ख़त्म होने को है सीरिया का युद्ध

  • 10 अक्तूबर 2018
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Image caption सीरिया के युद्ध में 12 मिलियन लोगों ने अपना घर खो दिया.

शायद इदलिब सीरिया के युद्ध का आखिरी पड़ाव है या शायद यहां से युद्ध एक नया रूप लेगा और सीरिया के लोगों के लिए नई मुसीबतें खड़ी होंगी.

इदलिब प्रांत में तीस लाख आम नागरिक और करीब 90 हज़ार विद्रोही लड़ाके रहते हैं. कहा जाता है कि इनमें से 20 हज़ार कट्टर जिहादी चरमपंथी हैं.

सीरिया का ये युद्ध आठ साल पहले शुरू हुआ था. यहां की सरकार कहती है कि ये सीरिया को ख़त्म करने की एक विदेशी साजिश है.

लेकिन युद्ध के शुरुआती दिनों में जब मैं विद्रोहियों के कब्ज़े वाले इलाकों में पहुंचा था तो वहां प्रदर्शनकारी आज़ादी के नारे लगा रहे थे. उन्होंने कहा कि वो यहां की सरकार से छुटकारा चाहते हैं, ना कि अपने देश की तबाही.

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Image caption विपक्षी समर्थकों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की

वो बात बहुत पुरानी हो गई है. अब ये युद्ध बहुत बदल गया है. इस संघर्ष के अब कई पहलू हैं.

विद्रोहियों ने नए गठबंधन बनाए, फिर उन्हें तोड़कर दूसरे नए गठबंधन बना लिए.

सरकार अलग-अलग तरह के विद्रोहियों में फर्क नहीं करती. राष्ट्रपति बशर-अल-असद उन सभी को चरमपंथी कहते हैं.

लेकिन ऐसे कई विद्रोही लड़ाके हैं जो चरमपंथी नहीं हैं, उन्हें पश्चिम के देशों से कोई मदद नहीं मिली है.

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Image caption इदलिब प्रांत को विद्रोहियों और जिहादी समूहों ने 2015 में अपने कब्ज़े में ले लिया था

ये युद्ध और विद्रोह असद सरकार और इस्लामिस्ट, कई बार जिहादियों और नागरिक सेना के बीच की जंग बन गई.

2016 में रूस ने इस युद्ध में हस्तक्षेप किया. रूस का साथ मिलने के बाद असद सरकार ने विद्रोहियों के ठिकानों का तेज़ी से सफाया कर दिया. ये सब बातचीत, धमकियों और सेना के भारी इस्तेमाल से हुआ.

2016 की शुरुआत में अलप्पों में मिली जीत सरकार के लिए बड़ी सफलता रही. इसके बाद असद सरकार की जीत का रथ तेज़ी से आगे बढ़ा.

अब सिर्फ इदलिब ही वो बड़ा इलाका है जिसपर विद्रोहियों का कब्ज़ा आज भी है.

हयात तहरिर अल-शाम इदलिब में मौजूद एक प्रमुख समूह है. इस समूह में ना सिर्फ़ सीरियाई बल्कि विदेशी जिहादी भी शामिल हैं.

ये अल-नुसरा फ्रंट का एक नया रूप है. अल-कायदा से जुड़े इस समूह को संयुक्त राष्ट्र और मध्य पूर्व और पश्चिम के कई देशों ने चरमपंथी संगठन का दर्जा दिया है.

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Image caption हयात तहरिर अल-शाम इदलिब का सबसे ताकतवर संगठन है.

हमने दोनों तरफ की फ्रंट लाइन देखी है. दोनों ओर वो लोग बंदूकें लिए खड़े हैं जो युद्ध शुरू होने के वक्त बच्चे थे.

इस युद्ध ने सीरिया की पीढ़ी का भविष्य बदलकर रखा दिया.

इस जंग में जान-माल का भारी नुकसान हुआ. कई लोगों की जानें गईं. करीब पांच लाख लोग मौत के मुंह में चले गए. ये आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है.

