अमरीका-तालिबान के बीच 'संकटमोचक' कैसे बना पाकिस्तान?- उर्दू प्रेस रिव्यू

  • 10 फरवरी 2019
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पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते पनामा लीक्स मामला, पाकिस्तानी विदेश मंत्री का ब्रितानी दौरा और अफ़ग़ानिस्तान शांति वार्ता से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं.

सबसे पहले बात पनामा लीक्स मामले की.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि पनामा लीक्स मामले में शामिल दूसरे लोगों को भी बेनक़ाब किया जाएगा.

अख़बार जंग के मुताबिक़, पाकिस्तान के नौकरशाहों को संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि पनामा लीक्स में शामिल 250 से ज़्यादा लोग टैक्स में छूट ले चुके हैं और इससे जुड़ी ज़्यादातर कंपनियां चीन शिफ़्ट कर दी गईं हैं.

इमरान ख़ान ने कहा कि पनामा लीक्स में शामिल 175 लोगों को तलाश ही नहीं किया जा सका और 78 लोगों के बारे में अधूरी जानकारी थी जिनकी तलाश के लिए सरकारी एजेंसियों की मदद लेने का फ़ैसला किया गया है.

कुलभूषण जाधव मामला

लंदन के दौरे पर गए पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा है कि कुलभूषण जाधव मामले में पाकिस्तान अपने सुबूत पेश करेगा.

पाकिस्तान में मौत की सज़ा सुनाए गए कथित भारतीय जासूस कुलभूषण जाधव मामले की सुनवाई इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस (आईसीजे) में हो रही है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान 19 फ़रवरी को आईसीजे के सामने अपने सबूत पेश करेगा.

अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ विदेश मंत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ''हमारी स्थिति बिल्कुल साफ़ है. वो हमारी धरती पर पकड़ा गया है. उसने पाकिस्तान में दहशतगर्दी को अंजाम देने की बात क़ुबूल की है.''

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कश्मीर का मसला

अख़बार के अनुसार इस मौक़े पर उन्होंने भारत प्रशासित कश्मीर और भारत से संबंधों पर भी बात की.

अख़बार के अनुसार शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि उनके लंदन दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत प्रशासित कश्मीर के मसले को उजागर करना था.

क़ुरैशी के अनुसार पाकिस्तान ने ब्रितानी संसद में कश्मीर के मामले को पूरी मज़बूती से उठाया है और ब्रितानी सांसदों ने भी कश्मीर के मामले में पाकिस्तान के रवैये का समर्थन किया है.

भारत से रिश्तों के बारे में कुरैशी ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के पास बातचीत के सिवा समस्या का कोई समाधान नहीं है.

क़ुरैशी का कहना था, ''हम समझते हैं कि भारत में आम चुनाव होने वाले हैं, जिसके कारण वो हमसे बातचीत से कतरा रहे हैं. हम शांति चाहते हैं. भारत जब भी बातचीत के लिए तैयार होगा, हम बातचीत के लिए तैयार होंगे.''

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Image caption विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

तालिबान और अमरीका में बातचीत

अफ़ग़ानिस्तान में शांति बहाली के लिए तालिबान और अमरीका से बातचीत हो रही है. इसमें पाकिस्तान ने बहुत ही प्रमुख भूमिका निभाई है. इसको लेकर पाकिस्तानी अख़बारों में कई तरह की बातें हो रही हैं.

अख़बार दुनिया में एक लेख छपा है जो इस बात का ज़िक्र करता है कि आख़िर पाकिस्तान ने तालिबान को बातचीत के लिए कैसे तैयार कर लिया.

इस लेख के मुताबिक़ वरिष्ठ तालिबानी नेताओं के कई रिश्तेदार जो पाकिस्तान में रह रहे हैं, उनको गिरफ़्तार कर पाकिस्तान ने तालिबान पर दबाव डाला कि वो अमरीका और अफ़ग़ानिस्तान सरकार से बातचीत के लिए तैयार हो जाएं.

लेख के अनुसार पाकिस्तान ये कभी नहीं जताना चाहता है कि तालिबान उसके नियंत्रण या कम से कम प्रभाव में है और तालिबान भी ये नहीं दर्शाना चाहता है कि वह पाकिस्तान के बहुत आभारी हैं क्योंकि अमरीका के अनुसार तालिबान को पाकिस्तान में एक सुरक्षित पनाहगाह मिली हुई है.

लेख में एक गोपनीय वरिष्ठ अमरीकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि पाकिस्तान की मदद के बग़ैर अमरीका कुछ भी नहीं कर सकता था.

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Image caption अमरीकी फ़ौज

उधर तालिबान के एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि उन्होंने पाकिस्तान को इससे पहले कभी इतना गंभीर नहीं देखा है. तालिबान अधिकारी के अनुसार पाकिस्तान ने धार्मिक नेताओं के ज़रिए तालिबान को संदेश भिजवाया कि अगर वो बातचीत के लिए तैयार नहीं होते हैं तो फिर सारे संपर्क टूट जाएंगे.

लेख में एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सूत्र के हवाले से कहा गया है कि तालिबान को बातचीत के लिए तैयार करने के पीछे पाकिस्तान को अमरीका से आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद नहीं है, बल्कि पाकिस्तान को इस बात की आशंका है कि अमरीका के अफ़ग़ानिस्तान से अचानक चले जाने की स्थिति में वहां आर्थिक संकट पैदा हो सकता है जिसका असर पाकिस्तान पर भी पड़ेगा.

अफ़ग़ानिस्तान में 14 हज़ार अमरीकी सैनिकों की मौजूदगी अफ़ग़ानिस्तान को अमरीकी आर्थिक मदद सुनिश्चित करती है.

पाकिस्तान अपनी आर्थिक स्थिति ठीक करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा विदेशी निवेश लाने के लिए प्रयास कर रहा है.

ऐसे में पाकिस्तान नहीं चाहता कि अफ़ग़ानिस्तान किसी बड़े संकट का शिकार हो क्योंकि उसका सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ेगा.

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