ब्रिटेन के बर्मिंघम में पांच मस्जिदों को बनाया गया निशाना

  • 21 मार्च 2019
मस्जिद की टूटी हुई खिड़की

ब्रिटेन के सबसे बड़े शहरों में से एक बर्मिंघम में बीती रात पांच मस्जिदों पर हिंसक हमले हुए.

शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार ये हमले बुधवार देर रात से गुरुवार सुबह होने के बीच में किये गए. पुलिस के मुताबिक़, मस्जिद की बाहरी खिड़कियों पर एक मज़बूत हथौड़े से हमला किया गया. बर्चफ़ील्ड रोड पर स्थित मस्जिद पर यह हमला देर रात क़रीब ढाई बजे किया गया.

देर रात जैसे ही इस हमले की सूचना मिली उसके ठीक 45 मिनट बाद एक ऐसे ही हमले की सूचना अर्डिंगटन में भी मिली. इसके अलावा एस्टन और पेरी बार में भी ठीक ऐसे ही हमले की सूचना पुलिस अधिकारियों को मिली. इसके अलावा अलबर्ट रोड पर भी ऐसा ही हमला हुआ.

गृह सचिव ने इस हमले को गंभीर और चिंता में डालने वाला बताया है.

वेस्ट मिडलैंड्स की पुलिस ने कहा कि अभी तक इन हमलों का असल मक़सद पता नहीं चल सका है लेकिन अधिकारी इसके पीछे का कारण जानने का प्रयास कर रहे हैं.

एस्टन में मस्जिद फ़ैज़ुल इस्लाम मस्जिद के चेयरमेन यूसुफ़ ज़मान का कहना है कि जब मुझे इस हमले के बारे में पता चला तो मुझे पहली बार में यक़ीन ही नहीं हुआ. आख़िर इसके पीछे वजह क्या हो सकती है.

वो कहते हैं कि इस हमले की वजह से लोगों में डर समा गया है. वो अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और इसलिए वो उन्हें मस्जिद भेजने में भी डर रहे हैं.

हालांकि ज़मान ज़ोर देते हुए कहते हैं कि ऐसा कोई भी हमला उन्हें प्रार्थना करने से रोक नहीं सकता.

वो कहते हैं, "हम अपनी प्रार्थना रोज़ाना की तरह करते रहेंगे और हम किसी भी क़ीमत पर हिंसा को बढ़ावा देने वालों को जीतने नहीं देंगे."

उन्होंने कहा कि मस्जिदों के आसपास सुरक्षा पर चर्चा के लिए एक शिखर सम्मेलन भी किया गया था.

विटन इस्लामिक सेंटर के प्रवक्ता का कहना है कि देर रात क़रीब डेढ़ बजे एक आदमी सीसीटीवी में क़ैद हुआ है. यह शख़्स मस्जिद पर हमले करता हुआ दिख रहा है.

इस हमले में मस्जिद की सामने की तरफ़ की छह की छह खिड़कियां टूट गई हैं.

इस हमले से जुड़ा एक वीडियो भी ट्वीट किया गया है.

इन हमलों के संदर्भ में सांसद जॉन कॉटन ने ट्वीट किया कि हमला करने वाले किसी भी क़ीमत पर बर्मिंघम को बांट नहीं सकते.

हालांकि ये हमले क्यों किये गए, इनका मक़सद अभी भी स्पष्ट नहीं हो सका है. बर्मिंघम लेडीवुड के सांसद ने इन हमलों की सख़्त शब्दों में निंदा की है.

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