चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्यों कहा, 'जंग के लिए तैयार रहे सेना'

  • 5 जनवरी 2019
चीनी सेना इमेज कॉपीरइट EPA

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि देश आज संकट का सामना कर रहा है और पीपल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए को युद्ध की स्थिति के लिए तैयार रहना होगा.

शुक्रवार को सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (सीएमसी) की बीजिंग में हुई एक बैठक में कमीशन के चेयरमैन शी जिनपिंन ने आला अधिकारियों को चेताया कि देश में कई तरह के ख़तरे बढ़ रहे हैं.

द ग्लोबल टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार शुक्रवार हुई बैठक में शी जिनपिंग ने कहा, "दुनिया में ऐसे बदलाव हो रहे हैं जैसे बीते एक सदी में भी नहीं हुए थे और चीन अब भी वैसी स्थिति में है जब उसके लिए विकास के रणनीतिक अवसर महत्वपूर्ण हैं."

अख़बार का कहना है कि उन्होंने सैनिकों की ट्रेनिंग के लिए ज़रूरी एक आदेश पर भी दस्तख़त किए हैं.

वहीं साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार जिनपिंग ने कहा, "सभी सैन्य टुकड़ियों को सही मायनों में राष्ट्रीय ख़तरों को और विकास की धारा को समझना होगा और हर तरह की हालात के लिए तैयार रहना होगा."

इमेज कॉपीरइट AFP/Getty Images

युद्ध के लिए तैयारी की क्या है वजह

'द ग्लोबल टाइम्स' ने रक्षा मामलों के जानकार सोंग ज़ोंगपिंग के हवाले से लिखा है कि इस आदेश में कहा गया है कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी की सभी टुकड़ियों को चीन की स्थापना दिवस की 70वीं वर्षगांठ के अवसर पर थियानमेन चौक में सैन्य परेड होगी जिसमें पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की सही युद्ध क्षमता का प्रदर्शन किया जाएगा.

उनका कहना था कि इस मौक़े पर ऐसी सेना की झलक मिलेगी जो युद्ध जीतने की क्षमता रखती हो.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार चीन दक्षिण चीन सागर में अपनी मौजूदगी ही नहीं नियंत्रण भी बढ़ाना चाहता है और साथ ही अमरीका के साथ व्यापार के मुद्दों को लेकर और ताइवान के साथ भी चीन के रिश्ते तनावग्रस्त हैं.

चीन और अमरीका दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और दुनिया का बाज़ार पर अपने अधिकार के लिए एक तरह की परोक्ष लड़ाई में लगे हैं. दोनों एक दूसरे से होने वाले आयातों पर अतिरिक्त शुल्क लगा रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप बीते साल 1 दिसंबर को हुई जी20 देशों के सम्मेलत ने दौरान

शी जिनपिंग ने बैठक में कहा, "आपातस्थिति में सेना तुरंत हरकत में आए इसके लिए उसे तैयार रहना होगा. हमें साझा अभियानों की क्षमता भी बढ़ानी होगी और युद्ध के नए तरीकों के लिए तैयार रहना होगा."

ऐसा दूसरी बार है जब चीन का सेंट्रल मिलिट्री कमीशन सैन्य इकाइयों के बीच सार्वजनिक गतिविधि करा रहा है. इससे पहले, पिछले साल 3 जनवरी को पहली बार ऐसी एक्टिविटी हुई थी.

हालाँकि रक्षा विशेषज्ञ जिनपिंग के इस बयान को सेना का मनोबल बढ़ाने और दुनिया को अपनी सैन्य ताक़त का अहसास कराने के रूप में ले रहे हैं.

दक्षिण चीन सागर में तनाव

इससे पहले, अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एशिया रीअश्योरेंस इनिशिएटिव एक्ट को मंज़ूर कर इसे कानूनी जामा पहनाया था.

इमेज कॉपीरइट AFP/Getty Images

दुनिया की लगभग आधी आबादी वाले एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए बने इस कानून के अनुसार दक्षिण चीन सागर में चीन का अवैध निर्माण और उसकी सैन्य मौजूदगी अमरीका के राष्ट्रीय हितों, क्षेत्र में शांति और वैश्विक स्थायित्व के विरुद्ध है.

इसके बाद बुधवार को शी जिनपिंग ने कहा था चीन और ताइवान को चीन के साथ 'मिलना होगा' और यह 'मिलकर ही रहेगा.' उनका कहना था कि चीन को ये अधिकार है कि वो अगर चाहे तो इसके लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल करे.

ताइवान के साथ रिश्ते सुधारने की पहल के 40 साल पूरे होने पर दिए गए भाषण में जिनपिंग ने दोहराया कि चीन 'एक देश दो प्रणालियों' वाली व्यवस्था के तहत शांतिपूर्ण एकीकरण चाहता है.

इससे पहले इसी सप्ताह चीन में कई हाई प्रोफ़ाइल अमरीकी नागरिकों की गिरफ़्तारी के बाद अमरीका के विदेश विभाग ने चीन जाने वाले अपने नागरिकों से और अधिक सतर्कता बरतने के लिए कहा था.

इमेज कॉपीरइट AFP

सलाह में कहा गया था कि यात्रा प्रतिबंधों को ज़बरदस्ती लागू करके लोगों को देश में रखा जा रहा है.

शी जिनपिंग साल 2012 में चीन के राष्ट्रपति और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन बने थे जिसके बाद से लगातार उन्होंने पीएलए को और मज़बूत करने की कोशिशे कीं.

माना जाता है कि उनका सत्ता में आने के बाद से चीन वैश्विक राजनीति में अधिक मुखर हुआ है और वहां सत्तावाद के युग की शुरुआत हुई है. माना जाता है कि वो चीन को विश्व शक्ति के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिएयहां क्लिक कर सकते हैं.हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

मिलते-जुलते मुद्दे

संबंधित समाचार