श्रीलंका धमाकेः मृतकों की सामूहिक अंत्येष्टि, शोक में डूबा देश

  • 23 अप्रैल 2019
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श्रीलंका में रविवार को चर्चों और होटलों में हुए आठ बम धमाकों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 310 हो गई है.

मारे गए लोगों के सामूहिक अंतिम संस्कार का पहला चरण मंगलवार को शुरू हो गया. पूरे देश में तीन मिनट का मौन रखा गया और आगे किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए इमरजेंसी लगा दी गई है.

इस्लामिक स्टेट ने तीन दिन बाद मंगलवार को अपने मीडिया पोर्टल 'अमाक़' के ज़रिए इन हमलों की ज़िम्मेदारी ली है.

अमाक़ में दावा किया गया है, "परसों जिन हमलावरों ने (इस्लामिक स्टेट विरोधी, अमरीका नीत गठबंधन) के नागरिकों और श्रीलंका के ईसाईयों को निशाना बनाया था वो इस्लामिक स्टेट के लड़ाके थे."

महत्वपूर्ण बात ये है कि इससे पहले इस्लामिक स्टेट जब भी किसी घटना की ज़िम्मेदारी लेता था, तो वो तुरंत लेता था और 'अमाक़' पर हमलावरों की तस्वीरें जारी करता था, लेकिन इस बार उसने ऐसा नहीं किया है.

इन दावों को लेकर बीबीसी के पास इसके कोई सबूत नहीं हैं जिससे ये साबित किया जा सके कि कौन ज़िम्मेदार है और इस दावे को आईएस के शामिल होने के संकेत के तौर पर नहीं लेना चाहिए.

पुलिस के मीडिया विभाग ने बताया है कि 500 लोग घायल हैं. अधिकारियों का कहना है कि ये बम धमाके किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की मदद से कराए गए.

राजधानी कोलंबो में एक आत्मघाती बम दस्ते की गाड़ी आने की ख़बर के बाद पूरे कोलंबो में पुलिस थानों को अलर्ट जारी कर दिया गया है.

कोलंबो में बीबीसी तमिल रिपोर्टर ने कहा कि पुलिस की मीडिया यूनिट ने इस बात की पुष्टि की है. सभी नागरिकों को सचेत रहने को कहा गया है.

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सरकार ने इसके लिए एक स्थानीय जेहादी गुट - नेशनल तौहीद जमात - का नाम लिया है.

मामले में अब तक 40 लोग हिरासत में लिए जा चुके हैं. इनमें से 26 लोगों पर आपराधिक मामले दर्ज कर जांच की जा रही है, इनसे सीआईडी पूछताछ कर रही है.

गिरफ़्तार किए गए लोगों में से सिर्फ नौ को अदालत में पेश किया गया है. ये नौ लोग वेल्लमपट्टी की एक ही फ़ैक्ट्री में काम करते हैं.

बीबीसी सिंघला संवाददाता अज़्ज़ाम अमीन ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के हवाले से कहा कि पुलिस स्थानीय इस्लामिक चरमपंथी ग्रुप नेशनल तौहीद जमात से जुड़े लोगों की तलाश कर रही है.

रविवार को हुए आठ धमाके

  • 310 लोगों की मौत, 500 घायल.
  • तीन चर्च और चार होटलों में धमाके.
  • अब तक 38 संदिग्ध गिरफ़्तार.
  • किसी गुट ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली.
  • सरकार ने कहा कि हमले आत्मघाती थे, विदेश से जुड़े हो सकते हैं तार.
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बढ़ा विवाद

इससे पहले पुलिस के अनुसार एक चर्च के बाहर एक वैन में विस्फोटकों को निष्क्रिय करते वक़्त उसमें धमाका हो गया. उन्होंने बताया कि ये वैन हमलावरों की थी जिन्होंने एक दिन पहले इस चर्च को निशाना बनाया था. धमाके की आवाज़ के बाद वहाँ मौजूद लोग दहशत में आकर भागने लगे.

इस बीच हमले की पहले से ही चेतावनी मिलने के बाद सरकार की ओर से कोई क़दम न उठाने के आरोपों पर श्रीलंका में हंगामा मचा हुआ है.

राष्ट्रपति सिरीसेना के सलाहकार शिराल लकथिलाका ने बीबीसी से कहा है कि इस बात की जांच होगी कि सरकार की ओर से कोई चूक हुई है या नहीं,

इससे पहले श्रीलंका के एक वरिष्ठ मंत्री रजित सेनारत्ने ने कोलंबो में पत्रकारों से कहा कि अंतरराष्ट्रीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने ऐसे किसी हमले की चेतावनी दी थी मगर ये सूचना प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे तक नहीं पहुँच सकी.

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मंत्री ने कहा कि ये हमले बिना किसी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के लिप्त हुए मुमकिन नहीं लगता.

पुलिस के अनुसार अब तक 38 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है मगर अभी ये पता नहीं है कि हमलों के पीछे कौन है.

