नेपाल में भारत के नए नोट हुए बंद

  • 14 दिसंबर 2018
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नेपाल में दो हज़ार, पांच सौ और दो सौ रुपए के नए भारतीय नोटों को अवैध घोषित कर दिया गया है. ये नोट भारत में 2016 में हुई नोटबंदी के बाद लाए गए थे.

8 नवंबर 2016 की शाम को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 के नोट बंद करने का एलान किया था. इसके लगभग दो साल बाद नेपाल में नोटबंदी के बाद आए नए नोटों को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है.

इसी की पूरी जानकारी लेने के लिए बीबीसी संवाददाता भूमिका राय ने नेपाल की राजधानी काठमांडू में मौजूद बीबीसी हिंदी रेडियो के एडिटर राजेश जोशी से बात की.

वे बताते हैं कि कैबिनेट में इसका फ़ैसला बीते सोमवार को ही ले लिया गया था लेकिन पत्रकारों को इसकी जानकारी गुरुवार दी गई है.

वे कहते हैं, ''सरकारी प्रवक्ता गोकुल बास्कोटा ने बताया कि दो हज़ार, पांच सौ और दो सौ रुपए के भारतीय नोट को रखना, उनके बदले किसी सामान को लेना या भारत से उन्हें नेपाल में लाना ग़ैरकानूनी हो गया है.''

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उन्होंने बताया कि भारत में नोटबंदी होने के बाद हमेशा से ये मुद्दा सुर्खियों में बना रहा है.

दो साल बाद क्यों उठा ये मुद्दा

भारतीय मुद्रा नेपाल में आसानी से चलती थी. यहां के कई लोगों का कहना है कि उनके पास अब भी भारत के पुराने हज़ार और पांच सौ के कई नोट हैं, जिन्हें वापस नहीं लिया गया है.

एक बार नेपाल के केंद्रीय बैंक ने ये कहा था कि उनके पास भारत के करीब आठ करोड़ रुपए मूल्य के पुराने नोट हैं.

भारत के पुराने नोटों के मुद्दे पर नेपाल में भारत से थोड़ी नाराज़गी भी थी.

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नेपाल के विदेशी विनिमय व्यस्थापन विभाग के कार्यकारी निदेशक भीष्मराज ढुंगाना ने सितम्बर, 2018 में कहा था कि भारत अपने पुराने नोटों को क्यों नहीं बदलता.

बीबीसी हिंदी के रेडियो एडिटर ये भी बताते हैं कि ये सवाल तब भी उठा था जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेपाल में जनकपुरधाम के दर्शन करने के लिए आए थे.

तब नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भी उनके सामने ये मुद्दा उठाया था.

लेकिन उसके बाद भी कुछ नहीं हुआ, जिसे लेकर यहां नाराज़गी बनी हुई थी और शायद इसी वजह से नेपाल सरकार ने भारत के नए नोटों को अवैध घोषित करने का फ़ैसला लिया है.

हालाँकि नेपाल सरकार ने दो हज़ार, पांच सौ और दो सौ के नए नोट के अलावा किसी और नोट के बारे में नहीं बताया गया है. सौ का नोट चलेगा या नहीं इसके बारे में सरकार ने कुछ नहीं कहा है.

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वैसे राजेश जोशी ये भी कहते हैं कि नोटो को लेकर नाराज़गी के बावजूद दोनों देशों के रिश्तों पर इससे असर पड़ने के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता.

उनके अनुसार जब ये फ़ैसला लिया गया होगा तब भारत सरकार या नेपाल में मौजूद भारत के राजनयिकों को ये अंदाज़ा रहा होगा कि इस तरह की घोषणा हो सकती है.

साथ ही उनका कहना है कि नोटों पर मतभेद के बावजूद दोनों देशों के बीच बातचीत भी चलती ही रही है.

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