वो लड़की जिसे श्रीलंका पुलिस ने ग़लती से संदिग्ध बताया फिर माफ़ी मांगी

  • 27 अप्रैल 2019
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Image caption अमारा मजीद

अमरीका में रहने वाली अमारा मजीद एक मुस्लिम एक्टिविस्ट हैं.

उन्होंने दुनिया भर में मुसलमानों के लिए व्याप्त स्टीरियोटाइप यानी मुसलमानों को एक खांचे और छवि में फ़िट करने के चलन को तोड़ने के लिए एक किताब भी लिखी है. किताब का नाम है- 'द फ़ॉरेनर्स'.

हाल ही में अमारा के साथ कुछ ऐसा हुआ जिससे उन्हें बहुत दुख और नाराज़गी हुई.

श्रीलंका सरकार और पुलिस ने ग़लती से अमारा को कोलंबो में हुए आत्मघाती धमाकों के लिए ज़िम्मेदार माने जा रहे इस्लामिक स्टेट से जुड़ी संदिग्ध बता दिया.

जब ये ख़बर अमारा तक पहुंची तो उन्होंने ट्वीट किया:

"आज सुबह मुझे पता चला कि श्रीलंका की सरकार ने ग़लत तरीके से ईस्टर रविवार को हुए हमलों के सिलसिले में इस्लामिक स्टेट से ताल्लुक रखने वाली संदिग्ध के तौर पर मेरी पहचान की है. क्या सुबह रही ये!"

अमारा ने लिखा, "ज़ाहिर है कि ये पूरी तरह से ग़लत और झूठ है. मैं साफ़ शब्दों में कहूं तो हमारा समुदाय पहले ही कड़ी निगरानी से जूझ रहा है. मुझे और ज़्यादा झूठे आरोपों और पड़ताल की ज़रूरत नहीं है. कृपया मुझे इन भयानक हमलों से जोड़ना बंद कीजिए और अगली बार से ऐसी सूचना जारी करने से पहले ज़्यादा मेहनत कीजिएगा क्योंकि इनसे किसी का परिवार और समुदाय बुरी तरह आहत हो सकता है."

अमारा के ट्वीट के बाद श्रीलंकाई पुलिस ने एक बयान जारी कर अपनी ग़लती के लिए माफ़ी मांगी और कहा कि 'इस तस्वीर में दिखाई गई महिला वॉन्टेड नहीं है.'

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'हिजाब मिशन और ट्रंप को चिट्ठी'

अमारा 16 साल की उम्र में उस वक़्त चर्चा में आई थीं जब उन्होंने 'द हिजाब प्रोजेक्ट' की शुरुआत की थी. इस प्रोजेक्ट के तहत अमारा ने मुस्लिम और ग़ैर मुस्लिम महिलाओं को हिजाब पहनने और इसका अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर करने को कहा.

अमारा ने डोनल्ड ट्रंप के चुनावी अभियान के दौरान उन्हें खुला खत लिखा था.

उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा था, "मैंने अपनी ज़िंदगी का मिशन बना लिया है कि आप जैसे लोगो की फैलाई नफ़रत को खत्म करूंगी और मुसलमानों से जुड़ी घिसी-पिटी धारणाओं को चुनौती दूंगी."

बीबीसी ने अमारा मजीद को साल 2015 में अपनी सालाना सीरीज़ #100Women में भी शामिल किया था.

श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में ईस्टर रविवार को अलग-अलग चर्चों और होटलों को निशाना बनाया गया था. इन धमाकों में कम से कम 250 लोगों की मौत हो गई थी.

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