नवाज़ शरीफ़ को सात साल की जेल, पाकिस्तानी अदालत ने सुनाया फ़ैसला

  • 24 दिसंबर 2018
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को भ्रष्टाचार निरोधी एक अदालत (नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो) ने अल-अज़ीज़िया स्टील मिल्स मामले में सात साल की सज़ा सुनाई है.

हालाँकि फ़्लैगशिप इन्वेस्टमेंट मामले में एक और अदालत ने नवाज़ शरीफ़ को बरी कर दिया है.

इससे पहले, जुलाई में एक अन्य मामले में कोर्ट ने नवाज़ शरीफ़, उनकी बेटी और दामाद को सज़ा सुनाई थी और जेल भेज दिया था. नवाज़ की ग़ैरमौजूदगी में उनकी पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने शाहबाज़ शरीफ़ के नेतृत्व में आम चुनाव लड़े थे, लेकिन उसे इमरान ख़ान की पार्टी के हाथों शिकस्त मिली थी.

दिलचस्प है कि इमरान ख़ान के प्रधानमंत्री बनने के कुछ दिन बाद ही सितंबर में इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने नवाज़ को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए थे.

इस नए मामले में फ़ैसले से एक दिन पहले रविवार को नवाज़ शरीफ़ लाहौर से इस्लामाबाद आ गए थे. नेशनल काउंटिबिलिटी कोर्ट ने खचाखच भरे कोर्टरूम में ये फ़ैसला सुनाया.

अदालत ने आय से अधिक संपत्ति मामले में ये फ़ैसला सुनाया है. कोर्ट ने नवाज़ को विदेशों में घोषित आय से अधिक निवेश करने का दोषी ठहराया.

इससे पहले, पूर्व सत्तारूढ़ पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने चेतावनी दी थी कि अगर उनके नेता नवाज़ शरीफ़ को फिर से जेल भेजा गया तो वो बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेंगे और संसद भी नहीं चलने देंगे.

अल-अज़ीज़िया स्टील मिल्स और फ़्लैगशिप इन्वेस्टमेंट मामला क्या है?

अल-अज़ीज़िया स्टील मिल्स नवाज़ शरीफ़ के पिता मियां मोहम्मद शरीफ़ ने 2001 में सऊदी अरब में स्थापित की थी जिसका कामकाज नवाज़ शरीफ़ के बेटे हुसैन नवाज़ देख रहे थे.

शरीफ़ ख़ानदान की ओर से दलील में कहा गया कि स्टील मिल लगाने के लिए कुछ पैसा सऊदी सरकार से लिया गया था.

हालांकि, एनएबी के वकीलों का कहना है कि शरीफ़ परिवार के दावे किसी भी दस्तावेज़ी सबूत से साबित नहीं होते और ये नहीं पता चल पाया कि मिल के लिए रक़म कहां से आई. उनका दावा है कि शरीफ़ ख़ानदान ने पाकिस्तान से ग़ैर-क़ानूनी तौर पर रक़म हासिल करके इस मिल में पैसा लगाया.

हुसैन नवाज़ का कहना है कि उन्हें अपने दादा से 50 लाख डॉलर से अधिक रक़म मिली थी जिसकी मदद से उन्होंने अल-अज़ीज़िया स्टील मिल्स क़ायम की. उनके मुताबिक़ इस मिल के लिए अधिकतर पैसा क़तर के शाही ख़ानदान की ओर से मोहम्मद शरीफ़ के निवेदन पर दिया गया.

इस मामले की जांच के लिए बनाई गई ज्वाइंट इन्वेस्टिगेशन टीम के मुताबिक़ अल-अज़ीज़िया स्टील मिल के असली मालिक नवाज़ शरीफ़ ख़ुद हैं.

एनएबी के अधिकारियों का नवाज़ शरीफ़ के ख़िलाफ़ दावा है कि उन्होंने हुसैन नवाज़ की कंपनियों से बड़ा लाभ कमाया है जिससे ये पता चलता है कि वह असल मालिक हैं न कि उनके बेटे.

ये भी ध्यान रहे कि इस मामले की सुनवाई के दौरान एनएबी के अधिकारी इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई दस्तावेज़ी सबूत देने में असमर्थ रहे हैं.

नवाज़ के कोर्ट के चक्कर

नवाज़ शरीफ़ का परिवार कोर्ट में भ्रष्टाचार के कई मामलों का सामना कर रहा है. इसमें मनी लॉन्डरिंग, टैक्स चोरी और विदेशों में संपत्ति छुपाने के मामले शामिल हैं.

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सितंबर 2017 से अब तक नवाज़ शरीफ़ अदालत में 165 बार पेश हो चुके हैं. 28 जुलाई, 2017 को पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ शरीफ़ को प्रधानमंत्री के पद से अयोग्य ठहरा दिया था.

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तीन जानकारियां फ़ाइल करने का निर्देश दिया था. नवाज़ शरीफ़ के परिवार से जुड़ी संपत्तियां, अल-अज़ीज़िया और फ़्लैगशिप इन्वेस्टेमेंट से जुड़े सभी दस्तावेज़ जमा करने के निर्देश दिए गए थे.

सितंबर 2017 में नेशनल अंकाउंटिबिलिटी ब्यूरो (एनएबी) ने नवाज़ शरीफ़ के परिवार के ख़िलाफ़ तीनों जानकारियां सौंप दिए थे. इसी साल जुलाई महीने में एनएबी जज मोहम्मद बशीर ने नवाज़ शरीफ़, बेटी मरियम और दामाद मोहम्मद सफदर को सज़ा सुनाई थी.

अदालत ने नवाज़ शरीफ़ को दस साल, मरियम नवाज़ को सात साल की सज़ा सुनाई थी. अदालत ने मरियम नवाज़ पर बीस लाख पाउंड (लगभग पौने दो करोड़ भारतीय रुपए) का जुर्माना भी लगाया था.

19 सिंतबर को इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने तीनों की सज़ा को निलंबित करते हुए ज़मानत दे दी थी.

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