मर्दों की नज़र से बचने के लिए ब्रेस्ट आयरनिंग

  • 28 मार्च 2019
सीने पर पट्टा बांधे एक लड़की इमेज कॉपीरइट Getty Images
Image caption कुछ लड़कियों के सीने पर एक बेहद कसा पट्टा भी बांध दिया जाता है

ब्रेस्ट आयरनिंग यानी छाती को गरम प्रेस से दबा देना.

इस परंपरा के तहत लड़कियों के सीने को किसी गरम वस्तु से दबा दिया जाता है ताकि उनके उभार देर से निकलें. ये सब इसलिए किया जाता है कि वो मर्दों का ध्यान न खींच सकें.

ये परंपरा मूल रूप से पश्चिमी अफ़्रीका में शुरू हुई लेकिन अब ब्रिटेन समेत कुछ अन्य यूरोपीय देशों तक पहुंच गई है.

यही वजह है कि ब्रिटेन की नेशनल एजुकेशन यूनियन ने कहा है कि ब्रेस्ट आयरनिंग के बारे में जागरुकता को स्कूली पाठ्यक्रम में ज़रूरी किया जाए ताकि लड़कियों को इससे बचाया जा सके.

'रोने नहीं दिया गया'

किनाया (जिनका नाम हमने बदल दिया है) ब्रिटेन में रहती हैं. उनका परिवार पश्चिमी अफ़्रीका से यहां आया है. ब्रेस्ट आयरनिंग की शुरुआत भी इसी इलाक़े से हुई थी.

जब वो दस साल की थीं तब उन्हें भी इस प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा.

वो बताती हैं कि उनकी मां ने उनसे कहा था "अगर मैंने इन्हें नहीं दबाया तो पुरुष तुम्हारे पास सेक्स करने के लिए आने लगेंगे."

अधिकतर मामलों में मांएं ही अपनी बेटियों की ब्रेस्ट आयरनिंग करती हैं.

इस प्रक्रिया के तहत एक पत्थर या चम्मच को आग की लपटों पर गरम किया जाता है और फिर बच्चियों की छाती को इससे दबा दिया जाता है जिससे वो समतल हो जाती हैं.

ये प्रक्रिया कई बार महीनों तक चलती है.

किनाया कहती हैं, ये वो दर्द है जिसका अहसास समय के साथ भी नहीं जाता है. "आपको रोने भी नहीं दिया जाता है. अगर आप रोती हैं तो माना जाता है कि आपने परिवार को शर्मिंदा किया है, आप एक मज़बूत बेटी नहीं हैं."

Image caption किनाया अपनी बेटी के साथ

किनाया अब वयस्क हैं और उनकी अपनी बेटियां हैं. जब उनकी सबसे बड़ी बेटी दस साल की हुई तो उनकी मां ने उसकी ब्रेस्ट आयरनिंग का सुझाव दिया.

वो बताती हैं, "मैंने कह दिया कि मेरी किसी बच्ची को इस दर्दनाक प्रक्रिया से नहीं गुज़रना पड़ेगा क्योंकि मुझे आज भी उस दर्द का अहसास होता है."

अब वो अपने परिवार से अलग रहती हैं. उन्हें लगता है कि उनकी मर्ज़ी के बिना भी उनकी बेटियों को इस परंपरा में झोंका जा सकता है और इसी डर से वो अब सबसे अलग रह रही हैं.

एक अनुमान के मुताबिक ब्रिटेन में भी क़रीब एक हज़ार लड़कियों को इस प्रक्रिया से गुज़रना पड़ा है.

लेकिन जहां एक ओर फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन यानी एफ़जीएम (महिला खतना) के ख़िलाफ़ जागरुकता बढ़ रही है, ऐसा डर भी है कि कम ही लोग ब्रेस्ट आयरनिंग के बारे में जानते हैं.

एक महिला ने बीबीसी के कार्यक्रम में बताया कि उसे तब ये अहसास हुआ कि ब्रेस्ट आयरनिंग सामान्य बात नहीं है जब उसने देखा कि उसकी सहपाठियों के शरीर उससे अलग हैं.

इस महिला का कहना है कि शारीरिक शिक्षा क्लास के दौरान ये पता चलने पर उसे मानसिक अवसाद हो गया था.

जब वो आठ साल की थी तब से उसकी बहन उसकी ब्रेस्ट को आयरन कर रही थी, उसने शारीरिक शिक्षा की कक्षा में रूचि लेना बंद कर दिया था. लेकिन उसके शिक्षकों को इस बारे में पता नहीं चल सका.

