पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने कहा- मुसलमानों के मामले में भारत पर छा जाती है ख़ामोशी: पाक उर्दू प्रेस रिव्यू

  • 24 मार्च 2019
न्यूजीलैंड के शहर क्राइस्टचर्च की दो मस्जिदों में हुए हमले का संदिग्ध कोर्ट में पेशी के दौरान इमेज कॉपीरइट AFP

पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते न्यूज़ीलैंड में मस्जिद में हुए हमले, मलेशिया के प्रधानमंत्री की पाकिस्तान यात्रा, पाकिस्तान दिवस, समझौता एक्सप्रेस बम धमाके केस के फ़ैसले से जुड़ी ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं.

सबसे पहले बात न्यूज़ीलैंड में हुए चरमपंथी हमले की.

न्यूज़ीलैंड के क्राइस्टचर्च शहर में शुक्रवार (15 मार्च) को एक मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे मुसलमानों पर अंधाधुन गोली चलाकर एक व्यक्ति ने 50 लोगों की जान ले ली थी. मरने वालों में नौ पाकिस्तानी भी थे. दुनिया भर के अख़बारों की तरह पाकिस्तान के अख़बारों में भी ये ख़बर पूरे सप्ताह सुर्ख़ियों में रही.

पाकिस्तान ने दुनिया भर में इस्लाम धर्म से बढ़ रही नफ़रत को कम करने और उस पर क़ाबू पाने के लिए मलेशिया और तुर्की के साथ मिलकर तीन देशों का एक संयुक्त फ़्रन्ट बनाने का सुझाव दिया है.

अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार पाकिस्तान की यात्रा पर आए मलेशिया के प्रधानमंत्री महातीर मोहम्मद के साथ संयुक्त प्रेसवार्ता में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा कि मुसलमानों के ख़िलाफ़ ख़ौफ़ और दुश्मनी फैलाई जा रही है और इससे लड़ने के लिए पाकिस्तान, मलेशिया और तुर्की को साथ आना होगा.

इस मौक़े पर महातीर मोहम्मद ने कहा कि इस्लाम से नफ़रत का जवाब ताक़त से नहीं मोहब्ब्त से देना चाहिए.

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भारत की आलोचना

पाकिस्तान ने न्यूज़ीलैंड मस्जिद हमले पर भारत के रुख़ की भी आलोचना की.

अख़बार एक्सप्रेस के मुताबिक़ पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि भारत एक तरफ़ तो इस्लामी देशों के संगठन ओआईसी का हिस्सा बनना चाहता है लेकिन मुसलमानों के मामले में जब बोलने का मौक़ा आता है तो भारत पर ख़ामोशी छा जाती है. कुरैशी ने कहा कि क्राइस्टचर्च मस्जिद पर हुए हमले की निंदा करते हुए भी भारत ने न तो मस्जिद का ज़िक्र किया और न ही एक बार भी मुसलमानों का नाम लिया.

शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जनरल एसेंम्बली का विशेष अधिवेशन बुलाकर इस्लामोफ़ोबिया पर प्रभावी क़ानून बनाया जाना चाहिए.

अख़बार जंग के अनुसार न्यूज़ीलैंड मस्जिद में हुए हमले के बाद इस्लामी देशों के समूह ओआईसी की कार्यकारिणी समिति की आपात बैठक को संबोधित करते हुए क़ुरैशी ने ये बातें कहीं. क़ुरैशी ने कहा कि ओआईसी की बैठक में जो छह प्रस्ताव पास किए गए उनमें चार प्रस्ताव पाकिस्तान की तरफ़ से आए थे.

अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार ओआईसी ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा है कि इस्लाम के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने वालों को भी दहश्तगर्द क़रार दिया जाए.

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सुर्खियों में मोदी का संदेश

पाकिस्तान हर साल 23 मार्च को पाकिस्तान दिवस मनाता है. दरअसल 23 मार्च 1940 को लाहौर अधिवेशन में मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए भारत से अलग एक देश बनाने का प्रस्ताव पास किया था. 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद वहां हर साल 23 मार्च को पाकिस्तान दिवस मनाया जाता है.

भारत ने एक तरफ़ तो इस दिन होने वाले किसी भी तरह के आयोजन का बहिष्कार किया था, दूसरी तरफ़ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान ख़ान को बधाई संदेश भेजा था. पाकिस्तान के सभी अख़बारों ने इसे प्रमुखता से छापा था.

अख़बार जंग के अनुसार नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग में मनाए गए पाकिस्तान दिवस के जश्न में भारत सरकार का कोई भी प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ और न ही इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग का कोई अधिकारी पाकिस्तान में मनाए गए जश्न में शामिल हुआ.

वहीं अख़बार दुनिया के अनुसार इमरान ख़ान ने ट्वीट के ज़रिए मोदी के संदेश को सार्वजनिक किया. इमरान ख़ान ने मोदी के संदेश का स्वागत करते हुए कहा कि समय आ गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच समग्र वार्ता शुरू की जाए.

पाकिस्तान दिवस के मौक़े पर सभी अख़बारों में संपादकीय और विशेष लेख छपे हैं. अख़बार नवा-ए-वक़्त में क़य्यूम निज़ामी ने एक लेख लिखा है जिसमें वो कहते हैं कि पाकिस्तान को एक नए प्रस्ताव की ज़रूरत है. उनके अनुसार 22 करोड़ पाकिस्तानियों को लाहौर स्थित मीनार-ए-पाकिस्तान पर जमा होकर एक नए प्रस्ताव को पारित करना चाहिए. वहीं शाहिद रशीद ने एक लेख लिखा है जिसमें वो कहते हैं कि लाहौर प्रस्ताव अभी अधूरा है और जब तक कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाकर ही प्रस्ताव को पूरा किया जा सकता है.

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फ़ैसले पर नाराज़गी

फ़रवरी 2007 में भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में धमाका हुआ था जिसमें 70 लोग मारे गए थे. मरने वालों में 43 पाकिस्तानी नागरिक थे.

इस मामले में चारों अभियुक्तों को भारत की अदालत ने सुबूत न होने की बुनियाद पर बरी कर दिया है.

पाकिस्तान ने इस पर सख़्त नाराज़गी जताई है. अख़बार दुनिया ने इस पर संपादकीय लिखा है. अख़बार लिखता है कि इस फ़ैसले से भारत की न्यायिक प्रणाली की क़लई खुल गई है.

अख़बार के अनुसार भारत की सरकार पाकिस्तान से ये मांग करती रही है कि वो मुंबई हमले में शामिल लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करे लेकिन ख़ुद उसकी अपनी हालत ये है कि भारत की अदालत अपने गुनाह क़ुबूल करने वाले को भी रिहा करने पर मजबूर है.

अख़बार आगे लिखता है कि भारतीय अदालत का ये फ़ैसला पूरे क्षेत्र में दहश्तगर्दी के ख़िलाफ़ जारी मुहिम पर नकारात्मक असर डालेगा.

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