#Christchurch: अकेले शख़्स ने किया पूरा हमला, क्या था मक़सद

  • 17 मार्च 2019
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इस हफ़्ते शुक्रवार को न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च में दो मस्जिदों पर ख़ूनी हमले में जिस व्यक्ति को अभियुक्त बनाया गया है, उसके बारे में पुलिस का मानना है कि हमले को उसने अकेले ही अंजाम दिया था.

28 साल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक ब्रेंटन टैरंट इस मामले में मुख्य संदिग्ध हैं और वो ख़ुद को नस्लीय रूप से श्रेष्ठ मानते हैं. ब्रेंटन ने इस हमले का फ़ेसबुक पर लाइव स्ट्रीम भी किया था.

इस मामले में तीन और लोगों के गिरफ़्तार किया गया है लेकिन माना जा रहा है ये इस हमले में शामिल नहीं थे. हालांकि पुलिस कमिश्नर माइक बुश ने कहा कि अभी जांच चल रही है.

न्यूज़ीलैंड के इतिहास का यह सबसे भयावह हमला है जिसमें 50 लोग मारे गए और 50 के क़रीब ज़ख़्मी हुए हैं. ज़ख़्मियों में से दो की हालत गंभीर है.

पुलिस कमिश्नर माइक बुश का कहना है कि प्रशासन अल-नूर और लिनवुड मस्जिद पर हुए हमले में मारे गए लोगों की पहचान करने के लिए तेज़ी से काम कर रहा है. बुश ने कहा कि यह एक संवेदनशील प्रक्रिया है क्योंकि प्रशासन सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं को लेकर सतर्क है.

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हमले में कौन-कौन शामिल

शनिवार को मुख्य संदिग्ध को हथकड़ी लगाकर क़ैदी वाली सफ़ेद शर्ट में अदालत में पेश किया गया. वो कैमरे के सामने मुस्कुरा रहा था.

इस पर कई लोगों की हत्या का आरोप तय किया गया है. उम्मीद है कि अन्य आरोप भी तय किए जाएंगे. न्यूज़ कॉन्फ़्रेंस में पुलिस कमिश्नर बुश ने कहा कि इस शूटिंग में 28 साल का यह शख़्स एकलौता अभियुक्त है.

बुश ने कहा, ''सुरक्षा बलों ने इसे बहादुरी के साथ रोका. वो और हमले कर सकता था लेकिन हमारे साथियों ने ऐसा नहीं होने दिया. हम इस बात को मानते हैं कि और हमले को हमने रोका है. पुलिस को लगता है कि जिन दो और लोगों को गिरफ़्तार किया गया है वो इसमें शामिल नहीं थे. एक महिला को बिना किसी आरोप के छोड़ दिया गया और एक व्यक्ति पर हथियार रखने का आरोप तय किया गया है.''

इसमें 18 साल के एक लड़के को भी पुलिस ने गिरफ़्तार किया है लेकिन उसकी संलिप्तता को लेकर संदेह है और उससे सोमवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा.

हालांकि माइक बुश ने साथ में ये भी कहा, ''मैं ये नहीं कह रहा हूं कि कुछ भी अंतिम रूप से साबित हो गया है. हम इस मामले की तह तक जाएंगे उसके बाद ही कुछ भी अंतिम रूप से कहा जा सकता है.'' माइक बुश ने कहा कि किसी के भी कोई आपराधिक अतीत नहीं रहे हैं.

न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न ने कहा है कि टैरेंट के पास एक लाइसेंसी बंदूक थी और साथ ही पांच और बंदूकें वो रखता था.

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बहादुरी की पहल

इस हमले से जुड़े कुछ साहसिक वाक़ये भी सामने आए हैं. इस हमले में 6 में से दो पाकिस्तानी मारे गए हैं- नईम राशिद (50) और उनके 21 साल के बेटे तल्हा, न्यूज़ीलैंड में 2010 से रहे थे.

