पुलवामा CRPF हमला: चीन की 'चुप्पी' और पाकिस्तानी नेता का 'अटपटा बयान'

  • 16 फरवरी 2019
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भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा ज़िले में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस फ़ोर्स यानी सीआरपीएफ़ के एक काफ़िले पर हुआ हमला पिछले तीन दशक का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है.

इस हमले में सीआरपीएफ़ के कम से कम 40 जवानों की मौत हो चुकी है. हमले की ज़िम्मेदारी चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है.

जैश-ए-मोहम्मद पाकिस्तान स्थित इस्लामिक चरमपंथी संगठन है और इसके संस्थापक मसूद अज़हर का ठिकाना भी पाकिस्तान ही है. ऐसे में भारत ने पाकिस्तान को इस हमले के लिए सीधे तौर ज़िम्मेदार ठहराया है.

मसूद अज़हर को भारत की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने इंडियन एयरलाइंस के एक यात्री विमान के हाइजैक किए जाने के बाद 155 यात्रियों को सुरक्षित लाने के बदले छोड़ा था.

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तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह चरमपंथी मसूद को विमान में लेकर कंधार तक गए थे. उसके बाद से मसूद का ठिकाना पाकिस्तान ही है. केंद्र की मोदी सरकार ने संयुक्त राष्ट्र से मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने की कोशिश की लेकिन चीन ने इसे रोक दिया था.

सबसे हैरान करने वाली बात है कि इस हमले को लेकर पाकिस्तान और चीन के मीडिया में लगभग ख़ामोशी है. ग्लोबल टाइम्स को चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माना जाता है लेकिन इस अख़बार में लगभग चुप्पी है.

इस हमले की कोई आलोचना नहीं की गई है. ग्लोबल टाइम्स में 15 फ़रवरी को एक छोटी ख़बर छपी है जिसमें हमले की सूचना है.

इसी तरह चीन की न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ ने भी इस ख़बर की उपेक्षा की है. शिन्हुआ ने इस हमले की पुर्तगाल के निंदा करने की ख़बर छापी है.

चाइना डेली ने भी इस हमले की ख़बर की उपेक्षा की है. चाइना डेली ने इसकी कोई ख़बर तक नहीं छापी है. हालांकि चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने नियमित प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पत्रकारों के पूछे गए सवाल पर इस हमले की निंदा की है.

शुआंग ने कहा है कि मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति उनकी पूरी संवेदना है. शुआंग ने कहा कि चीन हर तरह के आतंकवाद की निंदा करता है और उम्मीद है कि आतंकवाद पर काबू के लिए पड़ोसी देश आपस में सहयोग करेंगे.

हालांकि शुआंग ने अज़हर मसूद के सवाल पर कोई ठोस जवाब नहीं दिया.

चीन और पाकिस्तान की दोस्ती कोई छुपी हुई बात नहीं है. चीन, पाकिस्तान में अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर पर काम कर रहा है.

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इस परियोजना के तहत चीन ने पाकिस्तान में 55 अरब डॉलर का निवेश किया है. भारत का चीन और पाकिस्तान दोनों से युद्ध हो चुका है. चीन पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में भी कई विकास परियोजनाओं पर काम कर रहा है.

हैरानी की बात है कि पाकिस्तानी मीडिया में भी पुलवामा हमले को लेकर है कोई हलचल नहीं है. जब यह हमला हुआ तो पाकिस्तान के अहम अख़बारों ने ख़बर को दो-तीन कॉलम में निपटा दिया. इससे पहले इतने बड़े हमले को पाकिस्तानी मीडिया में काफ़ी तवज्जो मिलती थी.

17 फ़रवरी को सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान पाकिस्तान पहुंच रहे हैं और मीडिया में इसी से जुड़ी ख़बरें, रिपोर्ट्स और विश्लेषण छाए हुए हैं.

16 फ़रवरी को पाकिस्तानी अख़बार डॉन ने रेडियो पाकिस्तान के हवाले से ख़बर छापी है कि पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने भारतीय उप-उचायुक्त को तलब किया और पुलवामा हमले में पाकिस्तान पर आरोप को लेकर विरोध पत्र थमा दिया.

पाकिस्तान ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अज़हर पर कोई टिप्पणी नहीं की है. दूसरी तरफ़ उसने भारत के आरोपों को सिरे से ख़ारिज कर दिया है. इस हमले को लेकर पाकिस्तानी नेताओं के अटपटे बयान भी सामने आए हैं.

पाकिस्तान ने भारतीय उच्चायुक्त को तलब किया

पुलवामा का मास्टरमाइंड मसूद अजहर का भतीजा

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पाकिस्तान के प्रमुख अख़बार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तानी सीनेटर और सीनेट स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन रहमान मलिक ने कहा है कि पुलवामा में भारतीय सुरक्षाबलों पर हमला एक साज़िश है ताकि वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से चुनाव जीत सकें.

इस रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि यह हमला 'भारतीय जासूस' कुलभूषण जाधव से ध्यान भटकाने के लिए है. पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) नेता रहमान मलिक ने शुक्रवार को अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस की थी. इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले ही इस हमले की निंदा कर चुका है.

मलिक ने कहा, ''भारत की सरकार को किसी भी हमले में पाकिस्तान पर उंगली उठाने की आदत हो गई है. यह पाकिस्तान को अलग-थलग करने की कोशिश है लेकिन भारत इसमें सफल नहीं हो पाएगा.''

पाकिस्तान के पूर्व गृहमंत्री रहमान मलिक ने पीएम मोदी के ख़िलाफ़ भी तीखा हमला बोला.

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान आज यानी 16 फ़रवरी को पाकिस्तान पहुंचने वाले थे, लेकिन अचानक से उन्होंने अपनी योजना बदल दी और अब वो 17 फ़रवरी को पाकिस्तान आएंगे.

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पाकिस्तानी अख़बार डॉन ने लिखा है कि अचानक से दौरे में एक दिन की कटौती का कारण अब तक साफ़ नहीं हो पाया है. इस बीच सऊदी अरब ने भी पुलवामा में सीआरपीएफ़ के काफ़िले पर हुए हमले की निंदा की है.

पाकिस्तान सऊदी क्राउन प्रिंस के दौरे को ऐतिहासिक बता रहा है. प्रिंस सलमान 19 फ़रवरी को भारत भी पहुंच रहे हैं. कहा जा रहा है कि भारत सलमान के सामने पाकिस्तानी ज़मीन पर आतंकवाद का मुद्दा उठा सकता है.

भारत पर हुए हमले को विदेशी मीडिया ने बहुत तवज्जो नहीं दी है. अमरीकी मीडिया से यूरोप तक के मीडिया के लिए यह एक छोटी ख़बर की तरह रही.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी इस मामले में कोई बयान नहीं दिया है. ट्रंप ने 26/11 की बरसी पर ट्वीट कर आतंकवाद के मसले पर भारत के साथ खड़े होने का आश्वासन दिया था लेकिन इस बार कोई ट्वीट नहीं किया है.

इसराइल के राष्ट्रपति बिन्यामिन नेतन्याहू ने ज़रूर ट्वीट कर संवेदना जताई है और कहा है कि इस मुश्किल घड़ी में वो भारत के साथ खड़े हैं. ईरान ने भी इस हमले की कड़ी निंदा की है और कहा है कि किसी भी तर्क पर ऐसे हमले को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता.

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