अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम: 'ग्लोबल जिहाद का गॉडफ़ादर' जो ओसामा बिन लादेन का गुरु भी था

  • 23 नवंबर 2018
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Image caption अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम

मरहूम सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी ने कभी 'ग्लोबल जिहाद के गॉडफ़ादर' कहे जाने वाले अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम का बचाव किया था.

ख़ाशोज्जी की हत्या के बाद ऐसी आवाज़ें अचानक उठनी शुरू हो गईं हैं कि जमाल, ओसामा बिन लादेन और अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम को मित्र थे.

इस संबंध में सोशल मीडिया पर कई लोग सालों पहले लिखा गया जमाल ख़ाशोज्जी का एक लेख भी शेयर किया जा रहा है.

लेकिन इन सबके बीच सवाल ये उठता है कि ये अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम कौन थे, जिनका ज़िक्र ख़ाशोज्जी की विचारधारा से लेकर लेबनान में 'अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम ब्रिगेड्स' के रहनुमा मुफ्ती अल शरिया बहा अल-दीन हज्जर की इसी सितंबर में हुई गिरफ़्तारी के दौरान हुआ.

अफ़ग़ानिस्तान पर सोवियत क़ब्ज़े के ख़िलाफ़ जिहाद के स्तंभों में से एक फ़लस्तीनी गुरु अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम की नवंबर, 1989 में पाकिस्तान में हत्या कर दी गई थी.

अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम का जन्म फ़लस्तीन में जिनीन के क़रीब एक गांव में हुआ था, जहाँ उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की.

फिर दमिश्क़ यूनिवर्सिटी से शरिया (इस्लामी क़ानून) की पढ़ाई की. वहां से 1966 में पढ़ कर निकले और अपने जीवन की शुरुआत में ही 'मुस्लिम ब्रदरहुड' से जुड़ गए.

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Image caption अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम

इसराइल के ख़िलाफ़

अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम ने वेस्ट बैंक और ग़ज़ा पट्टी पर इसराइली क़ब्ज़े के बाद क़ाबिज़ फौजों के ख़िलाफ़ कई अभियानों में हिस्सा लिया.

इसके बाद अज़्ज़ाम अपनी शिक्षा आगे जारी रखने के लिए वापस आए और साल 1969 में एमए की डिग्री हासिल की.

डॉक्टरेट की उपाधि के लिए वे मिस्र गए और साल 1975 में उन्होंने ये पड़ाव भी पार कर लिया.

अब्दुल्लाह डॉक्टरेट पूरी करने के बाद जॉर्डन वापस आए और जॉर्डन यूनिवर्सिटी के शरिया कॉलेज में साल 1980 तक उन्होंने पढ़ाया.

जॉर्डन के बाद उनका अगला पड़ाव जेद्दा का किंग अब्दुल अज़ीज़ विश्वविद्यालय था.

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Image caption अयमन अल जवाहिरी

अगला ठिकाना पाकिस्तान

अफ़ग़ानी जिहाद के नज़दीक जाने के लिए अब्दुल्लाह पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय इस्लामिक विश्वविद्यालय से जुड़ना चाहते थे.

साल 1982 में अब्दुल्लाह ने पेशावर का रुख़ किया, जहाँ उन्होंने 'मक़तब अल ख़िदमत' की स्थापना की, ताकि वह अरब स्वयंसेवकों के एकजुट होने का केंद्र बन सके.

पेशावर में ही उन्होंने 'जिहाद' नाम की पत्रिका भी निकाली जो काफिरों से जंग लड़ने की अपील करती थी और इसके लिए दावत भी देती थी.

इस बीच मुजाहिदों में अज़्ज़ाम का रुतबा बढ़ गया. वे उन मुजाहिदीनों के लिए आध्यात्मिक गुरु जैसे हो गए. मुजाहिदीनों की इसी फौज में एक शख़्स ओसामा बिन लादेन भी थे जिन्हें दुनिया अल-कायदा और सितंबर ग्यारह के हमलों की वज़ह से जानती है.

