रूस से तनाव के बाद यूक्रेन ने लगाया मार्शल लॉ

  • 27 नवंबर 2018
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यूक्रेन की संसद ने अपने तीन जहाज़ों और 23 नौसैनिकों पर रूस के क़ब्ज़े के बाद देश के एक हिस्से में मार्शल लॉ लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने कहा है कि ऐसे सीमावर्ती क्षेत्रों में 30 दिनों तक मार्शल लॉ लगाया जाएगा जहाँ रूस के हमले की आशंका है.

इस दौरान प्रशासन विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों पर प्रतिबंध लगा सकता है और आम लोगों को सैन्य सेवा के लिए बुलाया सकता है.

रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने यूक्रेन के इस फ़ैसले पर गहरी चिंता जताई है.

ये सारा मामला रविवार को शुरू हुआ जब रूसी तटरक्षकों ने यूक्रेन की तीन नौकाओं गोलियाँ चलाईं जो क्राइमिया के पास समुद्र में थे जिसपर रूस ने 2014 में कब्ज़ा कर लिया था.

यूक्रेन ने इसे रूस की एक आक्रामक हरकत बताया मगर रूस का कहना था कि ये नौकाएँ अवैध रूप से उसकी सीमा में चली आई थीं.

मगर यूक्रेन ने कहा है कि उसने रूस को इस बारे में पहले से जानकारी दी है.

रूस ने इसके बाद कर्च स्ट्रेट नाम के एक अहम रास्ते पर अपने टैंकर को खड़ा करके जल मार्ग अवरोधित कर दिया है.

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कैसे बढ़ा विवाद?

रूस और यूक्रेन के बीच हुआ ये संघर्ष क्राइमिया और रूस के बीच पड़ने वाले कर्च स्ट्रेट यानि एक तंग जल मार्ग पर हुआ है.

रविवार की सुबह यूक्रेन की नौसेना के दो बंदूकों से लैस जहाज और एक नौकाओं को खींचने वाला जहाज इस रास्ते से होकर अज़ोव सागर में स्थित बंदरगाह शहर मेरीपोल में पहुंचने की कोशिश कर रहा था.

साल 2003 में रूस और यूक्रेन के बीच एक संधि हुई थी जिसके तहत कर्च के तंग समुद्री रास्ते और अज़ोव सागर के बीच जल सीमाएं बंटा दी गई थीं.

लेकिन, हाल ही में रूस ने यूक्रेन के बंदरगाह शहर से आने वाले जहाजों की जांच करना शुरू कर दिया है.

यूक्रेन पर जल सीमा का उल्लंघन करने के बाद मॉस्को ने रूस निर्मित पुल के नीचे एक टैंकर खड़ा कर दिया है जिससे अज़ोव सागर जाने का रास्ता बंद हो गया है.

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अज़ोव सागर ज़मीन से घिरा हुआ है और काला सागर से कर्च के तंग रास्ते से होकर ही इसमें प्रवेश किया जा सकता है.

इसके साथ ही रूस ने इस क्षेत्र में दो फ़ाइटर जेट और दो हैलिकॉप्टरों को भी तैनात कर दिया है.

यूक्रेनियन नेवी ने कहा है कि जब वह इस क्षेत्र को छोड़कर बाहर निकल रहे थे तभी उन पर हमला करके उन्हें निष्क्रिय कर दिया गया.

इसके साथ ही बताया गया है कि इस हमले में 23 यूक्रेनी लोग और छह क्रू सदस्य घायल हो गए हैं.

कितना अहम है ये संघर्ष?

हाल के सालों में रूस और यूक्रेन के बीच ये पहला संघर्ष है.

फिलहाल, यूक्रेन के सुरक्षाबल पूर्वी यूक्रेन में रूस समर्थित अलगाववादियों के साथ संघर्ष कर रहे हैं.

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Image caption यूक्रेनियाई राष्ट्रपति पोरोशेंको

यूक्रेन में मार्शल लॉ लगाने के साथ ही सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने का आदेश दिया गया है.

लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको ने कहा है कि इन कदमों का मतलब युद्ध का ऐलान नहीं होगा.

रूस ने साल 2014 में क्राइमिया को अपने साथ मिलाने के बाद यूक्रेन के भारी विरोध के बावजूद कर्च ब्रिज़ का निर्माण कराया था जो कि इस प्रायद्वीप को दक्षिणी रूस से जोड़ देता है.

दोनों देशों के दावे अलग कैसे?

यूक्रेन का दावा है कि उसने रूस को इस बात की अग्रिम सूचना दी थी कि वह अपने जहाजों को मेरीपोल की ओर ले जा रहा है और जहाजों का पकड़ा जाना सशस्त्र आक्रामकता का एक नया नमूना है.

वहीं, रूस ने कहा है कि यूक्रेन सोच समझकर उकसाने वाले कदम उठा रहा है.

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रूस के मुताबिक़, अगले साल मार्च में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों को ध्यान में रखकर ये कदम उठाया गया है.

एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़, मार्शल लॉ सरकार को सार्वजनिक विरोध रोकने, मीडिया के नियमन, चुनावों के बहिष्कार करने और आम नागरिकों को सामाजिक रूप से जरूरी काम जैसे सैन्य प्रतिष्ठानों में काम करने के लिए बाध्य करने की शक्ति देता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद रविवार को लगभग 150 लोगों ने कीव में स्थित रूसी दूतावास के सामने इकट्ठे होकर विरोध प्रदर्शन किए.

इस दौरान दूतावास की एक गाड़ी को आग के हवाले कर दिया गया है.

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इसी बीच नैटो और यूरोपीय संघ ने इस मुद्दे पर बयान जारी करके कहा है कि रूस कर्च के रास्ते में पैदा किए गए अवरोध को दूर करे.

यूरोपीय संघ ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि रूस कर्च के रास्ते से गुज़रने की आज़ादी बहाल करेगा और हम सभी पक्षों से तनाव ख़त्म करने का आग्रह करते हैं."

इसके साथ ही यूरोपीय संघ ने कहा है कि कर्च ब्रिज़ "यूक्रेन की संप्रुभता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन" है.

यूक्रेन और रूस के रिश्ते

साल 2014 के मार्च महीने में यूक्रेनियन क्षेत्र क्राइमिया के रूस में विलय के बाद से रूस और यूक्रेन के रिश्तों में तल्खी जारी है.

इसके बाद से ही यूक्रेन पूर्वी क्षेत्रों में रूस समर्थित अलगाववादियों और यूक्रेनियन सेना के बीच संघर्ष जारी है.

इस संघर्ष में अब तक दस हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है.

यूक्रेन रूस पर अपने पूर्वी क्षेत्र में सेना भेजकर अलगाववादियों को तैयार करने का आरोप लगाता रहा है.

रूस इस आरोप का खंडन करता है लेकिन ये स्वीकार करता है कि रूसी स्वयंसेवक बागियों की मदद कर रहे हैं.

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यूक्रेन ने बीती मार्च में क्राइमिया के एक मछली पकड़ने वाले जहाज को पकड़ लिया था.

इसके बाद से रूस कर्च के रास्ते से होकर गुज़रने वाले जहाजों की जांच कर रहा है.

रूस के मुताबिक़, यूक्रेनियन जहाजों की जांच सुरक्षा कारणों की वजह से ज़रूरी है. ये कहते हुए रूस इशारे में ये बताता है कि उसके कर्च ब्रिज़ को यूक्रेन के चरमपंथियों से ख़तरा हो सकता है.

लेकिन यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको कहते हैं कि इस प्रतिबंध की वजह से उनके देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है.

वॉशिंगटन पोस्ट से बात करते हुए पोरोशेंको ने सितंबर में कहा था कि मेरीपोल से निर्यात होने वाला लौह और इस्पात उत्पाद कुल निर्यात का 25 फीसद है.

यूक्रेन के उत्तरी तट पर स्थित बर्डयेंक्स और मेरीपोल बंदरगाह अनाज़ के निर्यात और कोयले के आयात के लिए भी ज़रूरी हैं.

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