ब्रेक्सिट प्रस्ताव तीसरी बार ख़ारिज: अब आगे क्या?

  • 30 मार्च 2019
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ब्रितानी सांसदों ने यूरोपीय संघ यानी ईयू से बिना किसी समझौते के बाहर निकलने के प्रस्ताव को 286 के मुक़ाबले 344 वोटों से ख़ारिज कर दिया है.

इससे पहले ब्रितानी संसद में ईयू से ब्रिटेन के अलग होने के दो प्रस्तावों को ख़ारिज कर दिया गया था. अब तीसरी बार भी टेरीज़ा मे का प्रस्ताव सांसदों ने खारिज़ कर दिया है.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि अब आगे क्या होगा?

एक अप्रैल को ब्रितानी संसद के निचले सदन हाउस ऑफ़ कॉमन्स की ब्रेक्सिट से जुड़े अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए बैठक होगी. इससे पहले 27 मार्च को भी हाउस ऑफ़ कॉमन्स ने ब्रेक्सिट को लेकर बैठक की थी, लेकिन शुक्रवार को इस प्रस्ताव को संसद में ख़ारिज कर दिया गया.

अगर इस बार भी सांसद किसी ऐसे विकल्प को नहीं ढूंढ़ पाते हैं जो सर्वमान्य हो तो ये संभव है कि ब्रेक्सिट में और देरी होगी. इसका मतलब है कि ब्रिटेन मई में होने वाले यूरोपीय यूनियन के संसदीय चुनाव का हिस्सा होगा.

यूरोपीय यूनियन के अध्यक्ष डोनॉल्ड टस्क ने 10 अप्रैल को यूरोपीय काउंसिल की बैठक बुलाने का ऐलान किया है.

इन परिस्थितियों के मद्देनज़र अगर ब्रेक्सिट प्रस्ताव फिर ख़ारिज हो जाता है तो आगे क्या हो सकता है ये समझिए.

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कोई डील नहीं

अगर कुछ नहीं होता है, तो अपने आप एक स्थिति आ जाएगी जिसे 'नो डील' कहा जा रहा है.

वर्तमान स्थिति के मुताबिक़ अगर 12 अप्रैल तक संसद में आम सहमति नहीं बन पाती है तो ब्रिटेन ख़ुद-ब-ख़ुद यूरोपीय यूनियन से बाहर हो जाएगा.

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पीएम की डील के साथ ब्रेक्सिट

कई बार ख़ारिज किए जा चुके प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे के डील के साथ ब्रेक्सिट भी एक विकल्प हो सकता है.

अगर सांसद कई बैठकों के बाद भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाते हैं और दूसरी योजना नहीं बना पाते हैं तो उन्हें दोबारा प्रधानमंत्री मे के प्रस्ताव पर विचार करना होगा.

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Image caption ब्रिटिश संसद

नए सिरे से मोल-तोल

चूंकि सांसदों ने समझौते को नकार दिया है, तो अब सरकार यूरोपीय संघ के साथ नए सिरे से चर्चा का सुझाव रख सकती है.

मगर इसमें समय लगेगा और इसके लिए 12 अप्रैल की समयसीमा बढ़ाने की ज़रूरत हो सकती है.

29 मार्च 2017 वो दिन था जब ब्रिटेन सरकार ने आर्टिकल 50 लागू किया था जिसके तहत ठीक दो साल बाद ब्रेक्सिट लागू होना था लेकिन ब्रिटेन में इस पर कोई आम सहमति नहीं बन सकी है.

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दोबारा जनमत संग्रह

सरकार ब्रेक्सिट पर दोबारा जनमत संग्रह करवाने का भी फ़ैसला कर सकती है पर वो भी अपने आप नहीं हो सकता.

इसके लिए भी नियम क़ानून बने हैं.

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हालांकि टेरीज़ा मे इस संभावना से इनकार कर चुकी हैं. उनका मानना है कि इसके लिए सहमति बना पाना काफ़ी मुश्किल होगा.

लेकिन अगर ये फ़ैसला हो जाता है तो भी ये जनमत संग्रह तत्काल नहीं हो सकता. इसके लिए चुनाव और जनमत संग्रह एक्ट 2000 के नियमों का पालन करना होगा.

वक़्त से पहले चुनाव

टेरीज़ा मे ब्रेक्सिट मुद्दे को देश में वक़्त से पहले चुनाव करवा कर हल कर सकती हैं.

हालांकि टेरीज़ा मे केवल अपने बूते पर दोबारा चुनाव नहीं करवा सकतीं. हां, दो तिहाई सांसदों के समर्थन से समय से पहले चुनाव करवाया जा सकता है.

चुनाव के लिए जल्द से जल्द तारीख़ भी 25 दिनों के बाद ही संभव हो सकेगी.

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दोबारा अविश्वास प्रस्ताव

इस साल जनवरी में ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे के ख़िलाफ़ संसद में लाया गया अविश्वास प्रस्ताव गिर गया. 325 सांसदों ने सरकार का साथ दिया और 306 सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था.

अगर लेबर पार्टी चाहे तो अविश्वास प्रस्ताव दोबारा ला सकती है. फिक्स्ड टर्म पार्लियामेंट एक्ट 2011 के तहत, यूके के आम चुनाव केवल हर पांच साल में होने चाहिए. जिसके मुताबिक अगले चुनाव 2022 में होने वाले हैं. लेकिन अविश्वास प्रस्ताव में सांसद इस बात पर वोट कर सकते हैं कि वो ये सरकार जारी रखना चाहते हैं या नहीं.

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अन्य संभावनाएं

टेरीज़ा मे ने कहा है कि अगर उनकी ब्रेक्सिट डील पारित हो जाती है तो अपने पद से इस्तीफ़ा दे देंगी.

ब्रितानी संसद में विश्वास मत हासिल कर चुकी टेरीज़ा को कंजरवेटिव पार्टी के नियमों के तहत दिसंबर तक पार्टी उन्हें पद से नहीं हटा सकती.

लेकिन मे अभी भी इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला कर सकती हैं. ऐसा होता है तो कंज़र्वेटिव पार्टी को नया प्रधानमंत्री चुनना होगा.

यदि सांसदों ने 'सेंसर प्रस्ताव' पारित किया, तो टेरीज़ा मे पर इस्तीफ़ा देने का दबाव बन सकता है. सेंसर प्रस्ताव भी अविश्वास प्रस्ताव जैसा ही होता. अगर ऐसा होता है तो भी प्रधानमंत्री बदलना होगा या देश की सरकार को बदलना पड़ सकता है.

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