बांग्लादेश चुनावः शेख हसीना की एकतरफ़ा जीत, विपक्ष को केवल सात सीटें

  • 31 दिसंबर 2018
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  • प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी ने लगातार तीसरी बार चुनावों में जीत हासिल की है. वह 2009 से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं.
  • बांग्लादेश का मुख्य विपक्षी दल बीएनपी इस चुनाव में जातीय ओइक्यो फ़्रंट का हिस्सा था. विपक्ष ने कुल सात सीटों पर जीत दर्ज की है.
  • बीएनपी प्रमुख ख़ालिदा ज़िया चुनाव नहीं लड़ पाई क्योंकि वह भ्रष्टाचार के मामले में जेल में हैं.
  • विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व 81 वर्षीय वकील कमाल हुसैन कर रहे थे.
  • कमाल हुसैन ने देश का संविधान तैयार किया था और वह चुनाव में नहीं खड़े हुए थे.
  • रविवार को चुनाव के दौरान हिंसा की विभिन्न घटनाओं में 17 लोग मारे गए.

बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने लगातार तीसरी बार आम चुनावों में जीत दर्ज की है.

हसीना की सत्तारुढ़ पार्टी आवामी लीग ने 350 संसदीय सीटों में से 281 पर जीत दर्ज की है और उन्होंने पिछले चुनावों से अधिक सीटें जीती हैं.

वहीं, बांग्लादेश के विपक्षी दलों ने रविवार को हुए आम चुनावों की निंदा की है और इसे 'हास्यास्पद' बताया है. विपक्षी दलों ने फिर से मतदान कराने की मांग की है. विपक्ष ने कुल सात सीटों पर जीत दर्ज की है.

आम चुनावों में भारी धांधली के आरोप लगाए जा रहे हैं. बीबीसी के एक संवाददाता ने भी एक मतदान केंद्र पर मतदान शुरू होने से पहले ही भरी हुई मतपेटियों को देखा था.

विपक्षी नेता कमाल हुसैन ने कहा, "हम चुनाव आयोग से गुज़ारिश करते हैं कि इन हास्यास्पद नतीजों को अमान्य कर दें. हम मांग कर रहे हैं कि जितनी जल्दी संभव हो, एक निष्पक्ष सरकार की देखरेख में फिर से चुनाव कराए जाएं."

बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि उसने देशभर में फर्ज़ी मतदान के आरोपों के बारे में सुना है और वो इसकी जाँच कराएगा.

ख़बरों के मुताबिक़, रविवार को हुए मतदान में सत्तारुढ़ और विपक्षी दलों के बीच हिंसक झड़पों में 17 लोगों की मौत हुई है.

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क्या हैं आरोप?

शेख़ हसीना के नेतृत्व वाली पार्टी आवामी लीग साल 2008 से बांग्लादेश में शासन कर रही है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी लगातार उस पर फर्ज़ी मतदान के बल पर जीतने के आरोप लगाती रही है.

बीएनपी के एक प्रवक्ता ने कहा, "300 में से 221 सीटों पर गड़बड़ी हुई है."

जैसे ही रविवार को मतदान शुरू हुआ, बीबीसी के एक संवाददाता ने वहाँ के चटगांव के एक मतदान केंद्र पर चुनाव मतपत्रों से भरी मतपेटियां देखी. हालाँकि पीठासीन अधिकारी ने इस बारे में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.

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बांग्लादेश के इस दूसरे सबसे बड़े शहर के कई मतदान केंद्रों पर सिर्फ़ सत्तारूढ़ पार्टी के चुनाव एजेंट ही पूरे समय मौजूद रहे. मतदान प्रक्रिया ख़त्म होने से पहले ही मुख्य विपक्षी गठबंधन के कम से कम 28 उम्मीदवार ये कहते हुए मतदान केंद्रों से चले गए थे कि वहाँ गड़बड़ियां हो रही हैं.

चुनाव पर्यवेक्षकों और विपक्षी दलों ने पहले ही आशंका जता दी थी कि चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे, लेकिन सत्तारूढ़ दल का कहना है कि विपक्षी झूठे आरोप लगा रहा है.

शेख़ हसीना ने शुक्रवार को बीबीसी से कहा था, "एक तरफ वे हम पर आरोप लगा रहे हैं और दूसरी तरफ़ हमारे कार्यकर्ताओं और नेताओं पर हमला कर रहे हैं."

ख़ौफ़ में हैं लोग

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बांग्लादेश में मौजूद बीबीसी संवाददाता योगिता लिमये का कहना है कि मतदान केंद्रों पर एक बात साफ़ नज़र आ रही थी कि जो लोग प्रधानमंत्री शेख़ हसीना के समर्थक हैं, वो खुलकर बोल रहे थे और हर सवाल का जवाब दे रहे थे. वो कैमरे पर बता रहे थे कि उन्होंने किन मुद्दों पर शेख़ हसीना के समर्थन में वोट किया है, लेकिन अन्य लोग बात करने में भी डर रहे थे.

एक व्यक्ति ने उन्हें बताया कि उसके परिवार के कई लोगों ने उन्हें बताया कि जब वो मतदान केंद्रों पर पहुँचे तो उन्हें पता चला कि उनके वोट पहले ही पड़ चुके हैं.

उस व्यक्ति ने माना कि वो नहीं मानते कि ये निष्पक्ष चुनाव है, लेकिन वो अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं करना चाहते.

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