पाकिस्तान में 20 अरब डॉलर के बदले सऊदी अरब को क्या मिलेगा

  • 20 फरवरी 2019
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सऊदी के बाग़ी पत्रकार जमाल ख़ाशोग्जी की पिछले साल अक्टूबर में तुर्की में हत्या के बाद से सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान दुनिया भर में अलग-थलग हो गए थे.

सीआईए ने कहा था कि ख़ाशोग्जी की हत्या क्राउन प्रिंस के आदेश पर हुई थी. ख़ाशोग्जी की हत्या को लेकर कई अहम हस्तियों ने रियाद में इन्वेस्टमेंट समिट का बहिष्कार कर दिया था.

नवंबर में सलमान ट्यूनीशिया गए तो विरोध का सामना करना पड़ा. सलमान जब मोरक्को पहुंचे तो किंग मोहम्मद VI ने भी उनसे मिलने से परहेज किया.

बिछ गया पाकिस्तान

17 फ़रवरी को जब क्राउन प्रिंस पाकिस्तान पहुंचे तो ख़ाशोग्जी की हत्या की छाया कहीं नहीं दिखी. पाकिस्तान ने क्राउन प्रिंस को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया.

सलमान जब पिछले हफ़्ते रविवार की रात पाकिस्तान पहुंचे तो पाकिस्तान ने सोमवार को क्राउन प्रिंस के सम्मान में सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा कर दी.

रविवार की रात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने सलमान की मौजूदगी में कहा, ''सऊदी अरब पाकिस्तान के लिए मुश्किलों का दोस्त रहा है इसलिए हमारे लिए यह संबंध काफ़ी अहम है.''

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क्राउन प्रिंस ने पाकिस्तान में पेट्रोकेमिकल्स, ऊर्जा और खनन परियोजनाओं में 20 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की. इसके अलावा सलमान ने सऊदी की जेलों में बंद 2,000 पाकिस्तानी नागरिकों के तत्काल रिहाई की घोषणा की.

ख़ान ने कहा कि क्राउन प्रिंस ने ऐसा कर पाकिस्तानियों का दिल जीत लिया. इमरान ख़ान भी प्रोटोकॉल तोड़ एमबीएस को ख़ुद ही गाड़ी चला अपने आवास तक लाए.

एमबीएस का पाकिस्तान दौरे में जैसा स्वागत हुआ वो किसी अंतरराष्ट्रीय स्टेट्समैन से भी आगे का था. पाकिस्तान के बाद सलमान भारत पहुंचे और यहां भी प्रधानमंत्री मोदी स्वागत में एयरपोर्ट पर खड़े थे. विमान से उतरते ही पीएम मोदी ने गले लगा लिया.

भारत के दौरे के बाद सलमान चीन पहुंचने वाले हैं. ख़ाशोग्जी को लेकर न तो पाकिस्तान ने एक शब्द बोला और न ही भारत ने. कई लोगों का मानना है कि सऊदी अरब का पाकिस्तान में निवेश की घोषणा अपनी छवि सुधारने से आगे की घोषणा है.

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पाकिस्तान को सऊदी अरब से पैसा क्यों चाहिए?

सऊदी अरब से पाकिस्तान को मिलने वाली आर्थिक मदद का समृद्ध इतिहास रहा है. पाकिस्तानी मदरसों को सऊदी से पर्याप्त फंड मिलता है. पाकिस्तान ने 1998 में परमाणु परीक्षण किया तो सऊदी अरब ने ही दुनिया के आर्थिक प्रतिबंधों के असर से बचाया.

2014 में पाकिस्तानी रुपया जब बुरी तरह से टूटा तब भी सऊदी ने इस्लामाबाद को डेढ़ अरब डॉलर की मदद दी.

पाकिस्तान दौरे में सलमान ने निवेश की घोषणा तब की है जब पाकिस्तान पूरी तरह से गर्दिश में है. पाकिस्तान आर्थिक संकट में फंसा हुआ है. पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार इतना कम हो गया है कि वो तेल का आयात बिल भुगतान करने लायक भी नहीं बचा है.

पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा महज आठ अरब डॉलर बची है. पिछले साल अगस्त महीने में जब इमरान ख़ान ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तब से पाकिस्तान ख़ुद को डिफॉल्टर होने से बचाने की कोशिश कर रहा है.

इमरान ख़ान ने पहले विदेशी दौरे के लिए सऊदी को चुना. पिछले साल अक्टूबर में पीएम ख़ान सऊदी गए तो उसने पाकिस्तान को आर्थिक मदद मुहैया कराई गई.

यह मदद तब मिली जब पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक की जमा राशि में पिछले साल की तुलना में 40 फ़ीसदी की गिरावट आई थी.

