हाफ़िज़ सईद पर कार्रवाई करेगा पाकिस्तान

  • 27 अक्तूबर 2018
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हाफ़िज़ सईद के वकीलों ने बीते 26 अक्टूबर को पाकिस्तान की इस्लामाबाद हाईकोर्ट को बताया है कि उनका संगठन जमात-उद-दावा और फलाह-ए-इंसानियत अब पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठनों की सूची में शामिल नहीं हैं.

इसके ठीक एक दिन बाद पाकिस्तान सरकार से जुड़े एक सूत्र ने बीबीसी को बताया है कि पाक सरकार इस मामले में "कोई न कोई क़दम ज़रूर उठाएगी."

अमरीका और भारत पाकिस्तान के कट्टरपंथी धार्मिक नेता हाफ़िज़ सईद पर साल 2008 में हुए मुंबई हमले के मास्टरमाइंड होने का आरोप लगाती रही है.

पाक में कितने हाफ़िज़?

हाफ़िज़ सईद ने साल 1990 में चरमपंथी संगठन लश्कर-ए-तयैबा की स्थापना की थी. इस संगठन को प्रतिबंधित घोषित किए जाने के बाद उन्होंने साल 2002 में एक दूसरे संगठन जमात-उद-दावा की स्थापना की.

अमरीकी सरकार ने साल 2012 में हाफ़िज़ सईद को गिरफ़्तार करने के लिए उसकी ख़बर देने के बदले में 1 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की है.

लेकिन पाकिस्तान में अक्सर हिरासत में लिए जाने के बावजूद हाफ़िज़ सईद आज़ादी से अपनी ज़िंदगी जी रहे हैं.

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Image caption 19 अक्टूबर 2017 की तस्वीर, लाहौर में कोर्ट से रवाना हो रहे थे हाफ़िज़.

इस्लामाबाद हाईकोर्ट में सईद के वकीलों ने कोर्ट को बताया है कि पाकिस्तान में हाफ़िज़ सईद के संगठनों को प्रतिबंधित करने वाला अध्यादेश निरस्त होने के साथ ही इन संगठनों पर प्रतिबंध हट गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, पाकिस्तान के डिप्टी अटॉर्नी जनरल राजा ख़ालिद महमूद ख़ान ने भी इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पहुंचकर कोर्ट को बताया है कि सईद के वक़ीलों का दावा सही है.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने बीते फरवरी में 1997 के एंटी-टैरेरिज़्म एक्ट में संशोधन के लिए एक अध्यादेश पर हस्ताक्षर करके जेयूडी और एफआईएफ को प्रतिबंधित संगठनों की सूची में डाल दिया था.

लेकिन इसके बाद सईद के वकीलों ने इसके ख़िलाफ़ इस्लामाबाद हाईकोर्ट में अर्जी लगाई जिसे कोर्ट ने ख़ारिज़ कर दिया है क्योंकि इस ऑर्डिनेंस का नवीनीकरण करने के साथ-साथ इसे पाक संसद में पेश नहीं किया गया है.

पाकिस्तान के विधि विभाग के अधिकारियों ने इस पर किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार किया है.

हालांकि, अधिकारियों ने ये जरूर कहा है कि पाकिस्तान सरकार की ओर से इस मुद्दे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है लेकिन जब इस मुद्दे को लेकर जोर दिया गया तो एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा है कि इस मामले में कोई कदम जल्द ही उठाया जाएगा.

पाकिस्तान पर वैश्विक दबाव

कुछ हफ़्ते पहले फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की टीम ने पाकिस्तान की यात्रा की था ताकि ये पता लगाया जा सके कि मनी लॉन्ड्रिंग और चरमपंथियों की टैरर फंडिंग को रोकने के लिए क्या प्रयास किए गए हैं. इस टीम ने इसी साल जून महीने में पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में रखा है. इस्लामाबाद ने इस फ़ैसले पर नाराज़गी जताई थी.

मनी लॉन्ड्रिंग और टैरर फंडिंग को रोकने के लिए बनाई गई अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संस्था एफ़एटीएफ़ ने बीती जून में पेरिस में हुई बैठक में पाकिस्तान से टैरर फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग को रोकने के लिए कहा था.

