चीन आर्थिक मंदी से परेशान क्यों नहीं है?

  • 22 जनवरी 2019
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चीन ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर जानकारी दी कि साल 2018 में उसकी आर्थिक विकास की दर 28 साल में सबसे धीमी रही.

आंकड़ों के मुताबिक़ बीते साल चीन के सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) की दर 6.6 फ़ीसदी रही.

चीन में दिलचस्पी रखने वाले अंतरराष्ट्रीय जगत और मीडिया के लिए ये सिर्फ़ इस देश के आर्थिक चमत्कार के धुंधला होते जाने का ताज़ा संकेत भर नहीं है बल्कि ये एक ऐसा रुझान है जिसका असर पूरी दुनिया पर होगा.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का कहना है कि चीन में अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ़्तार से दुनिया भर के आर्थिक बाज़ार में गिरावट आ सकती है. ब्रेक्ज़िट में कोई समझौता न होने के साथ ये कारण भी पूरी दुनिया को प्रभावित कर सकता है.

लेकिन चीन का कहना है कि 21 जनवरी को जारी किए गए आंकड़े उसकी उम्मीदों के मुताबिक़ ही हैं. चीन पहले ही कह चुका है कि अर्थव्यवस्था में मंदी आने पर वो नियंत्रित तरीक़े से बदलाव करेगा.

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चीन का मीडिया भी सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहा है. वो ताज़ा आंकड़ों को भी इसी तरह से पेश कर रहे हैं.

साल 2018 की आखिरी तिमाही में चीन की अर्थ व्यवस्था 6.4 फ़ीसदी की दर से बढ़ी. ये साल 2009 की वैश्विक मंदी के बाद से सबसे धीमी दर है.

चीन में सरकार के नियंत्रण वाले मीडिया ने इसे अमरीका के साथ जारी ट्रेड वार का असर बताने से परहेज किया है.

अमरीका के साथ ट्रेड वार की शुरुआत के पहले भी चीन मंदी से निपटने के उपाय में जुटा था लेकिन इसके बाद उसने अपने प्रयासों की गति बढ़ा दी है.

आंकड़ों की परवाह नहीं

चीन में मीडिया को इस बाद का अंदाज़ा है कि सालाना तरक्की के ताज़ा आंकड़ों को अंतरराष्ट्रीय मीडिया किस तरह से देखेगा. लेकिन चीन का मीडिया तस्वीर का चमकदार पक्ष ही सामने रख रहा है.

आर्थिक मोर्चे पर वो चीनी प्रगति की दर के मुक़ाबले गुणवत्ता बेहतर करने के प्रयासों की चर्चा कर रहा है.

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संकट में नहीं अर्थव्यवस्था

चीन का मीडिया अमरीका और यूरोपीय यूनियन की लगातार कम रहने वाली जीडीपी दर को लेकर ताने भी नहीं दे रहा है. बल्कि मीडिया का कहना है कि 6.6 फ़ीसदी की वृद्धि दर मौजूदा वक़्त में चीन की ज़रूरतों को सामने रखती है.

चीन के अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है, "विदेशी मीडिया की त्वरित टिप्पणी '28 साल में जीडीपी की सबसे निचली दर' और मंदी के दबाव पर है. ये तथ्य हैं और इन पर सीधे ध्यान देना चाहिए लेकिन सिर्फ़ 'धीमी दर' पर ध्यान लगाने से ग़लत व्याख्या का ख़तरा बन सकता है."

संपादकीय में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था की धीमी दर सरकार के उन फ़ैसलों का असर है, जिनमें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है और तकनीक को उन्नत बनाने की ओर ध्यान दिया जा रहा है.

अख़बार लिखता है, "चीन की विकास दर ऊंची रहती थी लेकिन इसके लिए पर्यावरण और पारिस्थितिकी के मोर्चे पर बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ी थी और इस तरह आने वाली दौलत व्यापक असर पैदा करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार में नाकाम रही."