पाकिस्तान फ़िलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मदद लेने की कोशिश कर रहा है. 1980 के दशक के बाद से पाकिस्तान आईएमएफ़ की शरण में 13 बार जा चुका है.

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सऊदी अरब को इससे क्या मिलेगा

सऊदी अरब के बारे में ऐतिहासिक रूप से कहा जाता है कि वो दिमाग़ और दिल जीतने के लिए खर्च करने में कोई कसर नहीं छोड़ता है.

लेकिन सऊदी अभी ख़ुद ही आर्थिक लाचारी से जूझ रहा है. सऊदी को अब बड़ी गहराई से महसूस हो रहा है कि उसकी अर्थव्यवस्था की निर्भरता तेल पर से कम करनी होगी.

लंदन के किंग्स कॉलेज में मध्य-पूर्व सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञ एंड्रीज क्रेइग ने टाइम मैगज़ीन से कहा है, ''खुलकर पैसे खर्च करने की स्थिति में सऊदी 80 और 90 के दशक में था. आज की तारीख़ में सऊदी उस हालत में नहीं है. एमबीएस के नेतृत्व में तो कम से कम बिल्कुल नहीं है. 20 अरब डॉलर का वादा महज मदद नहीं है बल्कि ये पाकिस्तान को पंसद करते हैं इसलिए है. सऊदी इस निवेश से भविष्य में कमाना चाहता है.''

आठ अरब डॉलर ग्वादर पोर्ट तेल रिफाइनरी संयंत्र बनाने के लिए है. इसे चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर में सबसे ख़ास माना जा रहा है.

इसमें संयुक्त अरब अमीरात ने भी निवेश किया है. चीन ने वन बेल्ट वन रोड के चाइना पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर में 62 अरब डॉलर का निवेश किया है. पाकिस्तान में सऊदी अरब तेल निर्यात बाज़ार स्थापित करना चाहता है.

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सऊदी के पैसे से इलाक़े की राजनीति और भूगोल पर क्या असर पड़ेगा?

इमरान ख़ान ने 20 अरब डॉलर के निवेश का स्वागत किया है. हालांकि कुछ विशेषज्ञ इसे जोखिम के तौर पर भी देख रहे हैं.

ग्वादर पोर्ट पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित है और यह ईरान के प्रांत सिस्तान और बलूचिस्तान से लगा है. 13 फ़रवरी को सुन्नी चरमपंथियों ने ईरान के रिवॉल्युशनरी गार्ड्स के 27 जवानों की जान लेने की ज़िम्मेदारी ली थी.

ईरान ने इस हमले के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया था कि वो चरमपंथियों को पनाह दे रहा है. इसके साथ ही ईरान ने सऊदी अरब को भी ज़िम्मेदार ठहराया कि वो सुन्नी चरमपंथी समूहों को बहुसंख्यक शिया आबादी के ख़िलाफ़ भड़का रहा है.

पाकिस्तान के लिए सऊदी और ईरान में से किसी एक को चुनना इतना आसान नहीं होगा.

सऊदी अरब के पाकिस्तान में निवेश से भारत के साथ भी कड़वाहट बढ़ेगी. भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा ज़िले में एक चरमपंथी हमले में भारतीय सुरक्षा बलों के 40 से ज़्यादा जवानों के मारे जाने के बाद से दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच तनाव काफ़ी बढ़ गया है.

इस हमले की ज़िम्मेदारी पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है. पाकिस्तान स्थित चरपंथी संगठनों को सऊदी अरब से फंडिंग की बात कोई नहीं है. ऐसे में सऊदी अरब का पाकिस्तान में इतना बड़ा निवेश भारत के लिए सुखद तो नहीं ही होगा.

इमरान ख़ान जब सऊदी अरब गए थे तो उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान की सेना सऊदी अरब पर किसी को हमला नहीं करने देगी.

अमरीकी वेबसाइट ग्लोबल फ़ायरपावर के अनुसार पाकिस्तानी सेना दुनिया के 20 देशों की ताक़तवर आर्मी में से एक है.

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पाकिस्तान परमाणु शक्ति संपन्न देश है. ग्लोबल फ़ायरपावर के अनुसार परमाणु शक्ति संपन्न सेना के तौर पर भारत दुनिया का चौथा ताक़तवर देश है.

पाकिस्तान खाड़ी के कई देशों में सैन्य मदद करता है लेकिन इस मामले में सऊदी अरब उसके लिए सबसे ख़ास है.

सऊदी में शाही परिवार की सुरक्षा में पाकिस्तानी सेना दशकों से लगी हुई है. सऊदी के बारे में कहा जाता है कि पाकिस्तान उसे ज़रूरत पड़ने पर परमाणु हथियार भी मुहैया करा सकता है.

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