'ख़ुफ़िया अधिकारी के आदेश पर हुई जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या'

  • 16 नवंबर 2018
जमाल ख़ाशोज्जी इमेज कॉपीरइट AFP/Getty Images

सऊदी अरब के सरकारी अभियोजक ने कहा है कि पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या एक वरिष्ठ ख़ुफ़िया अधिकारी के आदेश पर हुई थी और इसमें क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का हाथ नहीं था.

एक प्रवक्ता ने मीडिया को बताया कि अधिकारी को ज़िम्मेदारी दी गई थी कि वो ख़ाशोज्जी से बात कर उन्हें इस खाड़ी देश लौटने के लिए राज़ी करें.

उनका कहाना है कि ख़ाशोज्जी 2 अक्टूबर के दिन इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास में पहुंचे थे जहां कुछ लोगों के साथ हुई हाथापाई के बाद उन्हें जानलेवा इंजेक्शन लगा दिया गया था.

अभियोजक ने इसमें 11 लोगों पर हत्या का मामला दर्ज किया है और जिसमें से पांच को मौत की सज़ा देने की गुज़ारिश की है.

इन अभियुक्तों के मामलों को अब अदालत में भेज दिया गया है जबकि हत्या में शामिल होने के शक़ में अन्य 10 लोगों की जांच अभी जारी है.

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Image caption सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद-बिन सलमान यानी एमबीएस

डिप्टी सरकारी अभियोजक ने प्रेस वार्ता के दौरान उस व्यक्ति की पहचान जाहिर नहीं की जिसने इस हत्या का आदेश दिया था.

हालांकि उन्होंने इतना ज़रूर बताया कि जिस व्यक्ति ने ख़ाशोज्जी की हत्या का आदेश दिया था वह उस टीम के प्रमुख थे. साथ ही उन्होंने कहा कि क्राउन प्रिंस को इस हत्या की कोई जानकारी नहीं थी.

रियाद में आयोजित प्रेस वार्ता में डिप्टी सरकारी अभियोजक शालान बिन राजी शालान ने कहा कि हत्या के बाद ख़ाशोज्जी के शरीर को अलग-अलग हिस्सों में बिल्डिंग के बाहर लाया गया.

वहीं क्राउन प्रिंस मोहम्मद के आलोचक यह बात मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि प्रिंस को इस मामले की जानकारी नहीं रही होगी.

इस मामले में अब तक कुल 21 लोगों को हिरासत में लिया गया है जबकि दो उच्च अधिकारियों को उनके पद से हटाया गया है.

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Image caption तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा है, "मैं मानता हूं कि ख़ाशोज्जी की हत्या करने के आदेश सऊदी सरकार के उच्च स्तर से ही जारी किए गए होंगे."

हालांकि वो इस बात को नहीं मानते कि आदेश जारी करने में क्राउन प्रिंस की कोई भूमिका रही होगी.

इससे पहले क्राउन प्रिंस मोहम्मद ने इस हत्या में किसी भी तरह की भूमिका होने से इंकार कर दिया था और इसे एक जघन्य अपराध बताया था.

हत्या पर सवाल

ख़ाशोज्जी की मौत कैसे हुई, इसे लेकर अब तक एक राय नहीं बन सकी है. वो अपनी शादी से जुड़े काग़जात के सिलसिले में इस्तांबुल स्थित सऊदी के वाणिज्यिक दूतावास गए थे.

शुरुआत में तुर्की मीडिया ने एक सूत्र के हवाले से दावा किया था कि तुर्की के पास ऐसी ऑडियो रिकॉर्डिंग है जिससे साबित होता है कि हत्या के पहले ख़ाशोज्जी को टार्चर किया गया था.

हालांकि, उसके बाद तुर्की ने दावा किया कि ख़ाशोज्जी के दूतावास में दाख़िल होते ही उनकी गला दबाकर हत्या कर दी गई और उनका शव "पहले से तैयार योजना के तहत" ठिकाने लगा दिया गया.

ख़ाशोज्जी का शव नहीं मिला और तुर्की के अधिकारियों का दावा किया कि इसे तेज़ाब की मदद से गला दिया गया था.

सरकारी अभियोजक के प्रेस वार्ता के बाद तुर्की के विदेश मंत्री मेव्लुत चोवाशुग्लू ने कहा कि उनके उत्तर "संतोषजनक नहीं हैं."

उन्होंने कहा, "उनका कहना है कि ख़ाशोज्जी के साथ हाथापाई हुई जिसके बाद उनकी हत्या की गई. लेकिन ये पहले से सोच समझ कर की गई हत्या थी."

"उनका कहना है कि ख़ाशोज्जी के शव के टुकड़े किए गए... लेकिन ये कोई आसानी से किया जाने वाला काम तो नहीं. इसके लिए ज़रूरी औज़ार लाए गए होंगे और लोग भी बुलाए गए होंगे ताकि उन्हें मारा जा सके और उनके टुकड़े किए जा सकें."

तुर्की के अधिकारियों का कहना है कि हत्या के कुछ घंटों पहले ही करीब 15 सऊदी एजेंट इस्तांबुल पहुंचे थे जिनमें से एक सऊदी गृह मंत्रकालय के साथ काम करने वाले फोरेंसिक पैथोलॉजिस्ट थे और इन लोगों के पास हड्डियां काटने के औज़ार थे.

मेव्लुत चोवाशुग्लू का कहना है, "इस मामले में आदेश देने वाले और उसे उकसाने वाले का नाम सामने लाया जाना चाहिए और किसी भी तथ्य को छिपाने की कोई कोशिश नहीं की जानी चाहिए."

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जमाल ख़ाशोज्जी पत्रकार और लेखक थे. वो दशकों तक सऊदी अरब के शाही परिवार के क़रीब थे और सरकार के सलाहकार भी रह चुके थे.

शाही परिवार से दूरी होने के बाद वो बीते साल अमरीका चले गए थे और निर्वासित जीवन बिता रहे थे. वो वॉशिंगटन पोस्ट में मासिक कॉलम लिखते थे. इस कॉलम में वो सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस की नीतियों की आलोचना करते थे.

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