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Image caption भारत के मुंबई में हाफिज़ सईद विरोधी प्रदर्शन, तस्वीर 4 जनवरी 2016 की

हालांकि, इस मीटिंग के दौरान पाकिस्तान काली सूची में दर्ज होने से बच गया. अगर ऐसा होता तो ये इस देश की कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए ज़्यादा दुष्कर होता.

पाकिस्तान सरकार ने इस बैठक के बाद काली सूची में दर्ज होने से बचने के लिए एक अध्यादेश पास करके जेयूडी और एफ़आईएफ़ को प्रतिबंधित संगठन करार दिया.

जेयूडी और एफ़आईएफ़ पाकिस्तान में कई स्कूल, अस्पताल, एंबुलेंस और मदरसे चलाता है. इसके बाद सरकारी एजेंसियों ने इन संगठनों के दफ़्तरों पर छापा मारकर उनकी संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया और दान लेने से प्रतिबंधित कर दिया.

पाकिस्तान को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की काली सूची में दर्ज होने से बचने के लिए इस संस्था के सुझाव मानने होंगे. लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो पाकिस्तान को एक बड़ी समस्या का सामना करना पड़ेगा.

ये संस्था पाकिस्तान में मनी लॉन्ड्रिंग और टैरर फंडिंग को रिव्यू कर रही है जो कि अगले कुछ हफ़्तों में जारी होगी.

बीते कई दशकों से पाकिस्तान की सेना और ख़ुफिया संस्थाओं पर पाकिस्तान की भारत-विरोधी नीति से सहमति रखने वाले चरमपंथी संगठनों और अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान का समर्थन करने वाली संस्थाओं का समर्थन करने का आरोप लगता रहा है.

अमरीका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर हमले के बाद से अमरीका और नाटो देश कई बार पाकिस्तान से इन संगठनों पर लगाम लगाने की चेतावनी दे चुके हैं लेकिन पाकिस्तान इन आरोपों को ख़ारिज़ करता रहा है.

पाक सरकार और सेना साफ तौर पर कहती आई है कि वह चरमपंथियों का शरण नहीं देती है.

इसके साथ ही पाकिस्तान कहता आया है कि अफ़ग़ानिस्तान में सक्रिय चरमपंथी संगठनों ने उसकी सेनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया है.

पाकिस्तान ये भी कहता है कि ये चरमपंथी संगठन सीमा पार करके आते हैं और पाक प्रतिष्ठानों को अपना निशाना बनाते हैं. इन चरमपंथी संगठनों में आईएस चरमपंथी, पाक तालिबान समेत कई दूसरे संगठन शामिल हैं.

फ़ाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स ने पाकिस्तान को तीन सालों के लिए अपनी वॉच लिस्ट में शामिल किया था. इसके साथ ही इस संस्था ने पाकिस्तान को बताया था कि वह अपनी स्थिति किस तरह सुधार सकता है.

सईद के संगठन की अपील

जमात-उद-दावा के प्रवक्ता अहमद नदीम ने बीबीसी के साथ बातचीत में कहा है कि प्रतिबंध हटने के बाद भी सरकार हमारी संस्थाओं को काम करने की इजाज़त नहीं दे रही है.

नदीम बताते हैं, "उन्होंने हमें अब तक हमारी एंबुलेंसें वापस नहीं लौटाई हैं. और हमारी संस्थाओं अभी भी काम नहीं कर सकती हैं. लेकिन हम इसके लिए एक रणनीति बना रहे हैं. हमारी संपत्तियों को जल्द ही वापस नहीं किया गया तो हम इसके लिए कोर्ट जाएंगे."

जमात उद दावा ने शुक्रवार को इस्लामाबाद में भारत प्रशासित कश्मीर में "प्रशासनिक आतंकवाद" के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया.

ऐसी ख़बरें आ रही हैं कि पाकिस्तान ने फाइनेंशियल एक्श्ंस टास्क फोर्स के सुझावों को अमल में लाने के लिए एक तरीका निकाल लिया है.

लेकिन मीडिया में लगातार ख़बरें आ रही हैं कि इसके अमलीकरण के लिए ज़िम्मेदार विभागों में इस मुद्दे को लेकर बेफिक्री वाला बरताव देखा जा रहा है.

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