ब्रितानी अख़बार 'गार्डियन' के साथ अपनी बातचीत में अल्या अलगानिम (ओसामा बिन लादेन की माँ) ने कहा था कि इकोनॉमिक्स की पढ़ाई के लिए किंग अब्दुल अज़ीज़ विश्वविद्यालय में ओसामा ने दाखिला लिया था. यहां दाखिला पाने के बाद वो बहुत बदल गए थे.

ओसामा की मां ने ये भी बताया था कि उन्हें प्रभावित करने वालों में एक अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम भी थे जो 'मुस्लिम ब्रदरहुड' के उन सदस्यों में से थे, जिन्हें देश निकाला दे दिया गया था.

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ओसामा से नज़दीकी

बाद में अज़्ज़ाम ओसामा के आध्यात्मिक गुरु और सबसे नज़दीकी सलाहकार बन गए.

इस बीच अज़्ज़ाम ने कई किताबें प्रकाशित कीं जो जिहादी विचारधारा पर आधारित थीं. इनमें अहम किताबें हैं 'अल दिफाअ अन अरज़िलमुस्लिमीन अहममु फरूज़िल आयान' (मुस्लिम भूमि का बचाव स्वाभिमानी व्यक्तियों का सबसे महत्वपूर्ण कर्तव्य) और 'आयतुर्रहमान फि जिहादि अफ़ग़ान' (अफ़ग़ानी जिहाद से सम्बंधित रहमान की आयतें).

साल 1989 में अफ़ग़ानिस्तान से सोवियत सेना की वापसी के बाद 'जिहादियों' को एक गतिरोध का सामना करना पड़ा क्योंकि जिस मुख्य उद्देश्य के लिए वे पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान आए थे वो ख़त्म हो चुका था.

बताया जाता है कि इस अवधि में, अज़्ज़ाम ने जिहाद का रुख अफ़ग़ानिस्तान से फ़लस्तीन की ओर करने के लिए कहा. जबकि मिस्र के अयमन अल जवाहिरी के नेतृत्व में अरब कट्टरपंथियों के एक गुट ने अफ़ग़ानिस्तान में 'जिहाद' जारी रखने और वहीं से अरब शासनों को उखाड़ फेंकने को प्राथमिकता दी.

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अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम की हत्या

अल-जवाहिरी की अध्यक्षता में मिस्र के जिहादियों ने अज़्ज़ाम के विचारों की आलोचना की और यहीं से अल-क़ायदा का जन्म हुआ.

इसी बीच, अफ़ग़ान जिहादी गुटों के बीच लड़ाई छिड़ गई और अज़्ज़ाम को मारने के लिए पेशावर में कार विस्फोट किया गया.

आज तक ये पता नहीं चल पाया है कि अज़्ज़ाम की हत्या का कौन ज़िम्मेदार है, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि कई लोग उनकी मौत चाहते थे.

अल-क़ायदा, इसराइली खुफिया एजेंसी मोसाद, सोवियत, अफ़ग़ानिस्तान, अमरीका और पाकिस्तान की खुफ़िया ऐजेंसियों, यहां तक कि कुछ अफ़ग़ान मुजाहिदीन गुटों के बीच एक दूसरे पर आरोप लगते रहे हैं. अज़्ज़ाम ने गुलबुद्दीन हिकमतयार के ख़िलाफ़ अहमद शाह मसूद के साथ सहयोग किया था और सऊदी अरब भी उनकी बढ़ती ताकत के कारण चिंता में था.

भले ही अब्दुल्लाह अज़्ज़ाम के क़ातिलों की पहचान अभी भी नहीं हो पाई है, लेकिन दुनिया ये जानती है कि वो ओसामा बिन लादेन और अरब जिहादियों के आध्यात्मिक गुरु थे.

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