पाकिस्तान की पहली हिंदू महिला सिविल जज कौन हैं?

  • 29 जनवरी 2019
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Image caption शहदादकोट की रहने वालीं सुमन अपने पिता डॉक्टर पवन बोदानी के साथ

पाकिस्तान में सिंध प्रांत के शहदादकोट ज़िले की सुमन बोदानी सिविल जज बनने वाली पहली हिंदू महिला हैं.

जुडिशियल सेवा की परीक्षा में 54वें पायदान पर आने के बाद उन्हें सिविल जज और जुडिशियल मजिस्ट्रेट का पद दिया गया.

शहदादकोट सिंध और बलूचिस्तान की सीमा पर बसा हुआ एक पिछड़ा शहर है. 2010 में आई बाढ़ के दौरान जो शहर प्रभावित हुए थे, उनमें शहदादकोट भी शामिल था.

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Image caption सिंध में हिंदू समुदाय की अधिकतर लड़कियां डॉक्टर बनना चाहती हैं

सिंध यूनिवर्सिटी से की एलएलबी

सुमन बोदानी ने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई अपने ही शहर में हासिल की. इसके बाद उन्होंने हैदराबाद से एलएलबी और कराची की ज़ेबिस्ट यूनिवर्सिटी से एलएलएम किया.

वह कराची में मशहूर वकील रिटायर्ड जस्टिस रशीद रिज़वी के लॉ फ़र्म के साथ जुड़ी रहीं और उनके साथ दो साल प्रैक्टिस की.

सुमन बोदानी का क़ानून के क्षेत्र में आना उनके पिता की इच्छा थी. उनके पिता डॉक्टर पवन बोदानी ने बीबीसी को बताया कि हैदराबाद में सिंध यूनिवर्सिटी से जुड़े एक कॉलेज में पांच वर्षीय क़ानूनी डिग्री की पढ़ाई की शुरुआत हो रही थी और यह उसका पहला बैच था.

उनकी इच्छा हुई कि ये क्षेत्र बहुत अच्छा है और दिली इच्छा थी कि बच्चे ग़रीबों को इंसाफ़ दिलाने में मददगार साबित हो सकें इसलिए सुमन बोदानी को इस क्षेत्र में भेज दिया.

सुमन बोदानी का कहना है कि वह ग्रामीण इलाक़े से संबंध रखती हैं, वहां उन्होंने काफ़ी लोगों को क़ानूनी समस्याओं का शिकार देखा और वह अदालती ख़र्च उठा नहीं सकते थे.

"मैंने सोचा था कि मैं वकालत में जाऊंगी और उन्हें इंसाफ़ दिलाऊंगी."

सुमन के पिता डॉक्टर पवन बोदानी शहदादकोट में आंखों के इलाज का क्लीनिक चलाते हैं. उनका कहना है कि 1991 में उन्होंने कमीशन पास किया लेकिन सरकारी नौकरी में तनख़्वाह कम होने के कारण उन्होंने प्राइवेट प्रैक्टिस को तरजीह दी और वह 1992 से शहदादकोट में ही प्रैक्टिस कर रहे हैं.

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Image caption सिंध में हिंदू लड़कियों के धर्म परिवर्तन की ख़बरें आती रही हैं

लता मंगेशकर की फ़ैन हैं सुमन

सुमन बोदानी डॉक्टर बोदानी की इकलौती संतान नहीं हैं जिसने अपने परिजनों का नाम रौशन किया है.

उनकी बड़ी बेटी सॉफ़्टवेयर इंजीनियर है, दूसरी बेटी सुमन जज बनी हैं, तीसरी ओमान में चार्टर्ड अकाउंटेंट है जबकि एक बेटा निजी यूनिवर्सिटी में ऑडिटर और दो छोटे बेटे कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं जो डॉक्टर बनने की ख़्वाहिश रखते हैं.

सिंध में हिंदू समुदाय से संबंध रखने वाली लड़कियां अधिकतर डॉक्टर बनने या शिक्षा के क्षेत्र में जाने को तरजीह देती हैं और आम लोगों से संबंध रखने वाले क्षेत्रों से दूर रहती हैं.

सुमन बोदानी का कहना है, "मुझे मालूम है कि उनका समुदाय इस फ़ैसले का समर्थन नहीं करेगा क्योंकि वह इस क्षेत्र में लड़कियों के काम करने को पसंद नहीं करते, हालांकि पिता और भाई-बहनों की मदद हासिल रही. इस बारे में ख़ानदान को कई बातें भी सुननी पड़ीं लेकिन मेरे ख़ानदान ने बातों की परवाह न करते हुए मुझे इस मुक़ाम पर पहुंचा दिया."

सोशल मीडिया पर सुमन बोदानी की प्रोफ़ाइल के मुताबिक़, वह लता मंगेशकर और आतिफ़ असलम की प्रशंसक हैं जबकि उनकी पसंदीदा फ़िल्मों में 'विवाह' और 'दी डेविल्स एडवोकेट' शामिल हैं. इसके अलावा वह शायरी पढ़ने में भी दिलचस्पी रखती हैं.

सिंध के शहदादकोट, जेकबाबाद, कशमोर और शिकारपुर में हिंदू समुदाय की लड़कियों के कथित तौर पर धर्म परिवर्तन और व्यापारियों के अग़वा की शिकायत आती रही हैं. डॉक्टर पून कुमार का कहना है कि अब हालात में काफ़ी सुधार है हालांकि अभी भी कुछ शिकायतें हैं.

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