मृतकों में 38 विदेशी नागरिक हैं. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इनमें दस भारतीय शामिल हैं.

भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रविवार को भारत की लक्ष्मी, नारायण चंद्रशेखर और रमेश की मौत की पुष्टि की थी. जबकि केरल के मुख्यमंत्री ने एक अन्य भारतीय नागरिक पीएस रासीना का नाम मृतकों में जोड़ा था.

इसके अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी ने जनता दल सेक्यूलर के चार कार्यकर्ताओं के भी मारे जाने की पुष्टि की है.

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आत्मघाती हमले

मामले में गिरफ़्तार किए गए सभी लोग श्रीलंका के ही नागरिक हैं. इन लोगों के किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन से संपर्कों की भी जांच की जा रही है. अभी तक किसी भी संगठन ने इन धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

प्रधानमंत्री का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि संभावित हमलों के बारे में पुलिस के पास पहले से जानकारी थी लेकिन कैबिनेट को इस बारे में जानकारी नहीं दी गई थी.

हमलों के बाद रविवार को समूचे श्रीलंका में कर्फ्यू लगा दिया गया था, जिसे सोमवार सुबह हटा लिया गया. सोशल मीडिया को भी प्रतिबंधित कर दिया गया है. सोमवार रात आठ बजे से अगले दिन सुबह चार बजे तक फिर से कर्फ्यू लगाया जाएगा.

श्रीलंका के रक्षामंत्री आर विजयवर्धन का कहना है, ''ये आत्मघाती हमले हैं. ख़ुफ़िया एजेंसियों ने हमले के बारे में सूचित किया था, लेकिन इससे पहले कि उन्हें रोका जाता, धमाके हो गए. हमले की साज़िश विदेश में रची गई.''

हमलावर को देखने का दावा

नेगोम्बो में एक आदमी ने एएफ़पी को बताया कि सेंट सेबस्टियन चर्च में वो और उनकी पत्नी प्रार्थना में शामिल होने गए थे.

दिलीप फर्नांडो ने कहा, "लेकिन वहां बहुत भीड़ थी. मैं वहां खड़े नहीं रहना चाहता था, इसलिए मैं दूसरे चर्च में चला गया."

लेकिन दिलीप के परिवार के कुछ सदस्य चर्च के अंदर थे, विस्फ़ोट में वो बच गए लेकिन उनका मानना है कि उन्होंने आत्मघाती हमलावर को देखा था.

दिलीप के अनुसार, "प्रार्थना के बाद उन्होंने देखा कि एक युवा भारी बैग के साथ चर्च के अंदर गया. उसने मेरे दादा का सिर भी छुआ. यही हमलावर था."

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कौन हैं हमलावर?

हमले किसने किए हैं, इसे लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है. पकड़े गए लोगों को लेकर भी कुछ सार्वजनिक नहीं किया गया है.

श्रीलंका के दूरसंचार मंत्री हरिन फर्नांडो ने भी बीबीसी से बातचीत में कहा कि सरकार के पास आज हुए हमलों के बारे में ख़ुफ़िया रिपोर्ट थी.

उन्होंने कहा, "इस ख़ुफ़िया रिपोर्ट के बारे में प्रधानमंत्री को जानकारी नहीं दी गई थी. इस रिपोर्ट को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया, ये सवाल भी कैबिनेट में उठा है."

उन्होंने बताया, "ख़ुफ़िया रिपोर्ट में कहा गया है कि चार तरह से हमले हो सकते हैं. आत्मघाती बम धमाके हो सकते हैं, हथियारों से हमला हो सकता है, चाकू हमला हो सकता है या विस्फ़ोटकों से लदे ट्रक से हमला हो सकता है. इस रिपोर्ट में कुछ संदिग्धों के नाम का भी ज़िक्र है. उनके टेलिफ़ोन नंबर भी रिपोर्ट में दिए गए थे. ये आश्चर्यजनक है कि ख़ुफ़िया विभाग के पास ये रिपोर्ट थी लेकिन इस बारे में कैबिनेट या प्रधानमंत्री को नहीं पता था."

फ़र्नांडो ने कहा, "ये रिपोर्ट एक दस्तावेज़ है और ये दस्तावेज़ अब हमारे पास है. इस रिपोर्ट में कुछ नामों का भी ज़िक्र है. इसमें कुछ संगठनों के भी नाम हैं. जो मैं सुन रहा हूं उससे पता चल रहा है कि जांच सही चल रही है और हम उन लोगों तक पहुंच जाएंगे जिन्होंने ये हमले किए हैं. हमले के पीछे कौन लोग हैं और कौन समूह हैं उनकी पहचान कर ली गई है. कल शाम तक हमारे पास पूरी जानकारियां होंगी."

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लोगों को इस बार का डर है कि हमले आगे भी जारी रह सकते हैं.

श्रीलंका में अब तक कुल आठ धमाके हो चुके हैं. ईस्टर पर चर्च और होटलों को निशाना बनाया गया है.