जीत के करीब पहुंच चुकी राष्ट्रपति असद की सरकार सत्ता में बनी रहेगी. लेकिन इस जीत की सीरिया को भारी कीमत चुकानी पड़ी है. जिसकी वजह से असद सरकार को भी भारी दबाव का सामना करना पड़ा.

मानवाधिकार समूहों का कहना है कि सीरियाई सरकार के सुरक्षाबलों ने युद्ध में लोगों को सबसे ज़्यादा मारा.

लेकिन सीरिया की सरकार ने इन आरोपों से इनकार किया है. उसका कहना है कि वो अपने ही लोगों को क्यों मारेंगे.

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Image caption इस हफ़्ते इदलिब के अंदर और बाहर की बंदूकें शांत थी

इदलिब के गांव के गांव बर्बाद हो गए और एक रेगिस्तान में बदलकर रह गए.

इन वीरान गांवों में जाने पर एक ही बात दिमाग में आती है कि यहां रहने वाले लोगों का क्या हुआ होगा.

वो सभी यहां से चले गए हैं. उनमें से कुछ लोग तो दूसरे देश भाग गए होंगे और कुछ मर गए होंगे.

अब यहां लड़ाई ख़त्म हो गई है और पीछे खाली और टूटे भूतिया शहर छोड़ गई है.

इस युद्ध में आधी आबादी यानी 1.2 करोड़ लोगों ने अपने घर खो दिए.

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Image caption सीरिया और रूस के हवाई हमलों ने इदलिब की इमारतों पर अपने निशान छोड़ दिए हैं

इस हफ़्ते इदलिब के अंदर और बाहर की बंदूकें शांत रहीं.

सीरिया अरब आर्मी अपने रूसी और ईरानी सहयोगियों के साथ इलाके पर चढ़ाई करने वाले थे.

इस संघर्ष में इदलिब में बहुत ख़ून-ख़राबा होता. लेकिन रूस और तुर्की के बीच प्रांत के आस-पास डिमिलिट्राज़ेशन ज़ोन बनाने की सहमति के बाद ये चढ़ाई टाल दी गई.

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Image caption संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक इदलिब में 10 लाख से भी अधिक बच्चे हैं

सभी विद्रोही गुटों को कहा गया है कि वो भारी हथियार ज़ोन से बाहर रहें. हयात तहरीर अल-शाम जैसे समूहों को भी 15 अक्तूबर तक अपने लड़ाकों को वहां से हटाने के लिए कहा गया है.

हालांकि अब तक सिर्फ़ एक विद्रोही गठबंधन ने ही इस बात पर हामी भरी है.

लेकिन कई ऐसी ख़बरें भी आई हैं, जिनमें कहा गया है कि एचटीएस जैसे समूहों ने भारी हथियार वहां से हटा लिए हैं.

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Image caption तुर्की और रूस के नेताओं ने पिछले महीने डिमिलिट्राज़ेशन ज़ोन बनाने पर सहमति जताई थी

इस योजना पर अमल करवाने के लिए तुर्की ने जिहादी समूहों को धमकाने और मनाने की भी कोशिश की.

लेकिन अगर ये समूह इस पर राज़ी नहीं होते तो साल के आखिर में जंग दोबारा शुरू हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो इस बार पहले से अधिक आम लोग मरेंगे, कहीं ज़्यादा लोग बेघर होंगे.

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पूरे सीरिया में जंग ख़त्म होने का माहौल है. लेकिन इदलिब के लोगों के मन में अब भी एक बड़ी जंग होने का डर बना हुआ है.

विदेशी ताक़तें अब भी देश के कई इलाकों में बम बरसा रही है. अगर वो एक दूसरे के आमने-सामने आ जाते हैं तो इस जंग के और गहराने के आसार हैं.

कुर्दों भी जल्दी हार नहीं मानने वाले हैं. ऐसे में ये जंग दोबारा शुरू हो सकती है.

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जंग के केंद्र में राष्ट्रपति असद और उनके सहयोगी हैं.

कई सालों तक असद के सत्ता से बाहर होने की अटकलें चलती रहीं. लेकिन उनके सहयोगी रूस और ईरान की मदद से वो बचते रहे हैं.

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