इंडोनेशिया में बिना भूकंप के ही कैसे आई सुनामी

  • 23 दिसंबर 2018
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ज्वालामुखियों की तस्वीरें कैमरे के क़ैद करने वाले ऑस्टिन एंडरसन उस समय जावा द्वीप के पश्चिमोत्तर तट पर थे, जब ख़तरनाक सुनामी ने शनिवार की रात इंडोनेशिया में तबाही मचाना शुरू किया.

एंडरसन ने बीबीसी को बताया कि ताज्जुब इस बात का था कि भूंकप नहीं आया लेकिन समंदर में कई मीटर ऊँची लहरें उठने लगी. ऐसी ही दो लहरें जावा द्वीप की तरफ भी बढ़ीं.

उन्होंने कहा, "अचानक मैंने देखा कि ये लहरें तेज़ी से बढ़ रही हैं और जान बचाने के लिए मुझे वहाँ से भागना होगा. दो लहरें थी, पहली वाली तो इतनी ताक़तवर नहीं थी, उससे मैं आसानी से बच गया."

दूसरी लहर बेहद ख़तरनाक थी और इसने ऐसी तबाही मचाई कि दर्जनों लोग मौत के आगोश में चले गए, जबकि सैकड़ों जख़्मी हो गए. मकानों को कोई पहचान नहीं सकता था, जहाँ-तहाँ कारें, गाड़ियां मलबे में दबी पड़ी थी.

इंडोनेशिया के अधिकारियों का कहना है कि इसमें कम से कम 168 लोग मारे गए हैं. जावा और सुमात्रा में कई समुद्री तटों के पानी से तबाही आई है.

सरकार का कहना है कि कम से कम 700 लोग जख़्मी हुए हैं और कई लोग लापता हैं. प्रभावित इलाक़ों में अब भी आपातकालीन सेवाएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. इंडोनेशिया के सुंडा स्ट्रेट (खाड़ी) के आसपास के तटीय इलाक़ों में दर्जनों लोग मारे गए थे.

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सूनामी की तबाही

वैसे पहले भी इंडोनेशिया में सुनामी आई है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, लेकिन इस बार क्योंकि भूकंप आया ही नहीं था, इसलिए प्रशासन के सूनामी की चेतावनी देने का सवाल भी नहीं उठता.

अनाक क्रेकाटोआ ज्वालामुखी में शुक्रवार और शनिवार को कुछ विस्फोट ज़रूर रिकॉर्ड किए गए थे. एंडरसन बताते हैं, "इन ख़तरनाक लहरों के तट पर पहुँचने से पहले, किसी तरह की हलचल (ज्वालामुखीय) नहीं थी, चारों तरफ़ अंधेरा ही अंधेरा था."

ऊंची लहर का पहला झटका स्थानीय समयानुसार रात के साढ़े नौ बजे लगा.

विशेषज्ञ अभी ये पता लगा रहे हैं आख़िर सुनामी आने का असल वजह क्या थी, लेकिन शुरुआती अनुमानों में कहा जा रहा है कि क्रेकाटोआ ज्वालामुखी के फटने के बाद सोंडा खाड़ी में पानी के भीतर हुए भूस्खलन की वजह से सूनामी आई. सोंडा खाड़ी जावा और बोर्नियो द्वीपों को अलग करती है.

इंडोनेशिया की आपदा नियंत्रण एजेंसी के प्रमुख सुतोपो पूर्वो नूग्रोहो ने सुनामी आने से पहले रिकॉर्ड की गई भूगर्भीय गतिविधियों के आधार पर ये अनुमान जताया है.

उन्होंने कहा कि पहली वजह तो क्रेकाटोआ ज्वालामुखी में विस्फोट के बाद पानी के भीतर भूस्खलन होना रहा और दूसरी वजह रही पूर्णिमा के कारण समंदर में हाई टाइड यानी लहरों का ऊंचा उठना.

लेकिन फोटोग्राफर एंडरसन याद करते हुए कहते हैं कि जब लहरें तट की तरफ़ आ रही थी तो ज्वालामुखी शांत था.

सूनामी क्या है?

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समुद्र के भीतर अचानक जब बड़ी तेज़ हलचल होने लगती है तो उसमें उफान उठता है. इससे ऐसी लंबी और बहुत ऊंची लहरों का रेला उठना शुरू हो जाता है जो ज़बरदस्त आवेग के साथ आगे बढ़ता है.

इन्हीं लहरों के रेले को सूनामी कहते हैं. दरअसल सूनामी जापानी शब्द है जो सु और नामी से मिल कर बना है. सु का अर्थ है समुद्र तट और नामी का अर्थ है लहरें.

पहले सुनामी को समुद्र में उठने वाले ज्वार के रूप में भी लिया जाता रहा है लेकिन ऐसा नहीं है. दरअसल समुद्र में लहरे चाँद-सूरज और ग्रहों के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से उठती हैं, लेकिन सुनामी लहरें इन आम लहरों से अलग होती हैं.

नूग्रोहो का कहना है कि आमतौर पर इस शांत खाड़ी में सूनामी नहीं आती, और न ही क्रेकाटोआ ज्वालामुखी में बड़े विस्फोट होते रहे हैं. कुछ कम तीव्रता के भूकंप इस इलाक़े में ज़रूर आते रहे हैं.

नूग्रोहो ने बताया, "भूकंप की वजह से सुनामी नहीं आई है. सुनामी की असल वजह का पता करने में मुश्किल यही है, क्योंकि भूकंप नहीं आया."

ज्वालामुखी विशेषज्ञ जेस फिनिक्स ने बीबीसी से कहा कि जब ज्वालामुखी फटता है तो बेहद गर्म मैग्मा पानी के अंदर भारी हलचल पैदा करता है. ये समंदर के भीतर चट्टान को तोड़ सकता है, जिससे कभी-कभी बड़ा भूस्खलन हो सकता है.

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क्योंकि क्रेकाटोआ ज्वालामुखी का कुछ हिस्सा पानी के अंदर है तो संभव है कि पानी के अंदर भूस्खलन हुआ हो. अगर ये भूस्खलन बड़ा होगा तो बड़ी मात्रा में पानी को खिसकाने की क्षमता रखता है और ये सुनामी में तब्दील हो सकता है.

सभी सुनामी की तरह लहरों को तट तक पहुँचने में मिनटों या फिर घंटों का समय लग सकता है. चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण और पूर्णिमा के कारण लहरें और ताक़तवर हो गई होंगी. ये भी सच है कि क्रेकाटोआ ज्वालामुखी पिछले कुछ महीनों में अधिक सक्रिय हुआ है.

इंडोनेशिया की भूगर्भीय एजेंसी का कहना है कि शुक्रवार को ज्वालामुखी में दो मिनट 12 सेकेंड तक विस्फोट हुआ और तकरीबन 400 मीटर राख का बादल आसमान में देखा गया. शनिवार को भी कुछ गतिविधियां देखने को मिली.

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अगस्त 1883 में इंडोनेशिया में क्रेकाटोआ ज्वालामुखी ने भारी तबाही मचाई थी. तब 41 मीटर ऊँची सुनामी आई थी और 30 हज़ार से अधिक लोग मारे गए थे. ये विस्फोट इतने जबर्दस्त थे कि इनकी ताक़त 1945 में जापान के हिरोशिमा शहर पर गिराए गए परमाणु बम से 13,000 गुना अधिक थी.

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