इसराइलः नेतन्याहू 5वीं बार पीएम बनने की ओर

  • 10 अप्रैल 2019
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इसराइल के आम चुनावों में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के पांचवीं बार प्रधानमंत्री बनना लगभग तय लग रहा है.

लगभग 95 प्रतिशत से ज़्यादा वोटों की गिनती हो चुकी है जिसमें उनकी लिकुड पार्टी आगे चल रही है. हालाँकि उन्हें स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा मगर ऐसा लग रहा है कि अपनी सहयोगी पार्टियों की सहायता से नेतन्याहू दोबारा सरकार बनाने में कामयाब रहेंगे.

अगर ऐसा होता है तो वो इसराइल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले व्यक्ति बन जाएंगे.

अभी तक ये रिकॉर्ड देश के संस्थापक डेविड बेन गूरिओन के नाम है.

संसद की 120 सीटों में लिकुड और दक्षिणपंथी गठबंधन 65 सीटों के साथ सबसे बड़ा ब्लॉक बनकर उभरा है.

इधर आधिकारिक नतीजे आने से पहले अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू को मुबारकबाद दी है और कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि नेतन्याहू के आने के बाद इसराइल और फ़लस्तीन के बीच शांति बहाल करने की बेहतर संभावनाएं बनेंगी.

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वैसे लिकुड पार्टी और नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पूर्व सेनाध्यक्ष बन्नी गंट्ज़ की ब्लू एंड व्हाइट अलायंस को कमोबेश बराबर सीटें मिली हैं.

बन्नी गंट्ज़ ने बुधवार को चुनाव में अपनी हार स्वीकार कर ली है. उनकी पार्टी से फनके प्रतिनिधि ने कहा है विपक्ष के तौर पर वो सरकार से मुश्किल सवाल करते रहेंगे.

यैर लापिड ने कहा, "इस बार का मुकाबला हम जीत नहीं पाए लेकिन विपक्ष में होते हुए हम लिकुड पार्टी के लिए ज़िंदगी मुश्किल बनाएंगे."

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Image caption पूर्व सेनाध्यक्ष बन्नी गंट्ज़ ने मध्यमार्गी पार्टी बनाकर नेतन्याहू को कड़ी चुनौती दी.

निर्णायक जीत

इसे पहले एक्ज़िट पोल में अनुमान जताया गया था कि दोनों पार्टियों के बीच कड़ी टक्कर है और किसी को स्पष्ट जीत नहीं मिल रही.

मंगलवार की रात दोनों नेताओं ने अपनी जीत का दावा किया. नेतन्याहू ने अपने समर्थकों से कहा, "ये दक्षिणपंथी सरकार होगी, लेकिन मैं प्रधानमंत्री बनूंगा."

उन्होंने कहा, "मैं बहुत प्रभावित हूं कि इसराइल के लोगों ने मुझे पांचवीं बार भरोसा जताया है और पिछले चुनावों के मुकाबले अधिक वोट मिले हैं."

उन्होंने कहा, "मैं इसराइल के सभी नागरिकों का प्रधानमंत्री बनना चाहता हूं. दक्षिण, वाम, यहूदी, गैर यहूदी, इसराइल के सभी नागरिकों का. "

आनुपातिक प्रतिनिधित्व पार्टी सिस्टम में इसराइल के इतिहास में अभी तक किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है और यहां हमेशा गठबंधन सरकारें ही बनी हैं.

बीबीसी के मध्यपूर्व संवाददाता टॉम बेटमैन के अनुसार, पहले एक्ज़िट पोल के बात बेन्नी गंट्ज़ के खेमे में जश्न की ख़बरें थीं. उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि देश में एक नई मध्यमार्गी सरकार बनेगी.

लेकिन जैसे जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ी, नेतन्याहू की जीत और साफ़ होती गई.

ऐसा लगता है कि नेतन्याहू की लिकुड पार्टी, दक्षिणपंथी राष्ट्रवादी और धार्मिक पार्टियों के गठबंधन से सत्ता में वापसी करने में सफल होगी.

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