आईएस से टकराए अमरीकी अधिकारी ने दिया इस्तीफा

  • 23 दिसंबर 2018
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Image caption ब्रेट मैकगर्क (बाईं तरफ)

राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के सीरिया से अमरीकी सेना को वापस बुलाने के फ़ैसले का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है.

अमरीका के एक उच्च अधिकारी और सीरिया में इस्लामिक स्टेट के ख़िलाफ़ जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ब्रेट मैकगर्क ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

ब्रेट मैकगर्क सीरिया में आईएस के ख़ात्में के मकसद के लिए बनाए गए वैश्विक गठबंधन में अमरीका के विशेष दूत थे.

रिपोर्टों के मुताबिक मैकगर्क राष्ट्रपति ट्रंप के फ़ैसले से खुश नहीं थे और वे चाहते थे कि सीरिया में अमरीकी सेना की मौजूदगी बरकरार रहे.

इससे पहले अमरीका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने भी गुरुवार को अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी थी.

जेम्स मैटिस भी सीरिया से अमरीकी सैन्य टुकड़ियों को वापस बुलाने से नाराज़ थे. साथ ही वे अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की संख्या कम करने के फ़ैसले का भी विरोध कर रहे थे.

मैकगर्क को साल 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में सीरिया में तैनात किया गया था. वे एक अनुभवी राजदूत रहे हैं.

दिसंबर की शुरुआत में उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि वे सीरिया में बने रहना चाहते हैं जिससे इस क्षेत्र के हालात पर काबू रख सकें.

क्यों दिया इस्तीफ़ा?

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार मैकगर्क ने अपने इस्तीफ़े में लिखा है कि सीरिया में आईएस के चरमपंथी हार की कगार पर हैं लेकिन पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं.

उन्होंने लिखा है कि सीरिया से अमरीकी फ़ौज को हटाने से वहां एक बार फिर आईएस अपना सिर उठाने लगेगा.

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार अपने स्टाफ के नाम जारी किए ईमेल में मैकगर्क ने लिखा है कि वे ट्रंप के फ़ैसले से हैरान हैं.

इस ईमेल में उन्होंने लिखा है, ''मैं समझता हूं कि अब मैं राष्ट्रपति के इस नए आदेश का पालन नहीं कर सकता.''

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ट्रंप का रुख़

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने बुधवार को यह घोषणा की थी कि सीरिया में मौजूद दो हज़ार सैनिकों को वापस बुला लिया जाएगा क्योंकि अब आईएस पूरी तरह समाप्त हो चुका है.

ट्रंप ने मैकगर्क के इस्तीफे पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

हालांकि शनिवार तक भी राष्ट्रपति ट्रंप अपने फ़ैसले पर अडिग थे और उनका मानना था कि आईएस पूरी तरह खत्म हो चुका है.

इस बीच अमरीका के तमाम नेता भी ट्रंप के इस फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं. इसमें कई वरिष्ठ रिपब्लिकन नेता भी शामिल हैं.

साथ ही कई विदेशी ताकतों ने भी माना है कि ट्रंप के इस फ़ैसले से आईएस को दोबारा खड़ा होने का मौका मिल जाएगा.

कुर्द नेतृत्व वाले एक गठबंधन सीरिया डेमोक्रेटिक फ़ोर्सेस (एसडीएफ़) ने भी आईएस की वापसी की चेतावनी दी है.

हाल ही में अमरीका ने एक रिपोर्ट जारी की थी जिसमें बताया गया था कि सीरिया में अभी भी 14 हज़ार आईएस चरमपंथी मौजूद हैं, इसके अलावा कई आईएस चरमपंथी इराक़ में हैं.

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सीरिया में क्यों है अमरीका की मौजूदगी?

अमरीकी थल सैनिक पहली बार साल 2015 में सीरिया पहुंचे थे. उस समय राष्ट्रपति बराक ओबामा ने विशेष बल के कुछ सैनिकों को सीरिया भेजा था.

इनका मकसद आईएस के ख़िलाफ़ लड़ रहे कुर्द लड़ाकों को ट्रेनिंग और सलाह देना था.

अमरीका ने आईएस के ख़िलाफ़ लड़ने वाले समूहों को हथियार मुहैया भी कराए.

इसके बाद साल दर साल सीरिया में अमरीकी सैनिकों की संख्या बढ़ती चली गई, जो मौजूदा वक़्त में दो हज़ार तक पहुंच चुकी है.

हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि यह संख्या इससे भी अधिक है.

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इस दौरान अमरीकी सेना ने सीरिया के उत्तर-पूर्वी इलाके में सैन्य अड्डों और हवाई पट्टियों का नेटवर्क तैयार किया है.

साथ ही अमरीका आईएस और अन्य चरमपंथियों के ख़िलाफ़ हवाई हमले करने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन का हिस्सा भी रह चुका है.

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