ख़शोज्जी की मंगेतर ट्रंप से क्यों नहीं मिलना चाहतीं

  • 29 अक्तूबर 2018
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Image caption मारे गए पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की मंगेतर हतीजे जेंग्गिज़

तुर्की में सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में मारे गए पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की मंगेतर हतीजे जेंग्गिज़ का कहना है कि वो अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से नहीं मिलना चाहतीं क्योंकि उन्हें लगता है कि वो ख़ाशोज्जी की हत्या की जाँच को लेकर गंभीर नहीं हैं.

तुर्किश टीवी से बातचीत में जेंग्गिज़ ने कहा कि उन्हें व्हाइट हाउस बुलाकर दरअसल ट्रंप अमरीकी जनता को ये दिखाना चाहते हैं कि वो सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या को लेकर गंभीर हैं.

सऊदी अरब के शाही परिवार के आलोचक रहे ख़ाशोज्जी दो अक्टूबर को इस्तांबुल स्थित सऊदी के वाणिज्य दूतावास में गए थे. इसके बाद से उन्हें नहीं देखा गया था.

तुर्की के अधिकारियों का मानना है कि दूतावास की इमारत के भीतर सऊदी एजेंटों ने उनकी हत्या की है. तुर्की ने दावा किया है कि उनके पास इस बात को साबित करने के लिए ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है.

सऊदी अरब लंबे समय तक ख़ाशोज्जी को लेकर किए इन दावों से ना-नुकर करता रहा, लेकिन बाद में माना कि पत्रकार ख़ोशोज्जी की मौत हो गई है.

सऊदी अरब का कहना है कि ख़ाशोज्जी 'हाथापाई' के दौरान मारे गए और शाही परिवार को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी.

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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा था कि वो सऊदी अरब के पक्ष से संतुष्ट नहीं हैं, हालाँकि उन्होंने सऊदी अरब पर किसी तरह की पाबंदियां लगाने से साफ़ इनकार कर दिया था. ट्रंप ने बाद में ये भी कहा कि ये भी संभव है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को शायद इस बारे में पता नहीं था.

बहरीन में सुरक्षा सम्मेलन में अमरीकी रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा कि दूतावास में ख़ाशोज्जी की मौत ' सभी के लिए चिंता का विषय है.

शुक्रवार को तुर्की ने भी कहा कि ख़ाशोज्जी की हत्या के मामले में रियाद में गिरफ्तार किए गए 18 लोगों का वो प्रत्यर्पण चाहता है. हालाँकि तुर्की और सऊदी अरब के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है.

ख़ाशोज्जी की मंगेतर ने क्या कहा?

शुक्रवार को जेंगिग्ज़ टेलीविज़न पर इंटरव्यू के लिए आईं. इस दौरान कई मर्तबा उनकी आँखों में आंसू भी छलके. ख़ाशोज्जी जिस दिन लापता हुए हुए, उस दिन को याद करते हुए जिंग्गिज़ ने कहा कि अगर उन्हें ज़रा भी अंदेशा होता कि सऊदी अरब के अधिकारी उनकी (ख़ाशोज्जी) हत्या की साज़िश रच रहे हैं तो वो ख़ाशोज्जी को किसी भी सूरत में इंस्ताबुल स्थित वाणिज्य दूतावास में नहीं जाने देतीं.

उन्होंने कहा, "मैं मांग करती हूँ कि इस बहशीपन में जो भी शामिल हों, (ऊपर से लेकर नीचे तक) सभी को दंडित किया जाना चाहिए और न्याय मिलना चाहिए."

जेंग्गिज़ ने कहा, "जैसा कि आप जानते हैं कि तुर्की में ख़ाशोज्जी का स्थानीय नेटवर्क राजनीतिक नेटवर्क की ही तरह काफ़ी मज़बूत था. उन्होंने सोचा था कि तुर्की उनके लिए सुरक्षित देश होगा और अगर उन्हें पकड़ा गया या पूछताछ की गई तो मामले को बहुत जल्द सुलझा लिया जाएगा."

ख़ाशोज्जी जिस दिन लापता हुए जेंग्गिज़ एक बजे तक दूतावास के बाहर उनका इंतज़ार करती रहीं. इस घटना से एक हफ्ते पहले जब वो वाणिज्य दूतावास में गईं थी तो जेंग्गिज़ के साथ अच्छा बर्ताव किया गया था.

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जेंग्गिज़ ने कहा कि सऊदी अरब के अधिकारियों ने उनसे किसी तरह का संपर्क नहीं किया है, लेकिन ख़ाशोज्जी के अंतिम संस्कार के लिए वो शायद ही सऊदी अरब जाएं.

जेंगिग्ज़ तुर्की में अध्ययन-अध्यापन से जुड़ी हैं और चार महीने पहले ख़ाशोज्जी से उनकी सगाई हुई थी. उन्होंने कहा, "मैं ख़ुद को अंधेरे में पा रही हूँ. समझ नहीं आ रहा कि क्या कहूँ."

अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो भी हाल ही में जेंग्गिज़ से मिले थे. जेंग्गिज़ ने जब पोम्पियो से पूछा कि 'क्या उनके पास ऐसी ख़बर है जो मुझे ख़ुश कर सके' तो पोम्पियो ने कहा कि नहीं.

ख़ाशोज्जी के सबसे बड़े बेटे सलाह ख़ाशोज्जी गुरुवार को परिवार समेत सऊदी अरब से अमरीका पहुँचे. सलाह ख़ाशोज्जी को अमरीका और सऊदी की दोहरी नागरिकता हासिल है और उनके पिता के शाही परिवार का आलोचक होने के कारण उनके सऊदी अरब से बाहर जाने पर प्रतिबंध था, लेकिन कुछ ही दिन पहले ये पाबंदी हटा दी गई.

इस बीच, इंस्ताबुल पुलिस का कहना है कि जेंग्गिज़ को 24 घंटे पुलिस सुरक्षा दी जा रही है, हालाँकि अधिकारियों ने इसकी वजह नहीं बताई.

तुर्की की चाल?

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तुर्की शुरू से ही इस मामले में सऊदी अरब पर निशाना साधे हुए है, लेकिन राष्ट्रपति रचेप तैय्यप अर्दोआन ने कभी भी सीधे तौर पर क्राउन प्रिंस या किंग सलमान का नाम नहीं लिया.

अर्दोआन की भाषाशैली ये जताने की कोशिश है कि ये सऊदी बनाम तुर्की की लड़ाई नहीं है. दोनों देशों का रिश्ता काफ़ी महत्वपूर्ण है, लेकिन ये साफ़ है कि ख़ाशोज्जी मामले में तुर्की के हस्तक्षेप से दोनों के रिश्तों में तनाव पैदा हुए हैं.

ऐसे में अर्दोआन, किंग सलमान को सीधे तौर पर बिना निशाना बनाए जांच की बात कर रहे हैं.

राष्ट्रपति के एक नज़दीकी सूत्र का मानना है कि ''अगर अर्दोआन क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को पद से हटाए जाने की बात करते तो ये होना तो और भी मुश्किल होता.''

शायद यही वजह थी कि अर्दोआन ने अपने संबोधन में एक बार भी प्रिंस सलमान का ज़िक्र तक नहीं किया. ये एक सोचा-समझा क़दम था.

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