कश्मीर की मुठभेड़ पर क्या कहना है उर्दू प्रेस का

  • 23 दिसंबर 2018
भारतीय सेना इमेज कॉपीरइट BBC/MOHIT KANDHARI

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते भारत प्रशासित कश्मीर में नागरिकों की मौत, तालिबान और अमरीका की बातचीत, आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले की चौथी बरसी से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं.

सबसे पहले बात भारत प्रशासित कश्मीर की.

भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा ज़िले में सेना की फ़ायरिंग में सात कश्मीरी नौजवान मारे गए थे. भारतीय सेना का कहना था कि पुलवामा में चरमपंथियों और सेना के बीच हुई एक मुठभेड़ में तीन चरमपंथी और सेना के एक जवान की मौत हो गई थी.

स्थानीय लोग इस मुठभेड़ के विरोध में सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे. सेना के अनुसार भीड़ सुरक्षाकर्मियों के बिल्कुल क़रीब आ गई थी जिसके कारण उन्हें गोली चलानी पड़ी और सात नौजवान मारे गए.

इस ख़बर को पाकिस्तान के सारे उर्दू अख़बारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है.

अख़बार जंग ने लिखा है, ''भारतीय सेना की हिंसक कार्रवाई में 11 कश्मीरी शहीद.''

अख़बार के अनुसार पुलवामा ज़िले में सर्च ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना ने पहले तो तीन कश्मीरी नौजवानों को 'शहीद' किया और फिर इसके विरोध में सड़कों पर निकलने वाले निहत्थे नौजवानों पर गोली चलाकर आठ और कश्मीरी नौजवानों को मार दिया.

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अख़बार ने 'सुलगता कश्मीर' के नाम से संपादकीय भी लिखा है. अख़बार लिखता है कि भारतीय शासकों और उसकी सेना की कथित बर्बरता कश्मीर की जन्नत जैसी वादियों और उसके वासियों को सुलगा रही है.

अख़बार आगे लिखता है कि ''कोई दिन ऐसा नहीं गुज़रता कि मज़लूम निहत्थे नागरिकों का ख़ून न बहे. लेकिन हर गुज़रता दिन और हर नई शहादत कश्मीरियों के आज़ादी के जज़्बे में एक नई रूह फूंक रही है, जबकि हठधर्मी भारत कश्मीरियों के स्वातंत्रता के अधिकार को मानने से इनकार करता रहा है और ताक़त और ज़ुल्म की बिना पर निहत्थे और मासूम नागरिकों पर अपना आधिपत्य क़ायम रखना चाहता है.''

अख़बार नवा-ए-वक़्त ने सुर्ख़ी लगाई है, ''गोलियों से बहादुर हुर्रियतपसंदों को दबाया नहीं जा सकता.''

अख़बार के अनुसार सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने कहा है कि ''गोलियां कभी भी आज़ादी के लिए लड़ने वाले निहत्थे बहादुर नागरिकों को नहीं रोक सकतीं हैं.''

आर्मी पब्लिक स्कूल पर हमले की चौथी बरसी

पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल पर हुए चरमपंथी हमले के चार साल पूरे हो गए. 16 दिसंबर 2014 को हुए इस हमले में 132 स्कूली बच्चे समेत कुल 144 लोग मारे गए थे.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार इस घटना की चौथी बरसी पर पेशावर समेत पाकिस्तान के कई इलाक़ों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए थे. इस अवसर पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा, ''शिक्षा ही वो हथियार है जिसकी बदौलत हम दहशतगर्दी को हमेशा के लिए मात दे सकते हैं.''

अख़बार के अनुसार पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी ने कहा, ''आज के दिन पूरी क़ौम को इस बात की प्रतिज्ञा लेनी चाहिए कि पाकिस्तान में दहशतगर्दी का रास्ता हमेशा के लिए रोकने के लिए हर तरह की क़ुर्बानी के लिए तैयार रहेगी.

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Image caption पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल में हमले के बाद का मंज़र

अमरीका और तालिबान में बातचीत

अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान तालिबान आपस में बातचीत कर रहे हैं. पाकिस्तान की मदद से ये वार्ता अबु धाबी में हो रही है.

अख़बार दुनिया के अनुसार अमरीका ने तालिबान से अपील की है कि वो छह महीने के लिए अपनी ओर से युद्धबंदी की घोषणा कर दें और अफ़ग़ानिस्तान की आंतरिक सरकार में शामिल हो जाएं.

अख़बार आगे लिखता है कि तालिबान ने अमरीका की इस पेशकश को ठुकरा दिया है. तालिबान के प्रवक्ता के अनुसार सीज़फ़ायर या अफ़ग़ान चुनाव के बारे में अमरीका से कोई बातचीत नहीं हुई है.

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अख़बार के अनुसार पाकिस्तान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधि भी इस बातचीत में शामिल हुए थे. अमरीकी प्रतिनिधि ज़िल्मे ख़लीलज़ाद ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाल करने की दिशा में बहुत सकारात्मक बातचीत हुई.

अख़बार के अनुसार अबु धाबी में बातचीत समाप्त होने के बाद ज़ल्मे ख़लीलज़ाद इस्लामाबाद पहुंचे और पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल क़मर बाजवा से भी मुलाक़ात की.

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