तेज़ाब में डाले गए थे ख़ाशोज्जी के शव के टुकड़े: तुर्की के अधिकारी

जमाल ख़ाशोज्जी

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तुर्की के वरिष्ठ अधिकारी यासिन आकताय का कहना है कि उन्हें लगता है कि जमाल ख़ाशोज्जी के शव को काटकर तेज़ाब में डाल दिया गया था.

आकताय का कहना है कि ये ही एकमात्र तर्कपूर्ण निष्कर्ष है कि जिन्होंने खाशोज्जी की हत्या की, उन्होंने उनके शव को इस तरह नष्ट किया कि कोई सुराग़ न मिल सके.

हालांकि अब तक ऐसा कोई फ़ॉरेंसिक प्रमाण नहीं मिला है जिससे ये साबित किया जा सके कि ख़ाशोज्जी के शव को तेज़ाब में डाला गया था.

आकताय ने हुर्रियत नाम के अख़बार को दिए इंटरव्यू में कहा, "उन्होंने ख़ाशोज्जी के शव के टुकड़ों को तेज़ाब में इसलिए डाला होगा क्योंकि वो उनके अवशेषों को आसानी से मिटा सकें."

अर्दोआन ने कहा, सऊदी का हाथ

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन ने पहली बार सऊदी अरब की सरकार पर पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या का आरोप लगाया है.

उन्होंने 'वॉशिंगटन पोस्ट' में लिखे एक लेख में कहा है:

"हम जानते हैं कि ख़ाशोज्जी की हत्या का फ़रमान सऊदी सरकार के सबसे ऊंचे स्तर से आया है."

हालांकि उन्होंने तुर्की के साथ सऊदी के 'दोस्ताना रिश्तों' पर ज़ोर देते हुए कहा कि उन्हें ये भरोसा भी है कि इसमें किंग सलमान की कोई भूमिका नहीं है.

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'हमने एक-दूसरे को अलविदा भी नहीं कहा'

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमरीका से कहा था कि वो जमाल ख़ाशोज्जी को एक 'ख़तरनाक इस्लामवादी' मानते हैं. अमरीकी मीडिया में ऐसा दावा किया गया है.

प्रिंस मोहम्मद ने कथित तौर पर व्हाइट हाउस को किए एक फ़ोन कॉल में यह बात कही थी.

अमरीकी अख़बारों 'द वॉशिंगटन पोस्ट' और 'न्यूयॉर्क टाइम्स' के मुताबिक, यह फ़ोन कॉल ख़ाशोज्जी के लापता होने के बाद, लेकिन सऊदी अरब की ओर से उनकी हत्या स्वीकार किए जाने से पहले की गई थी. सऊदी अरब ने इस दावे का खंडन किया है.

पत्रकार और लेखक जमाल ख़ाशोज्जी की तुर्की स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में हत्या कर दी गई थी.

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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद-बिन सलमान यानी एमबीएस

सऊदी नागरिक ख़ाशोज्जी अमरीका में रहते थे और वहीं पर मीडिया के लिए काम करते थे. वह सऊदी अरब की सत्ता के कड़े आलोचकों में से थे.

उनका शव अब तक नहीं मिला है लेकिन तुर्की, अमरीका और सऊदी अरब तीनों अब ये मानते हैं कि 2 अक्टूबर को इस्तांबुल के वाणिज्य दूतावास के भीतर ही उनकी हत्या कर दी गई थी. पहले सऊदी अरब इस बात से इनकार कर रहा था.

सऊदी अरब ने घटना में शाही परिवार का हाथ होने के आरोपों से इनकार किया है और सभी तथ्य खोज निकालने की प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है. मोहम्मद बिन सलमान ने कहा था, "यह अपराध सभी सऊदीवासियों के लिए दर्दनाक था."

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कथित फ़ोन कॉल पर क्या कहा गया?

वॉशिंगटन पोस्ट का दावा है कि सऊदी शाही राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान ने ये फोन कॉल अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के दामाद जेयर्ड कुशनर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन को की थी.

इस कॉल में उन्होंने ख़ाशोज्जी को अतिवादी संगठन 'मुस्लिम ब्रदरहुड' का सदस्य बताया था.

अख़बार का दावा है कि ये फ़ोन कॉल ख़ाशोज्जी के लापता होने के हफ़्ते भर बाद 9 अक्तूबर को की गई थी. बताया जा रहा है कि मोहम्मद बिन सलमान ने व्हाइट हाउस से अमरीका-सऊदी रिश्तों को बचाए रखने का निवेदन भी किया था.

अख़बार को दिए बयान में ख़ाशोज्जी के परिवार ने इस आरोप से इनकार किया है कि वो मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य थे. परिवार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, "जमाल ख़ाशोज्जी किसी भी तरह से ख़तरनाक शख़्स नहीं थे. उन्हें ख़तरनाक बताना मूर्खतापूर्ण होगा."

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जांच मेंअब तक क्या मिला?

ख़ाशोज्जी की हत्या कैसे हुई, इस पर अभी एक राय नहीं बन पाई है.

वो अपनी तुर्की की रहने वाली मंगेतर से शादी करने के लिए ज़रूरी दस्तावेज़ हासिल करने वाणिज्य दूतावास गए थे.

तुर्की के मीडिया ने दावा किया था कि ख़ाशोज्जी के साथ वहां बर्बरतापूर्ण बर्ताव किया गया था. सऊदी अरब ने पहले यह कहा था कि ख़ाशोज्जी वाणिज्य दूतावास से सुरक्षित बाहर चले गए थे. लेकिन बाद में उसने मान लिया था कि उनकी हत्या कर दी गई थी.

सऊदी प्रशासन ने 18 संदिग्धों को गिरफ़्तार किया है, जिन पर उसका कहना है कि सऊदी अरब में ही केस चलाया जाएगा. तुर्की चाहता है कि इन संदिग्ध अभियुक्तों का प्रत्यर्पण किया जाए.

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