नसीरुद्दीन शाह पर पाकिस्तान में जिन्ना क्यों याद आए

  • 23 दिसंबर 2018
नसीरुद्दीन शाह इमेज कॉपीरइट Getty Images

जाने-माने अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के एक बयान को लेकर भारत में उनके विरोध और समर्थन में विवाद बढ़ा तो उसका असर अब पड़ोसी पाकिस्तान में भी दिख रहा है.

नसीरुद्दीन शाह ने इसी हफ़्ते देश में उन्मादी भीड़ के हाथों मारे जा रहे निर्दोष लोगों पर चिंता ज़ाहिर की थी.

नसीर ने कहा था कि ऐसा माहौल देख उन्हें चिंता होती है कि कहीं उनकी औलाद से कोई यह न पूछ दे कि वो हिन्दू है या मुसलमान. उन्होंने कहा था, ''मेरे बच्चे ख़ुद को क्या बताएंगे क्योंकि उन्हें तो धर्म की तालीम ही नहीं दी. मुझे इस माहौल से डर नहीं लगता बल्कि ग़ुस्सा आता है.''

नसीरुद्दीन के इस बयान पर देखते-देखते हंगामा खड़ा हो गया. बीजेपी के राज्यसभा सांसद राकेश सिन्हा ने ट्वीट कर कहा कि नसीरुद्दीन देश को बदनाम कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर कई लोग नसीर को पाकिस्तान चले जाने की सलाह देने लगे. हालांकि कई लोगों ने नसीर का समर्थन भी किया. वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता ने नसीर का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी चिंता बिल्कुल जायज़ है.

इमेज कॉपीरइट Getty Images

विवाद बढ़ा तो नसीर फिर सामने आए और कहा कि उन्होंने अपनी चिंता ज़ाहिर की थी और ऐसा करना कोई देशद्रोह नहीं होता. शाह ने कहा कि वो उस देश के प्रति चिंचा ज़ाहिर कर रहे थे, जिससे वो मोहब्बत करते हैं, यह जुर्म कैसे हो सकता है.

नसीरुद्दीन के इस बयान को लेकर भारत में प्रतिक्रिया की झड़ी लग गई. योग गुरु से कारोबारी बने रामदेव ने कहा कि ऐसे बोलने से भारत का गौरव दुनिया भर में कम होता है. बीजेपी समर्थक और जाने-माने अभिनेता अनुपम खेर ने भी नसीर के बयान का विरोध किया.

अजमेर में लिटरेचल फ़ेस्टिवल के आयोजकों ने बढ़ते विवाद को देखते हुए नसीरुद्दीन शाह से कह दिया कि वो यहां आने से बचें क्योंकि तोड़फोड़ का सामना करना पड़ सकता है.

हालांकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आयोजकों ने नसीर से ऐसा कहा. गहलोत ने कहा कि प्रशासन उनकी सुरक्षा के लिए पूरी तरह से मुस्तैद था.

भारत में नसीर को लेकर विवाद बढ़ ही रहा था कि पाकिस्तान भी इसमें कूद गया. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने शनिवार को लाहौर में कह दिया कि जिन्ना ने जो कहा था वो बिल्कुल सही बात थी कि भारत में मुसलमानों को बराबर का अधिकार नहीं मिलेगा इसलिए वो पाकिस्तान चाहते हैं.

पीएम ख़ान ने यहां तक कह दिया कि वो प्रधानमंत्री मोदी को बताएंगे कि अल्पसंख्यकों के साथ कैसा व्यवहार किया जाता है.

पाकिस्तानी मीडिया में नसीरुद्दीन शाह से जुड़े इस विवाद के हर पहलू को कवर किया गया है.

पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार हामिद मीर ने ट्वीट कर कहा, ''आमिर ख़ान. शाहरुख़ ख़ान और नसीरुद्दीन शाह. कई धर्मनिरपेक्ष और उदार मुस्लिम भारत में ख़ुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. इन लोगों के ख़िलाफ़ नफ़रत और प्रॉपगैंडा फैलाया जा रहा है. दरअसल, 1947 में मोहम्मद अली जिन्ना ने जो किया ये उसी की पुष्टि है.''

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने भी हामिद मीर की ही बात को आगे बढ़ाते हुए कहा है, ''क़ायदे आज़म मोहम्मद अली जिन्ना कांग्रेस के बड़े नेता थे. वो बहुत अक्लमंद थे. वो हिन्दू-मुसलमानों की एकता की बात करते थे. जिन्ना इसलिए अलग हुए क्योंकि उनको अहसास होने लगा था कि कांग्रेस जो हिन्दुस्तान मांग रही है, उसमें मुसलमानों के बराबर नहीं समझा जाएगा. इस वजह से पाकिस्तान के लिए आंदोलन चलाया. वो दोयम दर्जे के नागरिक बनकर नहीं रहना चाहते थे. आज जो नसीरुद्दीन शाह कह रहे हैं, वही बात क़ायदे आज़म तब कह रहे थे.''

इमरान ख़ान के इस बयान को पाकिस्तानी अख़बारों ने प्रमुखता से छापा है.

इमरान ख़ान के जवाब में बीजेपी सांसद राकेश सिन्हा ने एक और ट्वीट किया और कहा, ''इमरान ख़ान पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान में हिन्दू 23 फ़ीसदी से पिछले 70 सालों में एक फ़ीसदी हो गए हैं और भारत में मुसलमान 9 फ़ीसदी से 14 फ़ीसदी हो गए हैं.''

इमरान ख़ान की इस टिप्पणी पर नसीरुद्दीन शाह ने भी कहा कि इमरान अपने मुल्क की चिंता करें और टिप्पणी ना करें क्योंकि भारत में लोकतंत्र है और अपने मुद्दों को ख़ुद ही सुलझा लेंगे.

हामिद मीर के ट्वीट पर कई लोगों समर्थन किया है तो कई लोगों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. मोहम्मद अयाज़ नाम के यूज़र ने हामिद मीर का समर्थन करते हुए कहा है कि भारत एक हिन्दू राष्ट्र है और यह कोई धर्मनिरपेक्ष देश नहीं है.

इसके जवाब में श्री आर ने ट्वीट किया है, ''यही लोकतंत्र है कि नसीर ने जो महसूस किया उसे कह दिया. मोम्मद अली जिन्ना ने 1947 में जो किया उसे आप अच्छी तरह से जानते होंगे क्योंकि आप पाकिस्तान में हैं.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए