यूक्रेन-रूस विवाद: व्लादिमीर पुतिन ने निकाला चुनावी कनेक्शन

  • 28 नवंबर 2018
यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको और रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आरोप लगाया है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको आगामी चुनावों के चलते रूस के साथ टकराव बढ़ा रहे हैं.

पुतिन ने कहा कि पेट्रो पोरोशेंको अज़ोव सागर विवाद के ज़रिए 2019 के चुनावों में अपनी रेटिंग बढ़ाना चाहते हैं.

उन्होंने बुधवार को एक इन्वेस्टमेंट फोरम में ये बातें कहीं.

वहीं अज़ोव सागर में यूक्रेन के तीन सैन्य जहाजों पर रूस के क़ब्ज़े के बाद यूक्रेन में 30 दिनों के लिए मार्शल लॉ लगा दिया गया है.

पेट्रो पोरोशेंको ने एक टीवी इंटरव्यू में कहा, ''रूस से युद्ध की आशंका को लेकर देश ख़तरे में, इसे कोई मज़ाक न समझे.''

रूस ने रविवार को क्रीमियाई प्रायद्वीप के पास यूक्रेन के तीन जहाज़ों पर हमला कर उन्हें अपने क़ब्ज़े में ले लिया था.

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कैसे शुरू हुआ टकराव?

यूक्रेन की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि रूस के विशेष बलों ने बंदूक़ों से लैस दो नावों और नौकाओं को खींचने वाले एक जहाज़ का पीछा किया और फिर उन्हें अपने क़ब्ज़े में ले लिया.

इस घटना में क्रू के छह सदस्य ज़ख्मी हुए थे.

रूस और यूक्रेन के बीच क्रीमिया को लेकर तनाव सालों पुराना है. 2003 की संधि के मुताबिक़, रूस और यूक्रेन के बीच कर्च स्ट्रेट जलमार्ग और अज़ोव सागर के बीच जल सीमाएं बंटी हुईं हैं.

अज़ोव सागर ज़मीन से घिरा हुआ है और काला सागर से कर्च के तंग रास्ते से होकर ही इसमें प्रवेश किया जा सकता है. हाल ही में रूस ने यूक्रेन के बंदरगाह से आ रहे जहाजों की निगरानी करना शुरू कर दिया था, जिसका यूक्रेन ने विरोध किया था.

इससे पहले मार्च में यूक्रेन ने क्रीमिया से एक मछली पकड़ने वाली नाव ज़ब्त कर ली थी.

रूस ने कहा था कि जहाज़ों की निगरानी करना सुरक्षा कारणों से ज़रूरी है, क्योंकि यूक्रेन के कट्टरपंथियों से पुल को ख़तरा हो सकता है.

रूस ने कर्च स्ट्रेट पर अपने टैंकर खड़े करके जलमार्ग को अवरोधित कर दिया है. इससे यूक्रेन के व्यापार पर असर पड़ सकता है.

लेकिन, दोनों ही देश एक-दूसरे को इस टकराव के लिए ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं.

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यूक्रेन में मॉर्शल लॉ

अब यूक्रेन के सीमावर्ती इलाकों में मार्शल लॉ लगाया जा चुका है. इस मॉर्शल लॉ को सीधा असर रूस-यूक्रेन के सरहदी इलाक़ों पर सबसे ज़्यादा होगा.

इस दौरान प्रशासन विरोध प्रदर्शनों और हड़तालों पर प्रतिबंध लगा सकता है और आम लोगों को सैन्य सेवा के लिए बुलाया सकता है.

इसी बीच नाटो और यूरोपीय संघ ने इस मुद्दे पर यूक्रेन का पक्ष लेते हुए रूस को कर्च के रास्ते में पैदा किए गए अवरोध दूर करने के लिए कहा है.

रूस ने यूक्रेन के तीन जहाज़ों के साथ जिन 24 नौसैनिकों को पकड़ा था, वो अब दो महीने तक हिरासत में रहेंगे.

इन नौसैनिकों में क्रीमिया की अदालत में केस चलाया जाएगा. हालांकि इन लोगों के साथ युद्धबंदियों जैसा सलूक नहीं किया जाएगा.

VIDEO: आख़िर रूस में पुतिन इतने लोकप्रिय क्यों?

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