भारतीय चैनलों पर रोक से दूर होगा पाकिस्तान का जल संकट?

  • 28 अक्तूबर 2018
पाकिस्तान के चीफ़ जस्टिस मियाँ साक़िब निसार इमेज कॉपीरइट SUPREME COURT OF PAKISTAN

पाकिस्तान में गहराते जल संकट के बीच देश के सुप्रीम कोर्ट का एक फ़ैसला चर्चा में है. पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय चैनलों के पुनर्प्रसारण पर रोक लगा दी है.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस मियाँ साक़िब निसार ने कहा है कि भारत की ओर से पाकिस्तान में आने वाली नदियों का पानी रोका जा रहा है. इसलिए ये 'पाबंदी न्यायसंगत' है.

पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि भारत पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल करता है. पाकिस्तान का दावा है कि भारत पाकिस्तान की ओर बहने वाली नदियों पर बांध बनाकर दबाव बनाता है.

पाकिस्तान ने इसी हफ़्ते आरोप लगाया था कि भारत दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर हुए समझौते का उल्लंघन कर रहा है और पाकिस्तान 'इसके ख़िलाफ आक्रामक अभियान चलाएगा'.

भारत पाकिस्तान की ओर से लगाए जाने वाले ऐसे आरोपों से लगातार इनकार करता है.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाया गया प्रतिबंध उन स्थानीय चैनलों पर भी लागू होगा जो भारतीय कार्यक्रम दिखाते हैं.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक निचली अदालत के फ़ैसले को किनारे कर दिया है. निचली अदालत ने भारतीय चैनलों पर पूर्व में लगाए गए प्रतिबंध को हटाने का आदेश दिया था.

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पाकिस्तान का जल संकट

पाकिस्तान में साल 1990 से पानी का गंभीर संकट है. साल 2005 से ये संकट और गहरा गया है.

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) और पाकिस्तान काउंसिल ऑफ़ रिसर्च इन वाटर रिसोर्सेज (पीसीआरडब्ल्यूआर) ने आगाह किया है कि पाकिस्तान 2025 से पूरी तरह सूखे की चपेट में आ जाएगा.

फ़िलहाल पाकिस्तान अस्सी फ़ीसदी से ज़्यादा खेती के लिए सिंधु और इसकी सहायक नदियों के पानी पर निर्भर है. इनमें से ज़्यादातर नदियां हिमालय से निकलती हैं.

रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान चीफ़ जस्टिस साक़िब निसार देश के जल संकट को दूर करने में ख़ुद दिलचस्पी ले रहे हैं.

उन्होंने पाकिस्तान में दो बांधों के निर्माण के लिए फंड जुटाने की पहल की है. ये दो बांध दिअमेर-भाशा और मोहमंड हैं. दिअमेर-भाशा बांध का निर्माण ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा और गिलगित-बल्टिस्तान में और मोहमंड बांध का निर्माण मांडा इलाक़े की स्वात नदी पर होना है.

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समझौते के उल्लंघन का आरोप

भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजन के बाद से साल 1960 तक पानी के इस्तेमाल को लेकर तनाव बना रहा.

बाद में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच 'सिंधु-तास समझौता' हुआ.

पाकिस्तान हालिया दिनों में भारत पर इस समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाता रहा है. हालांकि, भारत ने लगातार ऐसे आरोपों को ग़लत बताया है.

पाकिस्तान के अख़बार डॉन ने इसी हफ़्ते एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी. इसके मुताबिक पाकिस्तान ने भारत पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि वो इसके ख़िलाफ़ एक आक्रामक अभियान चलाएगा.

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अख़बार ने पाकिस्तान के सिंधु जल आयोग के कमिश्नर सैयद मेहर अली शाह के हवाले से लिखा, "भारत के समकक्ष अधिकारी से हुई मेरी बातचीत के आधार पर हमें निकट भविष्य में चिनाब नदी के निरीक्षण की कोई संभावना नहीं दिखती है."

अख़बार के मुताबिक सैयद शाह जब ये जानकारी दे रहे थे तब उनके साथ जल संसाधन मंत्री फ़ैसल वावदा भी मौजूद थे.

