आख़िर नेपाल ने क्यों बैन किए भारतीय नोट

  • 16 दिसंबर 2018
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नेपाल की सरकार ने भारतीय मुद्रा के सौ से ऊपर के नोटों पर पाबंदी लगा दी है. मतलब नेपाल में सौ से ऊपर के भारतीय नोट नहीं चलेंगे. पाबंदी के पहले तक नेपाल में स्थानीय मुद्रा के साथ भारत के सभी नोट भी चलन में थे.

आख़िर नेपाल ने अचानक से ये फ़ैसला क्यों लिया? हाल ही में नेपाल के मंत्रियों की एक बैठक हुई थी और इसी बैठक में यह फ़ैसला लेकर एक नोटिस जारी किया गया कि 200, 500 और 2,000 के भारतीय नोट नेपाल में अवैध होंगे.

सबसे दिलचस्प ये है कि नेपाल ने इसकी कोई वजह नहीं बताई है. नेपाल की तरफ़ से जो आधिकारिक नोटिस जारी किया गया, उसमें भी कोई कारण नहीं बताया गया है. ऐसे में सवाल उठता है कि नेपाल को अचानक इसकी क्या ज़रूरत आन पड़ी?

काठमांडू स्थित वरिष्ठ पत्रकार युवराज घिमरे कहते हैं कि ये फ़ैसला क्यों लिया गया, अभी तक साफ़ नहीं है.

वो कहते हैं, ''ज़ाहिर है इसका असर लोगों पर पड़ेगा. ख़ासकर सीमाई इलाक़ों में भारतीय व्यापारियों को समस्या होगी. मुझे नहीं लगता है कि इससे भारत को कोई नुक़सान होगा. दोनों देशों के उन कामगारों को दिक़्क़त होगी जो एक दूसरे के देश में काम या व्यापार करते हैं.''

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प्रभावी होगा फ़ैसला?

नेपाल सरकार का ये फ़ैसला कितना व्यावहारिक होगा? क्या इस फ़ैसले से लोग 100 से ऊपर के नोटों से लेनदेन बंद कर देंगे? इस सवाल के जवाब में घिमरे कहते हैं, ''ये सवाल वाक़ई अहम है कि क्या सरकार का फ़ैसला प्रभावी होगा? वो भी तब जब ये नोट न लेने वाले को दिक़्क़त है और न देने वाले को.''

हालांकि घिमरे कहते हैं कि भारतीय नोट पर पाबंदी लगाने की एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी है. वो कहते हैं, ''1999 में जब भारत के यात्री विमान को आतंकियों ने हाईजैक किया था तब भारत सरकार के आग्रह पर नेपाल ने 500 के नोट को बैन कर दिया था. भारत ने जब नोटबंदी की तो नेपाल में भी करोड़ों के 500 और 1000 के पुराने भारतीय नोट थे. अब तक इन पुराने नोटों का कोई समाधान नहीं निकल पाया है. ज़ाहिर है भारत के नोटबंदी के फ़ैसले से नेपाल को नुक़सान हुआ. लेकिन नेपाल ने अभी जो फ़ैसला लिया है उससे इस पर कोई असर नहीं पड़ेगा.''

नोटबंदी के कारण नेपाल और भूटान को काफ़ी नुक़सान हुआ था. भारतीय वित्त मंत्रालय ने अब तक दोनों देशों में मौजूद पुराने नोटों पर कुछ ठोस नहीं किया है.

कहा जा रहा है कि नेपाल ने जो अब फ़ैसला लिया है इसकी आशंका पहले से ही थी. नेपाल और भूटान से भारत का कोई औपचारिक समझौता नहीं है कि नेपाल में भारतीय मुद्रा लेन-देन के लिए वैध होगी.

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पहले भी थी पाबंदी

नेपाल के बाज़ार में पारंपरिक रूप से भारतीय नोट स्वीकार्य हैं. भारत में भी नेपाली नागरिकों के लिए नौकरी और कारोबार करने की छूट है. भारत के फ़ेमा क़ानून यानी फ़ॉरन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट के अनुसार नेपाल जाने वाला व्यक्ति अपने साथ 25 हज़ार की नक़दी लेकर जा सकता है.

