फ्रांस में पेरिस की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प

  • 8 दिसंबर 2018
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फ़्रांस की जनता एक बार फ़िर सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरी. ये लगातार चौथा हफ्ता था जब पेरिस की सड़कों पर प्रदर्शनकारी जमा हुए और सरकार के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की.

करीब पाँच हज़ार लोग सिटी सेंटर पर इकट्ठा हुए, हालाँकि ये संख्या पिछले प्रदर्शनों के मुक़ाबले कम थी. पुलिस ने कम से कम 272 लोगों को हिरासत में लिया है. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया.

प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए पेरिस की सड़कों पर 12 बख्तरबंद गाड़ियां तैनात थी, और करीब 8 हज़ार पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था.

शनिवार के विरोध-प्रदर्शन में हज़ारों की संख्या में लोगों के सड़कों पर उतरने की उम्मीद है. विरोध प्रदर्शन का यह लगातार चौथा हफ़्ता है.

पूरे फ्रांस में क़रीब 90 हज़ार सुरक्षाकर्मियों को सड़कों पर उतारा गया है.

यहां एहतियात के तौर पर दुकानें बंद करवा दी गई हैं और आइफ़ल टावर समेत कई महत्वपूर्ण स्थानों को बंद रखा गया है.

लोगों का विरोध तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि, आय का नहीं बढ़ना, बेरोज़गारी और कड़े श्रम क़ानून हैं. ये अपने आप में पहला विरोध प्रदर्शन नहीं है.

पिछले कुछ दिनों में इन्हीं मुद्दों को लेकर फ़्रांस की जनता सड़क पर उतरती रही है. प्रदर्शन की अगुवाई करने वालों को 'येलो वेस्ट' कहा जा रहा है.

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असंतोष का सबसे बड़ा कारण

दरअसल, फ़्रांस के लोग सबसे ज़्यादा डीज़ल से चलने वाली गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं.

यहां डीज़ल की वर्तमान क़ीमत क़रीब 121 रुपए प्रति लीटर है और पिछले साल की तुलना में इसकी क़ीमत 23 फ़ीसदी तक बढ़ चुकी है.

सरकार ने जब एक बार फिर डीज़ल पर 7.6 फ़ीसदी और पेट्रोल पर 3.9 फ़ीसदी टैक्स बढ़ा दिया तब लोगों में इसे लेकर ग़ुस्सा फूट पड़ा और सड़कों पर उतर आए.

लोगों में ईंधन की क़ीमतों की बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ रोष को देखते हुए सरकार ने ईंधन टैक्स छह महीने के लिए स्थगित कर दिया है.

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विरोध के और भी हैं कारण

ईंधन के दामों में वृद्धि के साथ ही लोगों के असंतोष का एक अन्य सबसे बड़ा कारण जीवन जीने की लागत में वृद्धि और आय का न बढ़ना है. फ्रांस के बड़े श्रमिक तबके और निम्म मध्यम-वर्गीय लोगों का कहना है कि उनके लिए जीना मुश्किल हो रहा है. यही वजह रही कि प्रर्दशनकारी 'हमें जीने दो' का नारा लगा रहे थे.

इसके अलावा यहां वर्तमान शिक्षा नीति के भी विरोधी हैं.

यह विरोध प्रदर्शन अपने दूसरे हफ़्ते से बड़ा रूप लेने लगा. तब 17 नवंबर को क़रीब तीन लाख लोग सड़कों पर उतर आए थे. इसी महीने की पहली तारीख़ को भी क़रीब डेढ़ लाख लोगों ने प्रर्दशन किए. इस दौरान हिंसा की कई घटनाएं हुई थीं.

पिछले हफ़्ते के प्रदर्शन के दौरान पेरिस की सड़कों पर हिंसा के बाद सैकड़ों को गिरफ़्तार किया गया जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे. इस दौरान दशकों बाद पेरिस की सड़क पर हिंसक झड़प देखी गई.

सरकार के आंतरिक मंत्री क्रिस्टोफ़ कास्टानेर का कहना है कि लोग हिंसक प्रदर्शन कर रहे हैं.

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ज़ीरो टॉलरेंस

आंतरिक मंत्री क्रिस्टोफ़ कास्टानेर ने कहा है कि उन्हें पिछले वीकेंड की तुलना में इस वीकेंड में प्रदर्शनकारियों के कम संख्या में जुटने की उम्मीद है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इनकी देशव्यापी संख्या इस बार दस हज़ार से ज़्यादा नहीं होगी.

भले ही मंत्री को उतने बडे़ स्तर पर विरोध की उम्मीद नहीं है लेकिन प्रशासन इस प्रदर्शन को कम नहीं आंक रहा. लिहाजा प्रशासन ने पिछले हफ़्ते तैनात किए गए क़रीब 65 हज़ार सुरक्षाकर्मियों की संख्या को बढ़ाकर 89 हज़ार कर दिया है.

ये सुरक्षाबल पेरिस में पिछले हफ़्ते जैसी हिंसा को रोकेंगे. प्रदर्शनकारियों ने बीते हफ़्ते पेरिस की स्मारक आर्क डी ट्रायम्फ़ को नुक़सान पहुंचाया, पुलिस पर हमले किए, कारों को पलट दिया और उनमें आग लगा दी थी.

आंतरिक मंत्री क्रिस्टोफ़ कास्टानेर ने इस बार 'ज़ीरो टॉलरेंस' अपनाने की चेतावनी दी है.

उन्होंने कहा, "हमारी जानकारी के मुताबिक़, कुछ कट्टरपंथी और विद्रोही लोग संगठित होने की कोशिश करेंगे. इसमें कुछ बेहद हिंसक प्रवृति के लोग भाग लेना चाहते हैं."