सोशल मीडिया पर राशिद हीरो के तौर पर उभरकर सामने आए हैं. हमले का एक वीडियो सामने आया है जिसमें राशिद गोली खाने के पहले अल नूर मस्जिद में हमलावर को पकड़ने की कोशिश कर रहे हैं.

राशिद के भाई ख़ुर्शीद आलम उत्तरी पाकिस्तान के एबोटाबाद में रहते हैं. उन्होंने बीबीसी के सिकंदर किरमानी से कहा कि उन्हें भाई की बहादुरी पर गर्व है.

आलम ने कहा, ''वो बहादुर थे. मैंने उनके बारे में सुना. वहां के कुछ चश्मदीदों का कहना है कि उन्होंने हमवावर को रोकने की कोशिश कर कुछ जानें बचाई हैं.''

हालांकि ख़ुर्शिद अपने भाई के ज़िंदा नहीं रहने से दुःखी हैं. उन्होंने कहा, ''मुझे उन पर गर्व है पर यह हमारे लिए बड़ा नुक़सान है. आतंकवादियों का कई धर्म नहीं होता है. ऐसे सनकी लोगों रोकने की ज़रूरत है.''

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लिनवुड मस्जिद में भी कुछ ऐसा ही वाक़या सामने आया है. अब्दुल अज़ीज़ ने कहा कि मस्जिद के बाहर उन्होंने बंदूकधारी का पीछा किया था. अब्दुल अज़ीज़ ने हमलावर पर एक क्रेडिट कार्ड मशीन फेंकी थी.

इसका नतीजा यह हुआ कि बंदूकधारी ने अपना एक हथियार गिरा दिया और कार से दूसरी बंदूक निकाली. तब अज़ीज़ ने बंदूक उसकी तरफ़ उठाई और कार के शीशे तोड़ दिए. इसके बाद बंदूकधारी वहां से भागा और पकड़ा गया.

न्यूज़ीलैंड के अधिकारियों के लिए शवों की पहचान करना अब सबसे बड़ी चुनौती है. अधिकारियों ने परिवारों के साथ पीड़ितों की सूची को साझा किया है लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया है.

सबसे पहले मध्य क्राइस्टचर्च की अल-नूर मस्जिद से शुक्रवार को नमाज़ के वक़्त हमले की ख़बर आई. एक बंदूकधारी कार से मस्जिद तक आया और कार पार्क करने के बाद मस्जिद के भीतर गोलीबारी शुरू कर दी.

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Image caption नईम राशिद और उनके बेटे तल्हा

मस्जिद में बच्चों, महिलाओं और पुरुषों पर पांच मिनट तक गोली दागता रहा. उसने ने सिर पर लगे कैमरे से फ़ेसबुक पर लाइव-स्ट्रीम शुरू कर दिया था और इसी फुटेज से उसकी पहचान हुई.

इसके बाद संदिग्ध कार से पाँच किलोमीटर दूर स्थित लिनवुड मस्जिद पहुंचा और यहां भी पहुंचते ही गोलीबारी शुरू कर दी. न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री ने कहा है कि हमलावर ने जिस बंदूक का इस्तेमाल किया है वो काफ़ी आधुनिक है और कार हथियारों से भरी थी.

जैसिंडा अर्डर्न ने कहा है कि उसका इरादा और हमले का था. 2017 के नंवबर में उसने एक बंदूक का लाइसेंस लिया था. इसके बाद उसने और बंदूकें ख़रीदीं. न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा को लेकर वो किसी भी तरह से निशाने पर नहीं था.

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संदिग्ध का संदेश

हमले के पहले ब्रेंटन टैरेंट नाम के सोशल मीडिया अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट लिखी गई थी. इसमें कई नस्ली टिप्पणियां थीं. इस पोस्ट के बाद ही मस्जिद पर हमला किया गया. इस पोस्ट को 'द ग्रेट रिप्लेसमेंट' के तौर पर देखा गया.

'द ग्रेट रिप्लेसमेंट' मुहावरा फ़्रांस से आया है और इसका इस्तेमाल यूरोप प्रवासियों के ख़िलाफ़ नारे के तौर पर अतिवादी लोग करते हैं.

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