नेपाल में 2014 तक 500 और 1000 के नोटों के लेन-देन पर पाबंदी थी. ऐसा भारत सरकार के आग्रह पर ही किया गया था. अगस्त 2015 में ये पाबंदी हटाई गई थी.

नवंबर 2016 में जब भारत ने 500 और 1000 के नोटों पर पाबंदी लगाई तो नेपाल और भूटान के केंद्रीय बैंकों ने पुराने नोटों को बदलने के लिए कहा. इसके लिए कई चरणों में बातचीत भी हुई लेकिन कोई औपचारिक फ़ैसला नहीं लिया जा सका.

समस्या ये थी कि दोनों देशों में मौजूद पुराने नोटों को अवैध नहीं कहा जा सकता था और वैध क़रार देने के लिए कोई ठोस आधार भी नहीं था क्योंकि भारतीय नोटों के चलन को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं था.

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1957 से ही भारत का एक रुपया नेपाल के 1.6 रुपए के बराबर है. यह क़ीमत नेपाल राष्ट्र बैंक और आरबीआई के बीच हुए समझौते में तय हुई थी. इसी साल अगस्त महीने में आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने नोटबंदी के आरबीआई के आंकड़ों को लेकर एक प्रेस कॉनफ़्रेंस में कहा था कि भूटान और नेपाल से पुराने नोटों को बदलने की संभावना बहुत कम है.

हालांकि पिछले साल नेपाली अधिकारियों ने कहा था कि आरबीआई ने मौखिक रूप से कहा है कि सभी नेपाली नागरिकों के 4500 रुपये तक कीमत के एक हज़ार और 500 के पुराने भारतीय नोट बदले जाएंगे. हालांकि भारत ने आज तक इस पर कोई औपचारिक रूप से बात नहीं की.

इसी साल जून महीने में द रॉयल मॉनेटरी अथॉरिटी (आरएमए) ऑफ़ भूटान ने अपने नागरिकों को सतर्क किया था कि भारतीय मुद्रा को जमा कर रखना जोखिम भरा हो सकता है और भविष्य में भारत सरकार के किसी फ़ैसले के कारण नुक़सान के लिए भूटान की सरकार ज़िम्मेदार नहीं होगी. आरएमए ने कहा था कि भारतीय नोट बैंक में रखें न कि नक़दी के रूप में अपने पास.

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नोटबंदी से कारोबार पर असर

आरएमए ने ये भी कहा था कि भूटानी नागरिक भारतीय रुपए लेते वक़्त सतर्क रहें. भारत से लगे भूटान के सीमाई इलाक़ों भारतीय रुपया लेनदेन के लिए वैध है.

नोटबंदी के बाद दोनों देशों के बीच कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ था. यहां तक कि पर्यटन पर भी बुरा असर पड़ा था.

अगस्त, 2017 में आरएमए ने नोटिस जारी कर ये भी कहा था कि 500 और 2000 के नोट भूटान में नहीं चलेंगे. हालांकि बाद में ये पाबंदी हटा दी गई लेकिन लोगों को इन नोटों को रखने के लेकर सतर्क किया गया है.

नेपाल के इस फ़ैसले को भारत से ख़राब होते संबंधों के आईने में भी देखा जा रहा है. इससे पहले नेपाल ने बिम्सटेक देशों के पुणे में आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यास में शामिल होने से इनकार कर दिया था और 17 से 28 सितंबर तक चीन के साथ 12 दिनों का सैन्य अभ्यास किया था.

नेपाल एक लैंडलॉक्ड देश है और वो भारत से अपनी निर्भरता कम करना चाहता है. 2015 में भारत की तरफ़ से अघोषित नाकेबंदी की गई थी और इस वजह से नेपाल में ज़रूरी सामानों की भारी किल्लत हो गई थी. तब से दोनों देशों के बीच संबंधों में वो भरोसा नहीं लौट पाया है.

नेपाल पर भारत का प्रभाव दशकों से रहा है. दोनों देशों के बीच खुली सीमा है, बेशुमार व्यापार है, एक धर्म है और रीति रिवाज़ भी एक जैसे हैं. दोनों देशों के बीच बिगड़ते संबंधों को लेकर जब बात होती है तो चीन का ज़िक्र ज़रूरी रूप से होता है.

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