आसिया बीबी: स्कॉटलैंड से उठी शरण देने की मांग

  • 15 नवंबर 2018
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Image caption ईशनिंदा मामले में ईसाई महिला आसिया बीबी को रिहा किया गया है

स्कॉटलैंड के सात ईसाई नेताओं ने ब्रिटेन के गृहमंत्री साजिद जाविद से पाकिस्तानी महिला आसिया बीबी को शरण देने की मांग की है. आसिया बीबी को हाल ही में पाकिस्तान में ईशनिंदा के एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने बरी किया था.

उन्हें निचली अदालत ने मौत की सज़ा सुनाई थी. आसिया बीबीसी आठ साल जेल में रहीं. उन पर पैग़ंबर मोहम्मद की निंदा का आरोप था.

अदालत ने जब उन्हें निर्दोष क़रार देते हुए बरी किया तो इसके विरोध में पाकिस्तान में जगह-जगह बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हो गए थे.

अपनी सुरक्षा के लिए फ़िक्रमंद आसिया के पति आशिक़ मसीह ने पिछले हफ़्ते ब्रिटेन से उनके परिवार को शरण देने की अपील की थी.

चर्च प्रमुखों का खुला ख़त

स्कॉटलैंड में कैथोलिक चर्च से जुड़ी सुज़न ब्राउन और लियो कशली ने इस खुले ख़त पर हस्ताक्षर किए हैं.

सुज़न ब्राउन चर्च ऑफ़ स्कॉटलैंड की जनरल असेंबली की मॉडरेटर हैं. लियो कशली एडिनबरा के सेंट एंड्रयू चर्च के आर्चबिशप हैं. इसके अलावा पांच और ईसाई धर्मगुरुओं ने इस ख़त पर दस्तख़्त किए हैं.

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धर्मुगुरुओं ने अपने ख़त में लिखा है, "आसिया को 31 अक्तूबर, 2018 को बरी कर दिया गया."

अब हालांकि वो अपने पति और परिवार के साथ है लेकिन तहरीक-ए-लब्बैक़ नाम की सियासी पार्टी ने आसिया को फांसी पर चढ़ाने की मांग की है. पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामलों में अदालत की अवहेलना करते हुए पहले भी कई हत्याएं की गई हैं.

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पत्र में आगे लिखा है, "आसिया बीबी, उनके परिवार और समर्थकों को ख़तरा साफ़ दिखता है. इसकी जड़ में पाकिस्तान का ईशनिंदा कानून है. और हम ब्रिटिश सरकार से निवेदन करते हैं कि वो इन कानूनों में संशोधन के लिए अपनी ताक़त का इस्तेमाल करे ताकि इनका दुरुपयोग न हो सके. और विभिन्न धर्मों के बीच सहनशीलता और शांति का माहौल कायम रहे."

स्कॉटलैंड के धर्मगुरुओं ने ये भी कहा कि पाकिस्तान में आसिया के बरी किए जाने के बाद हुए प्रदर्शन इसाईयों के लिए पाकिस्तान में ख़तरों की मिसाल हैं.

इसके अलावा चर्च ने उमीद बख़्श के परिवार को भी ब्रिटेन में रहने देने की अपील की है. उनका कहना है कि अगर बख़्श परिवार लौटा तो पाकिस्तान में उनकी जान को ख़तरा हो सकता है.

शरण की गुहार

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मक़सूद, परवीन और उनके दो बेटे साल 2012 में पाकिस्तान छोड़कर स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आ गए थे. उनपर उनके धर्म की वजह से धमकियां मिल रही थीं.

मक़सूद एक इंजीनियर हैं और उनकी पत्नी मिडवाइफ़ हैं.

चर्च ने कहा है कि इस परिवार को ब्रिटेन में रहने देने की हिमायत करने वाले करीब 92 हज़ार लोगों ने एक पेटिशन गृह मंत्रालय को सौंपी है. लेकिन सरकार ने उन्हें शरण देने की अर्ज़ी ख़ारिज कर दी है.

ख़त में लिखा है, "हम पाकिस्तान के ईसाई समुदाय के साथ खड़े हैं और ब्रिटेन की सरकार से वहां के अल्पसंख्यक तबके की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई का निवेदन करते हैं."

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