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आठवें धमाके में तीन पुलिस अधिकारी भी मारे गए हैं. ये धमाका उस समय हुआ जब पुलिस अधिकारी कोलंबो में एक घर की तलाशी ले रहे थे.

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अभी ये पता नहीं चल पाया है कि क्या ये धमाका बम को निष्क्रिय करने की कोशिश के दौरान हुआ.

पुलिस के मुताबिक इस धमाके के सिलसिले में दो संदिग्ध लोगों को पकड़ा गया.

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कोलंबो नेशनल हॉस्पिटल ने मृतकों की संख्या की पुष्टि की है. विदेश मंत्रालय ने मृतकों में 38 विदेशी नागरिकों के शामिल होने की आशंका ज़ाहिर की है.

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तीन चर्चों और कोलंबो के तीन फ़ाइव स्टार होटलों में धमाके हुए थे.

कोच्चादाई स्थित सेंट एंथोनी, बट्टिकोला और नेगोम्बो चर्चों, जबकि कोलंबो में शांगरी ला स्टार, किंग्सबरी और सिनेमन ग्रांड होटलों में धमाके हुए.

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श्रीलंका में बम धमाके

इसके अलावा दोपहर 2 बजे भी कोलंबो में दो धमाके हुए. इनमें एक धमाका कोलंबो के डिमाटागोडा में तब हुआ जब सुरक्षाकर्मी एक घर की तलाशी ले रहे थे. इसमें तीन सुरक्षा अधिकारी मारे गए.

श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने कहा है कि धमाके की जांच सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं. उन्होंने लोगों से फ़ेक न्यूज़ पर विश्वास न करने की अपील की.

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प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने कहा कि सुरक्षा के मसले पर एक आपात बैठक बुलाई गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बम धमाकों की निंदा करते हुए ट्वीट किया है, "श्रीलंका में भयानक धमाकों की कड़ी निंदा करता हूं. इस तरह की बर्बरता कोई जगह नहीं है. भारत श्रीलंका के लोगों के साथ है. मेरी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं और घायलों के लिए प्रार्थना करता हूं."

27 विदेशी नागरिकों की मौत

ईस्टर संडे ईसाई कैलेडर में एक बड़ा पर्व होता है और इस मौके पर चर्चों में बड़े पैमाने पर प्रार्थनाएं आयोजित होती है.

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सेंट एंथोनी और अन्य चर्चों में हज़ारों लोग ईस्टर की प्रार्थना के लिए एकत्रित हुए थे.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बीबीसी सिंहला को बताया कि धमाके के बाद उसने बहुत सारे शवों को एक के ऊपर एक बिखरे देखा.

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श्रीलंका रेड क्रॉस ने ट्वीट कर कहा है कि सोशल मीडिया में रेड क्रॉस इमारत पर हमले की ख़बर प्रसारित की जा रही है, जो कि ग़लत सूचना है.

रेड क्रॉस ने लोगों से ग़लत सूचनाओं को प्रसारित करने से बचने की अपील की है.

घटना की निंदा

धमाके के बाद शहर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. घटनास्थल पर राहत और बचाव कार्य जारी है. अब तक इस हमले की किसी ने ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

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श्रीलंका के वित्त मंत्री मंगला समरवीरा ने ट्वीट किया है, "चर्चों और होटलों में ईस्टर संडे बम धमाकों में निर्दोष लोग मारे गए हैं और ऐसा लगता है कि हत्या, अफरा तफरी और अराजकता फैलाने के लिए इसे बहुत व्यस्थित तरीके से अंजाम दिया गया है."

श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति और विपक्षी नेता महिंदा राजपक्षे ने धमाकों की निंदा करते हुए इसे अमानवीय क़रार दिया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर हमले की निंदा की है.

भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट किया है, "मैं कोलंबो में भारतीय उच्चायुक्त से लगातार सम्पर्क में हूं. स्थितियों पर हम क़रीब से नज़र रखे हुए हैं."

चश्मदीद की आंखों देखी

घटना के एक चश्मदीद रौशन ने बीबीसी तमिल को बताया, "मैं अपने घर में था तभी मुझे टायर फटने जैसी आवाज़ आई, मैं घर से बाहर निकला तो मैंने धुएं का बड़ा गुबार देखा."

उन्होंने कहा, "हमने दो तीन ज़िंदा बचे लोगों को अस्पताल भेजा. मैं अंदर गया था, शायद वहां 100 लोगों की मौत हुई थी, वहां लोगों के अंगों के टुकड़ों पड़े हुए थे."

श्रीलंका में जबसे गृहयुद्ध समाप्त हुआ है, छिटपुट हिंसा की घटनाएं होती रही हैं.

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बहुसंख्यक सिंहला बौद्ध मस्जिदों और मुसलमानों की सम्पत्ति को निशाना बनाते रहे हैं. इसकी वजह मार्च 2018 में इमरजेंसी घोषित करनी पड़ी थी.

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