ट्रंप सोचें, अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान पहले से अधिक मज़बूत क्यों: इमरान ख़ान

  • 19 नवंबर 2018
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अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप तो लंबे समय से अपने विरोधियों के लिए ट्विवर का इस्तेमाल करते रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भी ट्रंप को जवाब देने के लिए अब ट्विवर का ही सहारा लिया है.

इमरान ख़ान ने ट्रंप के आरोपों का ट्विटर पर सिलसिलेवार तरीके से जवाब दिया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की निंदा के ख़िलाफ़ ट्रंप के सामने रिकॉर्ड रखे जाने चाहिए. इमरान ख़ान ने लगातार तीन ट्वीट किए.

पहला, 9/11 की घटना में कोई भी पाकिस्तानी शामिल नहीं था, लेकिन पाकिस्‍तान ने अमरीका की चरमपंथ के ख़िलाफ़ लड़ाई में शामिल होने का फ़ैसला किया. इस लड़ाई में 75 हज़ार से ज़्यादा पाकिस्‍तानियों ने जान गंवाई और हमारे देश की अर्थव्‍यवस्‍था को 123 अरब डॉलर का नुकसान उठाना पड़ा. और अमरीकी सहायता मात्र 20 अरब डॉलर की थी.

दूसरे ट्वीट में इमरान ख़ान ने लिखा, "हमारे कबाइली इलाके बर्बाद हो गए और लाखों लोग बेघर. इस जंग ने आम पाकिस्तानियों की ज़िंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया. फिर भी पाकिस्तान अमरीका को ज़मीनी और हवाई क्षेत्र उपलब्ध कराता रहा. क्या ट्रंप अपने किसी ऐसे सहयोगी का नाम बता सकते हैं जिसने ऐसी कुर्बानियां दी हों."

इमरान ने एक और ट्वीट किया, "अपनी नाकामियों के लिए पाकिस्तान को बलि का बकरा बनाने की बजाय अमरीका को इस बात का गंभीर मूल्यांकन करना चाहिए कि नैटो के एक लाख 40 हज़ार और ढाई लाख अफ़ग़ान सैनिकों और कथित तौर पर एक लाख करोड़ डॉलर ख़र्च करने के बावजूद अफ़ग़ानिस्तान में आज तालिबान पहले से अधिक मजबूत क्यों है."

रविवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान की वित्तीय मदद बंद करने के फ़ैसले को सही ठहराते हुए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था.

ट्रंप का पाकिस्तान पर निशाना

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ट्रंप ने कहा, ''पाकिस्तान ने अमरीका के लिए कुछ नहीं किया है. पाकिस्तानी सरकार ने अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को अपने मुल्क़ में छिपाया हुआ था.''

फॉक्स न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में लादेन के ऐबटाबाद वाले ठिकाने पर ट्रंप ने कहा, ''पाकिस्तान में हर कोई जानता था कि वो वहां रह रहा था. वो भी ऐसी जगह जो पाकिस्तान सैन्य अकादमी के बिल्कुल बगल में थी.''

ट्रंप ने कहा, ''हम पाकिस्तान को हर साल 13 अरब डॉलर की मदद देते रहे. लेकिन अब ये मदद हमने बंद कर दी है. ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि उन लोगों ने हमारे लिए कुछ भी नहीं किया.''

इससे पहले, पाकिस्तान में मानवाधिकारों की मंत्री शिरीन मज़ारी ने भी ट्रंप के बयान पर ट्विटर पर प्रतिक्रिया दी थी.

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उन्होंने लिखा, "ड्रोन हमलों में अवैध रूप से मारे गए लोगों को सूची बहुत लंबी है, लेकिन एक बार इतिहास ने दिखाया है कि तुष्टिकरण काम नहीं करता है. फिर चाहे चीन हो या ईरान, अमरीका की अलग-थलग करने की नीति पाकिस्तान के सामरिक हितों से मेल नहीं खाती."

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