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पेरिस की सड़कों पर 2005 में उपनगरीय इलाक़ों में भड़के दंगे के दौरान बख़्तरबंद गाड़ियां उतारी गई थीं, उसके बाद से इन्हें पहली बार उतारा गया है.

सोशल मीडिया पर कुछ लोग 'द ट्रेज़डी ऑफ़ मैकबेथ' नाटक के ज़रिए पुलिस पर और राष्ट्रपति के एलिसी पैलेस ऑफ़िस पर हमले के लिए लोगों को जुटाने में लगे हैं. सांसद बेनॉइट पोटेरी को इन नोट के साथ एक चिट्ठी में 'बुलेट' भेजा गया कि "अगली बार यह आपके आंखों के बीच में होगी."

वीकेंड पर होने वाले फ़ुटबॉल लीग के मैच भी स्थगित कर दिए गए हैं.

इन सब के बीच पेरिस की मेयर एन हिडाल्गो ने लोगों से अनुरोध किया है, "शनिवार को पेरिस का ख्याल रखना क्योंकि सभी फ़्रांस के लोगों से जुड़ा है."

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Image caption फ्रांस में नियम के मुताबिक़ पीले रंग का यह जैकेट हर वाहन में होना चाहिए

क्या है येलो मूवमेंट?

फ्रांस में कई सालों बाद इतना बड़ा आंदोलन देखा गया है. इसे नाम येलो वेस्ट या येलो जैकेट मूवमेंट के नाम से जाना जा रहा है.

इसमें हिस्सा लेने वालों ने पीले रंग की वो जैकेट पहनी थी, जिन्हें सुरक्षा के लिहाज़ से पहना जाता है क्योंकि इनका चटख रंग ध्यान खींचता है.

फ्रांस में 2008 में बने क़ानून के मुताबिक़ वाहनों में इस तरह के जैकेट रखना अनिवार्य है ताकि गाड़ी कहीं ख़राब हो जाए तो इसे पहनकर उतरा जाए.

पिछले विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ये जैकेट सांकेतिक रूप से पहनी थी ताकि अपनी मांगों और समस्याओं की ओर सरकार का ध्यान खींच सकें.

फ़्रांस में येलो वेस्ट या येलो जैकेट मूवमेंट की शुरुआत 17 नवंबर 2018 को हुई थी. यह आंदोलन इसके पड़ोसी देशों इटली, बेल्जियम और नीदरलैंड तक फ़ैल गया था मगर वहां ये बहुत कामयाब नहीं हो सका.

लेकिन फ़्रांस में एक पखवाड़े से भी ज़्यादा समय से इस आंदोलन की धमक सुनाई दे रही है. राजधानी पेरिस से लेकर फ्रांस के अन्य प्रमुख शहरों और छोटे क़स्बों तक लाखों की संख्या में लोगों ने इस आंदोलन में हिस्सा लिया.

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Image caption आर्क डी ट्रायम्फ़

आर्थिक रूप से कमज़ोरों की आवाज़

पेरिस में रह रहीं वरिष्ठ पत्रकार वैजू नरावने बताती हैं कि यह आंदोलन सोशल मीडिया से शुरू हुआ और मध्यम वर्ग के आर्थिक रूप से थोड़े कमज़ोर लोगों की आवाज़ बन गया.

वह बताती हैं, "एक महिला ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके कहा कि नए टैक्सों के कारण हमें जो परेशानी हो रही है, उसके ख़िलाफ़ प्रदर्शन करना चाहिए. पहले 200 लोग जुड़े, फिर 400 हुए और धीरे-धीरे 10 लाख से ज़्यादा लोगों का रिस्पॉन्स मिला."

पेरिस में बीबीसी की लूसी विलियम्स कहती हैं कि पिछले कुछ हफ़्तों से सोशल मीडिया पर ईंधन की क़ीमतों को लेकर बज़ दिख रहा है, लोग बढ़ी हुई क़ीमतों के हटाए जाने की मांग कर रहे हैं.

इसका उद्देश्य निराश परिवारों की आर्थिक निराशा और राजनीतिक अविश्वास प्रकट करना है. इसे बहुत बड़े तबके का समर्थन मिल रहा है.

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Image caption पेरिस की कुछ तस्वीरें एक आने वाले तूफ़ान की याद दिलाती हैं

शुक्रवार को कराए गए एक ओपिनियन पोल में सरकार के प्रति समर्थन में गिरावट देखी गई. हालांकि, यह अब भी 66 फ़ीसदी पर बना हुआ

प्रधानमंत्री एडवर्ड फिलिप ने शुक्रवार को बातचीत शुरू करने की कोशिश के लिए इस आंदोलन के प्रतिनिधियों से मुलाक़ात की.

जिन सात प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया उन्होंने प्रधानमंत्री की इस पहल का स्वागत किया. साथ ही उन्होंने लोगों से शनिवार को सड़कों पर नहीं उतरने का आग्रह भी किया.

इन प्रतिनिधियों में से एक क्रिस्टोफर चालेनकॉन ने कहा, "उम्मीद है कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों लोगों से बात करेंगे, एक पिता की तरह, प्यार से और सम्मान के साथ और वो एक ठोस निर्णय लेंगे."

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इस संकट के बीच राष्ट्रपति मैक्रों की रेटिंग में भी गिरावट देखी गई है. कुछ लोगों ने पूरे मामले में उनके लो-प्रोफ़ाइल रहने पर उनकी आलोचना की है. अपना समर्थन दिखाने के लिए शुक्रवार को उन्होंने पेरिस के बाहर पुलिल बैरेक का दौरा किया.

इसके साथ ही अब उनके ऑफ़िस ने बताया कि वो अगले हफ़्ते देश को संबोधित करने की योजना बना रहे हैं.

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