी सज़ा पर पुनर्विचार को लेकर दलीलें दीं.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर सुनवाई के बाद अपने फ़ैसले को सुरक्षित रखा है.

आख़िर क्या है पूरा मामला?

ये पूरा मामला 14 जून, 2009 का है जब एक दिन आसिया नूरीन अपने घर के पास फालसे के बगीचे में दूसरी महिलाओं के साथ काम करने पहुंची तो वहां उनका झगड़ा साथ काम करने वाली महिलाओं के साथ हुआ.

आसिया ने अपनी किताब में इस घटना को सिलसिलेवार ढंग से बयां किया है.

अंग्रेजी वेबसाइट न्यूयॉर्क पोस्ट में छपे इस किताब के हिस्से में आसिया लिखती हैं, "मैं आसिया बीबी हूं जिसे प्यास लगने की वजह से मौत की सज़ा दी गई है. मैं जेल में हूं क्योंकि मैंने उसी कप से पानी पिया जिससे मुस्लिम महिलाएं पानी पीती थीं. क्योंकि एक ईसाई महिला के हाथ से दिया हुआ पानी पीना मेरे साथ काम करने वाली महिलाओं के मुताबिक़ ग़लत है."

14 जून की घटना के बारे में बताते हुए आसिया लिखती हैं, "मुझे आज भी 14 जून, 2009 की तारीख याद है. इस तारीख़ से जुड़ी हर चीज़ याद है. मैं उस दिन फालसा बटोरने के लिए गई थी. उस दिन आसमान से आग बरस रही थी. दोपहर होते-होते गरमी इतनी तेज़ हो गई कि भट्टी में काम करने जैसा लग रहा था. मैं पसीने से तरबतर हो रही थी. गर्मी इतनी ज़्यादा थी कि मेरे शरीर ने काम करना बंद कर दिया था."

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Image caption आसिया बीबी को जेल से छुड़ाने के समर्थन में कई देशों में प्रदर्शन हुए हैं

"मैं झाड़ियों से निकलकर पास ही में बने हुए एक कुएं के पास पहुंची और कुएं में बाल्टी डालकर पानी निकाल लिया. इसके बाद मैंने कुएं पर रखे हुए एक गिलास को बाल्टी में डालकर पानी पिया. लेकिन जब मैंने एक महिला को देखा जिसकी हालत मेरी जैसी थी तो मैंने उसे भी पानी निकालकर दिया. तभी एक महिला ने चिल्लाकर कहा कि ये पानी मत पियो क्योंकि 'ये हराम है' क्योंकि एक ईसाई महिला ने इसे अशुद्ध कर दिया है.

आसिया लिखती हैं, "मैंने इसके जवाब में कहा कि मुझे लगता है कि ईसा मसीह इस काम को पैग़ंबर मोहम्मद से अलग नज़र से देखेंगे. इसके बाद उन्होंने कहा कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई, पैग़ंबर मोहम्मद के बारे में कुछ बोलने की. मुझे ये भी कहा गया कि अगर तुम इस पाप से मुक्ति चाहती हो तो तुम्हें इस्लाम स्वीकार करना होगा."

"मुझे ये सुनकर बहुत बुरा लगा क्योंकि मुझे अपने धर्म पर विश्वास है. इसके बाद मैंने कहा - मैं धर्म परिवर्तन नहीं करूंगी क्योंकि मुझे ईसाई धर्म पर भरोसा है. ईसा मसीह ने मानवता के लिए सलीब पर अपनी जान दी. आपके पैग़ंबर मोहम्मद ने मानवता के लिए क्या किया है?"

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प्यास से ईशनिंदा तक आसिया

पाकिस्तानी न्यूज़ वेबसाइट डॉन के मुताबिक़, आसिया के वक़ील सैफ़ुल मुलूक ने तीन जजों की बेंच के सामने दलील रखी है कि ये मामला पीने के पानी को लेकर शुरू हुआ था.

इसके बाद पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ये कैसा मामला है जिसमें एक व्यक्ति के ख़िलाफ़ ग़लत शब्दों का प्रयोग किया गया और उसके बाद केस भी उसी व्यक्ति के ख़िलाफ़ हो जाए.

Image caption सलमान तासीर खुले विचारों के लिए जाने जाते थे.

कुएं के पास हुई बहस के कुछ हफ़्ते बाद ये घटना सामान्य बहस से ऊपर उठकर ईशनिंदा तक पहुंच गई और उन्हें सज़ा दी गई.

इसके एक महीने के बाद आसिया बीबी से मिलने पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल सलमान तासीर गए और उन्होंने पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून की निंदा की.

लेकिन इसके कुछ दिन बाद सलमान के अंगरक्षक मुमताज़ क़ादरी ने ही उनकी हत्या कर दी.

यही नहीं, दो महीने बाज जब अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री शाहबाज़ भट्टी ने ईशनिंदा कानून की निंदा की तो उन पर भी जानलेवा हमला किया गया जिसमें उनकी जान चली गई.

सलाखों के पीछे से जंग जारी

आसिया बीबी को मिली हुई सज़ा के मामले में उनके पति ने साल 2014 में लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की जिसे ख़ारिज कर दिया गया.

इसके बाद साल 2015 में पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने आसिया बीबी को अपील करने देने के लिए मौत की सज़ा को स्थगित कर दिया.

इसके बाद कई प्रयासों के बाद साल 2018 में आसिया बीबी के मामले में पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की है.

लेकिन अगर आसिया बीबी को इस बार भी कोर्ट की ओर से राहत नहीं मिली तो उन्हें पाकिस्तान के राष्ट्रपति के सामने दया याचिका लेकर जाना होगा.

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