वो कहती हैं, "अगर मेरी शारीरिक शिक्षा की टीचर को इस बारे में पता होता तो मुझे उस दौरान मदद मिल सकती थी."

नेशनल एजुकेशन यूनियन की सह-अध्यक्ष कीरी टुंक्स ने अब स्कूली कर्मचारियों, ख़ासकर शारीरिक शिक्षा अध्यापकों को इस बारे में प्रशिक्षित करने का आह्वान किया है ताकि वो इसके संकेत पहचान सकें.

वो चाहती हैं कि इस विषय को भी स्कूली शिक्षा में ऐसे ही शामिल किया जाए जैसे साल 2020 के बाद से एफ़जीएम को शामिल किया जाएगा.

माध्यमिक स्कूल में सेक्स शिक्षा की क्लास में इस विषय को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा.

उनका कहना है कि ब्रेस्ट आयरनिंग जैसे मुद्दे का सामना किया जाना चाहिए, इसका समाधान खोजा जाना चाहिए और ऐसी परंपराओं को रोका जाना चाहिए.

वो कहती हैं कि जैसे जैसे शोषण के नए तरीकों के बारे में पता चलता है, स्कूली पाठ्यक्रम को भी उसी हिसाब से बदला जाना चाहिए.

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Image caption इस तरह के पत्थर को गर्म करके ब्रेस्ट आयरनिंग की जाती है

सीमोन नाम की एक महिला ने विक्टोरिया डर्बीशायर कार्यक्रम में कहा कि तेरह साल की उम्र में उसकी ब्रेस्ट आयरनिंग की गई थी. इस दौरान उसकी मां को उसके गे होने का पता चला था.

उन्होंने बताया, "मैं अपने ब्रेस्ट की वजह से आकर्षक लगती थी और अगर वो मेरे ब्रेस्ट को दबा देती तो शायद मैं भद्दी लगने लगती और फिर कोई मेरी तारीफ़ नहीं करता."

सिमोन का कहना है कि कई महीनों तक उसके ब्रेस्ट को आयरन किया गया.

कई अन्य लड़कियों की तरह उन्हें भी एक बेहद कसा पट्टा सीने पर बांधने के लिए मजबूर किया जाता ताकि छातियों के उभार को दबाया जा सके.

वो कहती हैं कि इस वजह से वो सांस नहीं ले पाती थीं.

कुछ साल बाद, उनकी ज़बरन शादी करवा दी गई और उन्होंने बच्चे को जन्म दिया. तब उन्हें महसूस हुआ कि उनका कितना नुक़सान हो चुका है. "दूध पिलाते वक़्त ऐसा लगता है जैसे भीतर कोई गांठ हो. ऐसा लगता है जैसे कुछ नसें बर्बाद हो गई हों."

छुपा हुआ अपराध

ब्रेस्ट आयरनिंग क़ानून की भाषा में कोई अपराध नहीं है लेकिन ब्रितानी गृह मंत्रालय इसे बच्चों के शोषण की श्रेणी में रखता है और ऐसे मामले में सामान्य क़ानूनों के तहत मुक़दमा चलाया जा सकता है.

ब्रिटिश पुलिस के साथ सुरक्षा लेक्चरर के तौर पर काम करने वाली पूर्व स्त्री रोग संबंधी नर्स एंजी मैरियट कहती हैं कि ब्रिटेन में इस परंपरा के बारे में सटीक जानकारी नहीं है क्योंकि बहुत से मामले पुलिस तक पहुंच ही नहीं पाते हैं.

वो इसे एक संवेदनशील और छुपा हुआ अपराध कहती हैं क्योंकि महिलाएं इस बारे में सामाजिक दबाव के चलते बोलने से डरती हैं. उन्हें डर होता है कि अगर वो इस बारे में बात करेंगी तो समाज उन्हें अलग कर देगा.

वो कहती हैं, "मैं जानती हूं कि ये हो रहा है क्योंकि कई पीड़िताओं ने इस बारे में मुझे बताया है. और वो कहती हैं कि ये पहली बार है जब उन्होंने इस बारे में किसी से बात की है और उन्हें इसके बारे में बात करते हुए शर्म आती है."

Image caption एंजी मैरियट

सीमोन के शरीर पर अभी भी इस शोषण के निशान हैं और वो चाहती हैं कि किसी और को इससे न गुज़रना पड़े. वो इस अपराध के बारे में जागरुकता फैला रही हैं.

वो कहती हैं, "ये एक तरह का शोषण है. इसमें दर्द होता है. ये आपको अमानवीय कर देता है. ऐसा लगता है जैसे आप इंसान ही नहीं हैं."

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