ये पेड़ जालियों से क्यों ढके जा रहे हैं

  • 26 मार्च 2019

ब्रिटेन में बसंत ऋतु आ गई है. ये साल का वो वक़्त है जब फूल खिलते हैं, सूरज अधिक देर तक दिखता है और चिड़िया घोंसले के भीतर आराम करती हैं.

लेकिन इंग्लैंड में कई जगहों पर पेड़ों और झाड़ियों को जाली से ढका जा रहा है ताकि चिड़िया उन पर घोंसला न बना सकें.

चिड़ियों को बचाने के काम में लगी संस्था 'द रॉयल सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ़ बर्ड्स' (आरएसपीबी) का कहना है कि समय आने पर घास पत्ते साफ़ करने में आसानी हो इस कारण पेड़ों और झाड़ियों को ढका गया है.

संस्था का कहना है कि हालांकि ऐसा करने के दौरान वो चिड़ियों के घोंसले को तोड़ते हैं और उन्हें फिर से घोंसला बनाने से भी रोकते हैं लेकिन पेड़ों पर जाल लगाने को लेकर क़ानून में कोई प्रावधान नहीं हैं.

इंग्लैड की गिलफोर्ड, वॉरविकशायर और ग्लोचेस्टर और डार्लिंगटन समेत कई जगहों से पेड़ों पर जालियां लगाने की ख़बरें मिली हैं. इनमें से अधिकतर वो जगहें हैं जहां इमारतें बनाने का काम चल रहा है.

पेड़ों और झाड़ियों पर लगे नेट, जालियां

लोग कर रहे हैं विरोध

कई लोगों से इसकी निंदा की है. इसकी निंदा करने वालों में पर्यावरणविद क्रिस पैकहम भी शामिल हैं जिन्होंने इसे "भयावह" और "संरक्षण के ख़िलाफ़" कहा है.

स्थानीय लोग भी इसके विरोध में आगे आते दिख रहे हैं. डार्लिंगटन में लोगों ने सड़क किनारे की झाड़ियों और पेड़ों को हरे रिबन बांध कर विरोध जताया जिसके बाद टेस्को नाम की एक कंपनी ने नॉर्विच में एक दुकान के पास लगाई जालियां निकाल दीं.

आरएसपीबी का कहना है कि बीते 50 सालों में ब्रिटेन में 4 करोड़ पक्षी कम हुए हैं. संस्था का कहना है कि इस मुद्दे को सरकार को हल करना चाहिए.

पेड़ों और झाड़ियों पर लगे नेट, जालियां

नॉटिंघमशायर वाइल्डलाइफ़ ट्रस्ट का कहना है कि "जैसे-जैसे अधिक घर बन रहे हैं ये तरीक़ा और भी प्रचलन में आ रहा है."

इधर बिल्डरों के प्रतिनिधि समूह होम बिल्डर्स एसोसिएशन ने कहा है कि ऐसा करना कोई नई बात नहीं है लेकिन इस पर नज़र रखने के लिए ना तो कोई प्रक्रिया है ना ही कोई संस्था है.

कई बिल्डरों ने इस संबंध में सलहकारों से बात की है. होम बिल्डर्स फेडेरेशन के अंड्र व्हिटेकर का कहना है "स्थानीय प्रशासन से बात कर के पर्यावरण सुरक्षा से जुड़ी बातों को ध्यान में रखते हुए ही जालियां लगाई जा रही हैं और ज़रूरत पड़ने पर नए पेड़ भी लगाए जा रहे हैं."

पेड़ों और झाड़ियों पर लगे नेट, जालियां

पेड़ों पर चिड़िया घोंसला न बना सकें इसके लिए उन्हें जाली से ढकने के विरोध में कानून बनाने के लिए एक याचिका भी ब्रितानी संसद की वेबसाइट पर है. इस पर अब तक 48,000 लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं. आम तौर पर 10,000 हस्ताक्षर हो जाने पर सरकार याचिका पर गौर करती है.

इसके विरोध में लोगों ने ट्विटर पर #NestingNotNets हैशटैग के साथ एक अभियान भी शुरु किया है जिसमें जाली लगे पेड़ों की तस्वीरें साझा करने की अपील की गई है.

पेड़ों और झाड़ियों पर लगे नेट, जालियां
पेड़ों और झाड़ियों पर लगे नेट, जालियां

नॉटिंगहैमशायर वाइल्डलाइफ ट्रस्ट के उपाध्यक्ष डॉ. रॉब लैम्बर्ट का कहना है, "लोगों की नाराज़गी बताती है कि वो प्रकृति के साथ जुड़ाव महसूस करते हैं. हम देख सकते हैं कि बिल्डरों पर काम करने का दबाव है लेकिन हमें प्रकृति को आगे रख कर इसका हल खोजना होगा."

वो कहते हैं कि पूरे देश में करीब ढाई करोड़ लोग अपने बागीचों में चिड़ियों के लिए खाना डालते हैं और उनके लिए पेड़ों को ढका जाना बुरा कदम है.

वुडलाइफ़ ट्रस्ट के जैक टेलर कहते हैं कि "जाली लगाने से वन्यजीवों के प्रति सम्मान नहीं होने का पता चलता है."

"हालांकि ये ग़ैरकानूनी नहीं है लेकिन साल के इस वक्त में ऐसा करने से पक्षियों के आराम में खलल पड़ता है साथ ही प्रजनन भी प्रभावित होता है."

पेड़ों और झाड़ियों पर लगे नेट, जालियां

खाद्य और ग्रामीण मामलों के विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा है कि सरकार चाहती है विकास से "प्राकृतिक पर्यावरण को बढ़ाया जाना चाहिए" और इसके लिए बिल्डर्स को "जैव विविधता बनाए रखने" के लिए योजना पेश करनी चाहिए.

सरकार समर्थित संस्था नैचुरल इंग्लैंड का कहना है कि पेड़ों पर जाली लगाने का वो समर्थन नहीं करते लेकिन ये ज़रूरी है नियमों का पालन करने के लिए बिल्डर्स को सबसे बेहतर रास्ता अख़्तियार करना चाहिए.

पेड़ों और झाड़ियों पर नेट लगने के कारण पक्षियों पर असर पड़ा है इमेज कॉपीरइट Science Photo Library

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