मौजूदा दौर में जब ऊंची विकास दर की 'और अपेक्षा रहेगी', ग्लोबल टाइम्स लिखता है, "6.6 फ़ीसदी की 'सबसे धीमी विकास दर' के मायने ये नहीं हैं कि चीन किसी संकट के मुहाने पर है बल्कि ये कठिन दिक्कतों के समाधान और जोखिमों को नियंत्रित करने की प्रक्रिया है."

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सरकार ने हासिल किया लक्ष्य

विकास की 6.6 फ़ीसदी की दर सरकार के अनुमान के मुताबिक़ ही है.

यही वजह है कि देश के अंग्रेज़ी भाषा के मुख्य अख़बार ने नेशनल ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स का जिक्र करते हुए 21 जनवरी को शीर्षक दिया, "चीन की जीडीपी 2018 में 6.6 फ़ीसदी तक पहुंची : एनबीएस"

अख़बार ने लिखा, "देश ने साल 2018 में जीडीपी वृद्धि के लिए तय करीब 6.5 फ़ीसदी का अपना लक्ष्य हासिल कर लिया. एनबीएस का कहना है कि ऐसा ढील देने के बावजूद बीते साल देश की अर्थव्यवस्था की प्रगति अपेक्षाकृत हद में रही."

हालांकि ऐसा लगता है कि चीन का शीर्ष नेतृत्व इन नतीजों को लेकर सहज महसूस नहीं कर रहा है.

अख़बार के मुताबिक चीन के प्रधानमंत्री ली कचियांग ने 21 जनवरी को कहा, "दबाव को देखते हुए" बाज़ार को मजबूत करना ज़रूरी है.

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चीन का करिश्मा

कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली ने ब्यूरो की ओर से जारी दूसरे आंकड़ों को ज्यादा ज़ोर से सामने रखा.

अख़बार ने बताया कि चीन की जीडीपी में पहली बार 900 खरब युआन (90 ट्रिलियन) यानी क़रीब 132 खरब डॉलर का इजाफा हुआ.

अख़बार ने इसे 'नया क़दम' बताया. 22 जनवरी के अंक में इस ख़बर को पहले पन्ने पर जगह दी गई. इस ख़बर को राष्ट्रपति शी जिनपिंग के प्रांतीय पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में दिए गए अहम भाषण की ख़बर के भी ऊपर जगह मिली.

इस अख़बार ने भी 6.6 फ़ीसद वृद्धि के आंकड़े की बात की. साथ ही लिखा, "चीन दुनिया की आर्थिक प्रगति में 30 फ़ीसदी का योगदान देता है और वो सबसे ज़्यादा योगदान देने वाला देश बना हुआ है."

पीपुल्स डेली अख़बार ने दूसरे पन्ने पर एक विस्तृत रिपोर्ट भी छापी. इसमें उन आंकड़ों को पेश किया गया जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने नज़रअंदाज कर दिया था. अख़बार के मुताबिक़ वर्ष दर वर्ष के हिसाब से 'बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव' से जुड़े देशों के साथ चीन के आयात और निर्यात में 13 फ़ीसदी का इजाफा हुआ है.

लेकिन शायद सबसे ज़्यादा सकारात्मक बात समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने की. समाचार एजेंसी ने कहा कि 6.6 फ़ीसदी वृद्धि के ताज़ा आंकड़े दिखाते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था 'दुनिया की उम्मीद पर खरी है'.

समाचार एजेंसी के मुताबिक, "ये नतीजे अंतरराष्ट्रीय संरक्षणवाद के मुश्किल हालात में हासिल किए गए हैं और चीन बाहर से भी चुनौतियों का सामना कर रहा है. ये नतीजे चीन की अर्थव्यवस्था की एकाग्रता, दबदबे और करिश्मे को दिखाते हैं."

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