श्रीलंका ब्लास्टः मुख्य संदिग्ध के पिता और भाई की मौत

  • 28 अप्रैल 2019
श्रीलंका ब्लास्टः मुख्य संदिग्ध के रिश्तेदारों की हत्या इमेज कॉपीरइट Reuters

श्रीलंका में ईस्टर रविवार को हुए आत्मघाती धमाकों के मुख्य संदिग्ध ज़हरान हाशिम के पिता और दो भाई सुरक्षा बलों के एक ऑपरेशन में शुक्रवार को मारे गए.

पुलिस के मुताबिक ये माना जा रहा है कि हाशिम की मां भी मारी गई हैं. इन सभी की मौत उस वक़्त हुई जब सुरक्षा बलों ने हमले के संदिग्धों के ठिकानों पर छापे की कार्रवाई की. रिपोर्टों के मुताबिक हाशिम के पिता और भाई ने धमाके में खुद को उड़ा लिया.

श्रीलंका सरकार के मुताबिक हाशिम की भी कोलंबो के एक होटल में आत्मघाती हमले में मौत हो गई. ये कहा जाता है कि वो इस्लामिक ग्रुप नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) के नेता थे. इस संगठन पर अब प्रतिबंध लगा दिया गया है.

पुलिस ने कट्टनकुडी के पूर्वी इलाक़े में स्थित समूह के मुख्यालय पर छापा मारा था.

पिछले रविवार को हुए हमलों में होटल और चर्चों को निशाना बनाया गया था, जिसमें कम से कम 250 लोग मारे गए थे.

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Image caption पुलिस ने एनटीजे के मुख्यालय को सील कर दिया है

हमले के बाद एहतियात के तौर पर देशभर के सभी चर्चों में रविवार को होने वाली प्रार्थना सभाओं को रद्द कर दिया गया.

हालांकि रविवार को सेंट एंटनी चर्च के बाहर लोग प्रार्थना के लिए जुटे. ये चर्च बीते रविवार के हमले में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है.

कैसे मारे गए रिश्तेदार

श्रीलंका पुलिस के मुताबिक शुक्रवार को हाशिम के शहर कट्टनकुडी में सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की. जैसे ही पुलिस हाशिम के घर पहुंची, सुरक्षाकर्मियों पर बंदूकधारियों ने हमला कर दिया.

तीन लोगों ने खुद को बम से उड़ा लिया, जिसमें छह बच्चे और तीन औरतें मारी गईं. गोलीबारी में तीन अन्य लोगों की भी मौत हो गई.

हमलों के तार एनटीजे नाम के एक समूह से जुड़ रहे हैं.

इस समूह के बारे में पहले बहुत कम लोग जानते थे.

हालांकि एनटीजे या किसी और समूह ने अब तक इन सिलसिलेवार धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.

फिर भी आरोप अपनी जगह हैं और एनटीजे को लेकर चर्चाएं जारी हैं.

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एसएलटीजे से अलग होकर बना?

सोमवार को श्रीलंका सरकार के प्रवक्ता ने जब पहली बार इस समूह का नाम लिया तो यह एक अनजाना नाम था.

बताया जाता है कि यह समूह श्रीलंका के कट्टरपंथी इस्लामी समूह श्रीलंका तौहीद जमात (एसएलटीजे) से अलग होकर वजूद में आया है.

एसएलटीजे भी बहुत चर्चाओं में नहीं रहा है लेकिन फिर भी उसके बारे में कुछ जानकारियां उपलब्ध हैं. एसएलटीजे के सचिव अब्दुल राज़िक को 2016 में बौद्ध लोगों के ख़िलाफ़ नफ़रत फैलाने के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था. बाद में उन्होंने इस पर माफ़ी भी मांगी थी.

बीते दिसंबर में मध्य श्रीलंका के मॉनेला में बौद्ध मठों पर हुई तोड़फोड़ को भी कुछ रिपोर्टों में एसएलटीजे से जोड़ा गया था. उस वक़्त मठ के बाहर लगी बुद्ध की मूर्तियों को निशाना बनाया गया था.

श्रीलंका में मुसलमान अल्पसंख्यक हैं. देश की कुल आबादी का सिर्फ़ 9.7 फीसदी ही मुसलमान हैं.

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