नॉट्र डाम: वो बेशकीमती खज़ाना जिसने चर्च को नायाब बनाया

  • 16 अप्रैल 2019
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एक भयानक आग ने पेरिस के सदियों पुराने नॉट्र डाम चर्च को अपने आगोश में ले लिया.

आग से इसकी छत और मुख्य मीनार गिर गई और इसने बाकी ढांचे के लिए भी ख़तरा पैदा कर दिया है.

पेरिस के डिप्टी मेयर इमैनुएल ग्रेग्वॉर ने कहा कि 'चर्च को भारी नुकसान हुआ है और आपातकालीन सेवाएं चर्च में रखी गईं कलाकृतियों और बेशकीमती चीजों को सहेजने की कोशिश कर रहे हैं.'

चर्च में लकड़ी की बनी सजावट ख़ाक हो चुकी है. लेकिन 850 साल पुराने गोथिक शैली के इस चर्च में और क्या है जो इसे पेरिस की सबसे शानदार धरोहरों में से एक बनाता है?

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रोज़ विंडो

चर्च में 13 वीं सदी के बने तीन गुलाब की आकृति वाली खिड़कियां हैं, जो यहां की सबसे बड़ी ख़ासियत है.

पहली और सबसे छोटी खिड़की मुख्य द्वार के सामने है जिसे सन् 1225 के आस पास बनाया गया और जिस तरह से पत्थरों के साथ कांच जुड़े हैं, वो वाकई शानदार है.

दक्षिण खिड़की का ब्यास 43 फ़ुट है और इसमें 84 पैनल लगे हुए हैं.

चर्च के प्रवक्ता एंड्रे फ़िनट ने बीएफ़एमटीवी को बताया कि 'ऐसा लगता है कि इन खिड़कियों को आग से कोई नुकसान नहीं पहुंचा है, हालांकि इमारत की जर्जर हालत को देखते हुए इनको लेकर चिंता बनी हुई है.'

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दो टॉवर

नॉट्र डाम आने वाले अधिकांश पर्यटक इन दो गोथिक टॉवरों को देखने के लिए ज़रूर रुकते हैं, जोकि चर्च के पश्चिमी हिस्से के सामने का भाग है.

इस हिस्से का काम 1200 ईस्वी में शुरू हुआ था लेकिन उत्तर में स्थित पहला टॉवर इसके 40 साल बाद तक भी पूरा नहीं हो पाया था.

इसके 10 साल बाद 1250 में दक्षिणी टॉवर का काम पूरा हुआ.

दोनों टॉवरों की ऊंचाई 68 मीटर है. इनकी 387 सीढ़ियों को चढ़ने के बाद पेरिस का ख़ूबसूरत नज़ारा दिखता है.

अधिकारियों का कहना है कि दोनों टॉवर सुरक्षित हैं.

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'गारगोयल'

जो व्यक्ति इतनी सीढ़ियां चढ़ने में खुद को सक्षम महसूस करता है और पूरे पेरिस का नज़ारा लेना चाहता है उसे इस चर्च की एक और विशेषता, 'गारगोयल', से होकर गुजरना पड़ेगा.

ये एक मिथकीय किरदार की मूर्ति है जो कई जानवरों की आकृति को मिलाकर बनाई गई है.

जो सबसे प्रसिद्ध गारगोयल है वो इस चर्च के शीर्ष पर है और लगता है कि वो शहर की ओर देख रहा है.

घंटियां

चर्च में 10 बड़ी घंटियां हैं. सबसे बड़ी घंटनी का वज़न 23 टन है और 1685 में ये बनकर तैयार हुई. इसे इमैनुएल के नाम से जाना जाता है.

साल 2013 में चर्च ने अपने 850 साल पूरे किए और इस मौके पर उत्तरी मीनार में लगी घंटियों की मरम्मत की गई.

मूल घंटियों की हूबहू आकृति का अहसास दिलाने के लिए हर घंटी का नाम एक संत के नाम पर रखा गया है.

मूल घंटियों को फ़्रांसीसी क्रांति के दौरान तोप के गोले बनाने के लिए पिघला दिया गया था.

मशहूर लेखक विक्टर ह्यूगो ने 1831 में इसी चर्च पर आधारित एक किताब लिखी थी, 'हंचबैक ऑफ़ नॉट्र डाम.'

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गोथिक मीनारें

नॉट्र डाम की सबसे ऊंची मीनार सोमवार की आग में गिर गई. इसे 12वीं सदी में बनाया गया था.

इमारत के इतिहास में इसमें कई बदलाव हुए थे. फ़्रांसीसी क्रांति में इसे ध्वस्त कर दिया गया था, 1860 के दशक में इसे फिर बनाया गया.

रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ़ ब्रिटिश आर्किटेक्ट्स के अनुसार, "नॉट्र डाम की छत और मीनार का गिरना और संभवतया पत्थर का गुंबद भी, ये फ़्रांसीसी गोथिक स्थापत्य कला की धरोहर की अपूर्णीय क्षति है."

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निशानियां

नॉट्र डाम ईसा मसीह से जुड़ी बेशकीमती निशानियों का गढ़ भी है. यहां कांटों का पवित्र ताज भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि सूली पर चढ़ाने से पहले ईसा मसीह ने पहना था. बताया जाता है कि कांटों के ताज को आग से बचा लिया गया है.

पेरिस की मेयर एने हिडाल्गो ने ट्वीट किया, "बेशकीमती कलाकृतियों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए आग बुझाने वाले कर्मचारियों, पुलिस और आम लोगों ने मानव शृंखला बनाई थी, मसलन ट्यूनिक और ताज. कहा जाता है कि इसे किंग लुईस (9वें) पहनते थे."

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Image caption बचाई गई कलाकृतियों को सिटी हॉल में रखा गया है.

लेकिन बीबीसी यूरोप के संवाददाता केविन कोनोली ने कहा कि अग्निशमन कर्मियों ने बताया कि चर्च के अंदर कुछ पेंटिंग बहुत भारी थीं, जिन्हें दीवारों से उतारना मुश्किल था.

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चर्च में तीन विशाल वाद्य यंत्र ते, जिनमें 8000 पाइप वाला ग्रेड ऑर्गन भी था, जिसे 1401 में बनाया गया और 18वीं और 19वीं सदी में उसका पुनरनिर्माण किया गया था.

लेकिन तमाम मरम्मत और बदलावों के बाद भी इसमें कुछ पाइप ऐसे भी हैं जो मध्ययुग में बनाए गए थे.

डिप्टी मेयर इमैनुएल ग्रेग्वॉर ने फ़्रांसीसी न्यूज़ चैनल बीएफ़एमटीवी को बताया कि ये वाद्य यंत्र सुरक्षित है.

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Image caption आग बुझाने के बाद चर्च के अंदर का दृश्य.

इस वाद्य यंत्र को बजाने वाले जोहान वेक्सो उस समय चर्च में ही इसे बजा रहे थे जब ख़तरे की घंटी बजी.

उन्होंने बीबीसी रेडियो-4 के कार्यक्रम में बताया, "ये पूरी दुनिया का सबसे मशहूर वाद्य यंत्र है. ये बेहद आश्चर्यजनक और शानदार था, इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. इसके साथ होना हर बार एक अनोखा अनुभव होता था."

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