अख़बार ने शाह के हवाले से दावा किया कि भारत के जल आयुक्त ने 29-30 अगस्त को हुई सालाना बैठक के ख़त्म होते वक्त वादा किया था कि वो सितंबर के आखिरी हफ़्ते में चिनाब नदी पर जारी दो परियोजनाओं के दौरे की व्यवस्था कराएंगे लेकिन इसे भारत प्रशासित कश्मीर के स्थानीय चुनाव की वजह से 7 से 12 अक्टूबर तक के लिए टाल दिया गया.

अख़बार के मुताबिक उन्होंने ये भी कहा कि भारत ने बदले हुए कार्यक्रम पर भी अमल नहीं किया.

अख़बार के मुताबिक सैयद शाह ने ये भी बताया कि उन्होंने भारत में अपने समक्षक अधिकारी से बातचीत की और उसी आधार पर वो कह सकते हैं कि हाल में ऐसा कोई दौरा होने की संभावना नहीं है.

जल संसाधन मंत्री वावदा ने कहा कि वो धमकी नहीं देना चाहते लेकिन भारत की ओर से संधि के उल्लंघन को लेकर वो घरेलू ज़मीन और विदेश में आक्रामक अभियान चलाएंगे.

पाकिस्तान पहले भी भारत में चेनाब नदी पर बन रही दो परियोजनाओं में से एक पर आपत्ति जताता रहा है.

भारत चेनाब पर पनबिजली परियोजना के लिए दो बांध बना रहा है- 48 मेगावाट क्षमता की लोअर कालनाई और 1,500 मेगावाट क्षमता का पाकल दुल.

पाकिस्तान पाकल दुल बांध को लेकर चिंतित जताता रहा है. वो इसे सिंधु जल समझौते का उल्लंघन बताता है.

पाकिस्तान के अनुसार पाकल दुल बांध की ऊंचाई 1,708 मीटर हो सकती है, जिससे पाकिस्तान में आने वाले पानी की मात्रा कम हो सकती है. पाकिस्तान का कहना है कि इससे भारत अपनी इच्छासनुसार पानी रोकने या छोड़ने में सक्षम हो जाएगा.

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क्या है समझौता

सिंधु-तास समझौते के तहत ये फॉर्मूला तैयार हुआ कि दोनों देश में 'सिंधु बेसिन' की छह नदियों और उनकी सहायक नदियों का पानी कौन और कैसे इस्तेमाल करेगा.

छह में से तीन नदियां भारत के हिस्से में आईं और तीन पाकिस्तान के. इन्हें पूर्वी और पश्चिमी नदियां कहा जाता है.

सिंधु, झेलम और चिनाब पूर्वी नदियां हैं जिनके पानी पर पाकिस्तान का हक़ है जबकि रावी, ब्यास और सतलज पश्चिमी नदियां हैं जिनके पानी पर भारत का हक़ है.

सिंध-तास समझौते के तहत भारत पूर्वी नदियों का पानी भी इस्तेमाल कर सकता है, लेकिन सख़्त शर्तों के साथ.

अगर इस समझौते पर मतभेद होते हैं तो दोनों देश वर्ल्ड बैंक का रुख करते हैं. अतीत में दोनों देश युद्ध और तनाव के दौरान भी इस समझौते का पालन करते रहे हैं.

चैनलों पर पाबंदी से क्या हासिल?

भारतीय फ़िल्में और टीवी धारावाहिक पाकिस्तान में ख़ासे लोकप्रिय हैं.

साल 2016 में दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ने पर पाकिस्तान ने सितंबर 2016 में भारतीय फ़िल्मों के प्रदर्शन पर रोक लगा दी थी. रिपोर्टों के मुताबिक उस दौरान पाकिस्तान के सिनेमाघरों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था.

उसके बाद दिसंबर 2016 में ही फ़िल्मों पर लगाई गई पाबंदी हटा ली गई थी.

साल 2016 भारत प्रशासित कश्मीर के उड़ी में हुए चरमपंथी हमले के बाद भारत में पाकिस्तान के फ़िल्म कलाकारों के काम करने पर सवाल उठे थे.

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