विदेशी मीडिया में छाया योगी का 'प्रयागराज' फ़ैसला

  • 17 अक्तूबर 2018
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इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने का फ़ैसला अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी सुर्खियां बटोर रहा है. मंगलवार को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की कैबिनेट ने यह फ़ैसला लिया था.

ब्रिटेन के प्रमुख अख़बार द गार्डियन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''कट्टर हिन्दू राष्ट्रवादी योगी के नेतृत्व वाले उत्तर प्रदेश के एक शहर का मुस्लिम नाम बदलकर हिन्दू मान्यता से जुड़ा नाम रख दिया है. आदित्यनाथ प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं और उन पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने का आरोप है.''

अख़बार ने लिखा है, ''राज्य सरकार ने शहर के पुराने नाम को फिर से बहाल कर दिया है. इस शहर का पुराना नाम प्रयाग ही था, जिसे मुग़ल काल में 16वीं सदी के आख़िर में इलाहाबाद कर दिया गया था.''

द गार्डियन ने लिखा है, ''प्रयाग संस्कृत का शब्द है, जिसका मतलब होता है त्याग स्थल. हिन्दुओं का मानना है कि ब्रह्मांड के रचयिता ब्रह्मा ने शहर में जहां गंगा और यमुना नदी मिलती है, वहां पहला अर्पण किया था.''

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द गार्डियन ने उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के उस बयान का ज़िक्र किया है, जिसमें उन्होंने कहा था, ''इस शहर का नाम शुरू से ही प्रयागराज था. जो इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं उन्हें सोचना चाहिए कि अगर माता-पिता का दिया उनका नाम बदल दिया जाए तो कैसा लगेगा?''

द गार्डियन ने लिखा है कि इस शहर का संबंध नेहरू-गांधी ख़ानदान से भी है जिसने भारत को तीन प्रधानमंत्री दिए. इसमें देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी शामिल हैं.

ब्रिटेन के ही अख़बार द इंडिपेंडेंट ने लिखा है, ''इस बदलाव का मक़सद पुराने नाम को बहाल करना है. मुस्लिम शासक अकबर ने 1583 में प्रयाग का नाम बदलकर इलाहाबाद कर दिया था.''

हालांकि प्रदेश की विपक्षी पार्टियां इस फ़ैसले का विरोध कर रही हैं. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जो भारत के इतिहास और परंपरा की समझ नहीं रखते हैं, वही इस फ़ैसले पर सवाल उठा रहे हैं.

द गार्डियन ने नाम बदलने के बहाने शहर की अहमियत का भी उल्लेख किया है.

गार्डियन की रिपोर्ट में लिखा गया है, ''इसी शहर में कुंभ मेले का आयोजन होता है. ऐसा माना जाता है कि यह सबसे विशाल धार्मिक अनुष्ठान है. 2013 में कुंभ मेले का आयोजन किया गया था और इसमें 10 करोड़ लोग शामिल हुए थे. नाम बदलने की मांग लंबे समय से दक्षिणपंथी हिन्दू समूह कर रहे थे. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर भी दीनदयाल उपाध्याय कर दिया था.''

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मध्य-पूर्व के प्रमुख मीडिया घराना अल-जज़ीरा ने लिखा है, ''स्थानीय मीडिया के मुताबिक़, भारत के एक प्रांत उत्तर प्रदेश की सरकार ने अपने एक ऐतिहासिक शहर का मुस्लिम नाम बदलकर हिंदुओं की मान्यताओं से जुड़ा नाम रख दिया है. अगर इलाहाबाद के इतिहास की बात करें तो ये भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू का गृह नगर हुआ करता था.''

अल-जज़ीरा ने लिखा है, ''इस शहर का नया नाम प्रयागराज गंगा और यमुना नदी के संगम की ओर इशारा करता है, जहां पर जनवरी 2019 में हिंदुओं का कुंभ मेला आयोजित होने जा रहा है. इससे पहले साल 2013 में कुंभ मेले में 10 करोड़ लोग शामिल हए थे.विपक्षी पार्टी कांग्रेस के प्रवक्ता ओंकार सिंह ने कहा है कि इस शहर का नाम बदलने से आज़ादी की लड़ाई में इस शहर के योगदान पर असर पड़ता है.''

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अल-जज़ीरा ने लिखा है, ''कई आलोचकों का ये भी कहना है कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी भारत के विविधिता से भरे इतिहास और पहचान को मिटाने की कोशिश कर रही है. उत्तर प्रदेश में एक महंत योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने कई जगहों के नामों को बदलने का प्रस्ताव दिया है. योगी आदित्यनाथ के ऊपर भारत के मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के ख़िलाफ़ हिंसा भड़काने का आरोप लग चुका है.''

अल-जज़ीरा ने यह भी लिखा है, ''बीते साल उन्होंने मुग़लसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर बीजेपी नेता दीन दयाल उपाध्याय के नाम पर रख दिया था. इसके साथ ही बरेली, कानपुर और आगरा के हवाई अड्डों के नामों को बदलने का प्रस्ताव दिया गया है. उत्तर प्रदेश की 22 करोड़ लोगों की आबादी में मुसलमानों का प्रतिशत लगभग 19 फीसदी है.''

पाकिस्तानी मीडिया में भी इलाहाबाद के नाम बदलने की चर्चा ख़ूब हो रही है. डेली पाकिस्तान ने योगी के इस फ़ैसले पर लिखा है, ''भारत आधिकारिक रूप से धर्मनिरपेक्ष देश है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी चुनावों में हिन्दू राष्ट्रवादी एजेंडों को पेश करती है. बीजेपी के कई नेताओं पर हिन्दुओं को लामबंद करने के लिए मुस्लिम विरोधी बयान देने के आरोप हैं.''

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